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This Article is From Mar 09, 2026

Rolls‑Royce से पिकअप, मुफ्त खाना‑रहना: UAE में फंसे लोगों के लिए भारतीय बिजनेसमैन का फार्म हाउस बना घर

मिडिल ईस्‍ट में हालिया छिड़े संघर्ष और इसके कारण हवाई सेवाओं में आ रही बाधाओं के चलते बहुत से भारतीय यूएई में फंस गए हैं. ऐसे में बिजनेसमैन और 1XL होल्डिंग्स के चेयरमैन डॉ. धीरज जैन ने अपने 80 हजार वर्ग फुट में फैले विशाल फॉर्म हाउस को एक आश्रय स्‍थल के रूप में उन यात्रियों के लिए खोल दिया है, जो मौजूदा हालात में अपने देश वापस नहीं लौट पा रहे हैं.

Rolls‑Royce से पिकअप, मुफ्त खाना‑रहना: UAE में फंसे लोगों के लिए भारतीय बिजनेसमैन का फार्म हाउस बना घर
  • अमेरिका और इजरायल की ईरान से छिड़ी जंग का खामियाजा मिडिल ईस्‍ट के दूसरे देशों को भी भुगतना पड़ रहा है.
  • यूएई में फंसे भारतीयों के लिए डॉ. धीरज जैन ने मिसाल पेश की है और उनका फार्म हाउस अस्‍थायी घर बन गया है.
  • डॉ. जैन ने लोगों को लाने के लिए 11 वाहन तैनात किए हैं, जिनमें छह लग्जरी रोल्स-रॉयस कारें भी शामिल हैं.

अमेरिका और इजरायल की ईरान से छिड़ी जंग का खामियाजा मिडिल ईस्‍ट के दूसरे देशों को भी भुगतना पड़ रहा है. इस इलाके में ईरान के हमलों के बाद लोगों के सामने संकट की स्थिति पैदा हो गई है. हालांकि संयुक्‍त अरब अमीरात के अजमान में एक भारतीय‍ बिजनेसमैन ने मुश्किल वक्‍त में मानवता की मिसाल पेश की है. यूएई में फंसे भारतीयों के लिए अब डॉ. धीरज जैन का फार्म हाउस अस्‍थायी घर बन गया है, जहां पर लोगों को रोल्‍सरॉयस से पिकअप किया जाता है और मुफ्त में रहने-खाने की सुविधा दी जा रही है. एनडीटीवी ने अजमान में लोगों के लिए आश्रय स्‍थल बने इस  फार्म हाउस में रह रहे लोगों से बात की है.

मिडिल ईस्‍ट में हालिया छिड़े संघर्ष और इसके कारण हवाई सेवाओं में आ रही बाधाओं के चलते बहुत से भारतीय यूएई में फंस गए हैं. ऐसे में बिजनेसमैन और 1XL होल्डिंग्स के चेयरमैन डॉ. धीरज जैन ने अपने 80 हजार वर्ग फुट में फैले विशाल फॉर्म हाउस को एक आश्रय स्‍थल के रूप में उन यात्रियों के लिए खोल दिया है, जो मौजूदा हालात में अपने देश वापस नहीं लौट पा रहे हैं. बीते कुछ दिनों से यह फार्म हाउस फंसे हुए लोगों के लिए राहत का केंद्र बना हुआ है. 

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लोगों को लाने के लिए 6 रोल्‍स-रॉयस सहित 11 गाड़ियां

हर कुछ घंटों में अजमान स्थित इस फार्म हाउस पर गाड़ियों का काफिला पहुंचता है. ये गाड़ियां उन यात्रियों को लेकर आती हैं, जिनकी उड़ानें संघर्ष और सुरक्षा हालात के चलते बाधित हो गई हैं. डॉ. धीरज जैन ने यात्रियों को आश्रय स्थल तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए कुल 11 गाड़ियां तैनात की हैं, जिनमें छह लग्जरी रोल्स-रॉयस कारें भी शामिल हैं. ये वाहन होटलों और अन्य स्थानों पर फंसे लोगों को फार्म हाउस तक पहुंचा रहे हैं. 

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डर और अनिश्चितता के माहौल में की मदद 

जैन ने यह पहल 28 फरवरी को शुरू की थी, जब हालात अचानक बिगड़ गए और यूएई पहुंचे कई लोगों को यह अहसास हुआ कि वो अब जल्‍द वापस नहीं लौट सकते हैं. कई लोग ऐसे थे जिनके पास न तो पर्याप्त पैसे बचे थे और न ही रहने की कोई व्यवस्था थी. ऐसे समय में यह आश्रय गृह उनके लिए जीवन रेखा बनकर सामने आया. 

महाराष्ट्र और राजस्थान से आए कई पर्यटक परिवारों ने एनडीटीवी को बताया कि तेज धमाकों की आवाजें सुनकर वे शुरू में बेहद डर गए थे. अनिश्चितता और डर के माहौल में वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे थे. हालांकि, अजमान के इस फार्महाउस में पहुंचने के बाद उन्हें राहत और सुरक्षा का एहसास हुआ. इन परिवारों का कहना है कि यहां उन्हें न सिर्फ छत मिली, बल्कि सम्मान और अपनापन भी मिला. 

मुश्किल हालात लेकिन बढ़ा मदद का हाथ

केस-1 

एनडीटीवी ने यूएई में फंसे भारत के राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर हरप्रीत से भी बात की. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल खेलने का मौका दिलाने का वादा करने वाले एक एजेंट द्वारा ठगे जाने के बाद से वे पहले से ही जीवन के बेहद कठिन दौर से गुजर रहे थे. इस कारण उन्होंने अपनी अधिकांश धनराशि गंवा दी. मौजूदा हालात और यात्रा में व्यवधान के कारण वे अब बिना किसी आर्थिक सहायता के यहीं फंसे हुए हैं. हरप्रीत ने बताया कि उन्हें करीब 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा और फिर अजनबियों से लिफ्ट लेकर आखिरकार इस आश्रय तक पहुंचे, जहां वे अब सुरक्षित रूप से रह रहे हैं. 

केस-2 

इसके साथ ही एनडीटीवी ने मूल रूप से ईरान के रहने वाले मुस्तफा से भी बात की. उन्होंने बताया कि मौजूदा तनाव के बीच अपने ईरानी पासपोर्ट से संबंधित प्रतिबंधों के कारण वे ओमान के मस्कट की यात्रा नहीं कर पा रहे हैं. मुस्तफा ने इस दौरान अपनी साइकिल भी खो दी है और बेहद मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं. वे फिलहाल धीरज जैन के आश्रय गृह में अन्य लोगों के साथ रह रहे हैं. 

अजमान स्थित इस आश्रय स्‍थल में कई परिवार और विभिन्‍न पृष्‍ठभूमि के लोग हैं. सभी को यात्रा शुरू होने की प्रतीक्षा है. यहां पर एनडीटीवी ने कुछ ऐसे लोगों से भी बात की है, जो टिकट की फ्लाइट की बढ़ती कीमतों के कारण परेशान हैं. उनका कहना है कि हम आम आदमी हैं, हम एक लाख रुपये कहां से लाएंगे. 

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