क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर के शातिर साइबर अपराधियों और स्कैमर्स के लिए भारतीय मूल के लोगों को अपना शिकार बनाना लोहे के चने चबाने जैसा है? यह हम नहीं, बल्कि मलेशियाई पुलिस के ताज़ा आंकड़े कह रहे हैं. मलेशिया के पेनांग राज्य की पुलिस ने एक बेहद दिलचस्प खुलासा करते हुए बताया है कि भारतीय समुदाय के लोगों को ठगना लगभग नामुमकिन है, क्योंकि वे स्कैमर्स से इतने सवाल पूछते हैं कि अपराधी खुद ही कॉल काटकर भाग खड़ा होता है.
'सवालों की बौछार' बना भारतीयों का सबसे बड़ा हथियार
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, जब भी कोई स्कैमर किसी भारतीय व्यक्ति को फोन करता है, तो उसे 'स्क्रिप्ट' पढ़ने का मौका ही नहीं मिलता. पेनांग CCID के उप प्रमुख पैंग मेंग टक ने एक फोरम के दौरान बताया कि भारतीय मूल के लोग अक्सर स्कैमर्स पर सवालों की झड़ी लगा देते हैं. वे तब तक सवाल पूछते रहते हैं जब तक कि धोखेबाज हार मानकर किसी और को फोन नहीं लगा लेता.
उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया, "मान लीजिए किसी स्कैमर ने फोन किया और झूठी फिरौती या अपहरण की कहानी सुनाई. ऐसे में एक भारतीय पीड़ित तुरंत पूछेगा किसका अपहरण हुआ? कहां से हुआ? कब हुआ? आपने उसे क्यों पकड़ा? वह किस रंग के कपड़े पहने था?" पैंग के अनुसार, यह सिलसिला तब तक चलता है जब तक स्कैमर परेशान होकर फोन न काट दे.
बढ़ रहा है साइबर क्राइम का आंकड़ा
सरकार ने भी इस खतरे को भांपते हुए कार्रवाई तेज की है. संचार मंत्रालय ने जानकारी दी है कि साल 2025 में 98,500 से अधिक स्कैम से संबंधित पोस्ट सोशल मीडिया से हटाए गए, जो पिछले साल के 63,652 के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं. लेकिन इस भारी लूट के बीच भी भारतीय समुदाय अपनी सतर्कता और 'क्रॉस-क्वेश्चनिंग' की आदत की वजह से बचा हुआ है.
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