ईरान के मारे गए सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान इराक के पवित्र शहर करबला में ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि सड़कें लोगों से पूरी तरह भर गईं. हजारों-लाखों लोग सुबह से ही जनाजे के मुख्या रास्ते और पवित्र स्थलों के आसपास पहुंच गए थे. कई लोग तो एक दिन पहले ही अपनी जगह सुरक्षित करने के लिए करबला आ गए थे. हर किसी की नजर उस ताबूत पर थी, जिसका इंतजार घंटों से किया जा रहा था. इससे पहले खामेनेई का ताबूत इराक के दूसरे पवित्र शहर नजफ ले जाया गया था. वहां सुनहरे इमाम अली दरगाह में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए. शोक मनाने वालों ने ताबूत को अपने कंधों पर उठाया. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि ताबूत एक तरफ से दूसरी तरफ झूलता रहा. कई लोग उसे छूने की कोशिश में आगे बढ़ते रहे और धक्का-मुक्की भी होती रही.
बाद में ताबूत को सड़क मार्ग से नजफ से करबला लाया गया. जैसे ही ताबूत शहर में पहुंचा, भारी भीड़ धीरे-धीरे उसके साथ आगे बढ़ने लगी. लोग ईरान के झंडे लहरा रहे थे और खामेनेई की तस्वीरें हाथों में लिए हुए थे. पूरे रास्ते धार्मिक नारे गूंजते रहे. लाउडस्पीकरों से आवाजें आ रही थीं, जिनके जवाब में लोग नारे लगा रहे थे. इन नारों में ईरान, उसके नेताओं और तेहरान के सहयोगी समूहों की भी जय-जयकार की जा रही थी.
ईरान के मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे के दौरान इराक के Karbala में जनसैलाब उमड़ पड़ा. ईरान में दफन किए जाने से पहले खामेनेई के ताबूत को पवित्र शहर Karbala ले जाया गया, जहां लाखों लोगों ने अंतिम विदाई दी. #KhameneiFuneral #KarbalaProcession #GlobalConflict pic.twitter.com/odLYc9a5g2
— NDTV India (@ndtvindia) July 9, 2026
भीषण गर्मी के बीच लोगों को राहत देने के लिए जगह-जगह पानी का छिड़काव किया गया. रास्तों पर खाने-पीने के स्टॉल लगाए गए थे ताकि दूर-दूर से आए लोगों को परेशानी न हो. सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात थे और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीमें भी तैयार रखी गई थीं.
बता दें कि ईरान ने शनिवार से छह दिन के अंतिम संस्कार कार्यक्रम शुरू किए हैं. इनमें उन जगहों को शामिल किया गया है जो ईरान की धार्मिक, राजनीतिक और वैचारिक पहचान से जुड़ी हैं. एक पूरा दिन पड़ोसी देश इराक को समर्पित किया गया, जहां शिया समुदाय के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल मौजूद हैं और जिसके तेहरान से करीबी संबंध हैं. ये अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू हुई, फिर ईरान के पवित्र शहर को पहुंची और अब इराक के नजफ और करबला से होकर गुजर रही. फिर ताबूत ईरान लौटेगा. आज यानी गुरुवार को खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा.
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