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दान के पैसों से बौद्ध भिक्षु ने जीती 2.28 करोड़ रुपये की लॉटरी, बैंक वालों ने फोन किया तो फ्रॉड समझकर काट दिया

रातोंरात लॉटरी जीतकर करोड़पति बनने वाले बौद्ध भिक्षु ने मीडिया को बताया है कि वो इस पैसे का कहां और किस तरह से खर्च करने वाले हैं. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

दान के पैसों से बौद्ध भिक्षु ने जीती 2.28 करोड़ रुपये की लॉटरी, बैंक वालों ने फोन किया तो फ्रॉड समझकर काट दिया
रातोंरात करोड़पति बने बौद्ध भिक्षु का बड़ा फैसला, 2 करोड़ रुपये का ऐसा इस्तेमाल जीत लेगा आपका दिल. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

World News: मलेशिया में रहने वाले बौद्ध भिक्षु चान चाई सियांग रातोंरात करोड़पति बन गए हैं. उन्होंने बैंक के लकी ड्रॉ में करीब 2.28 करोड़ रुपये का इनाम जीता है. जब इसकी जानकारी देने के लिए बीएसएन बैंक के अधिकारी उन्हें फोन कर रहे थे, तो बौद्ध भिक्षु ने उन्हें स्कैमर समझ लिया और लगातार 3 बार कॉल काट दी. इसके बाद बैंक के अधिकारी खुद चलकर उनकी कुटिया पर आए और उनका लकी ड्रॉ निकलने की जानकारी है.

40 साल की उम्र में लिया था संन्यास

लॉटरी जीतने के बाद जब 73 साल के बौद्ध भिक्षु से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वे पहले एक फैक्ट्री में काम किया करते थे. लेकिन करीब 40 साल की उम्र में उन्होंने संन्यास ले लिया था. इसके बाद से ही वो एक आश्रम में सादा जीवन बिता रहे हैं. 

'दान के पैसे बचाकर जीती लॉटरी'

'द स्ट्रेट्स टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, बौद्ध भिक्षु ने यह इनाम अपनी छोटी सी बचत के दम पर जीता है. लोगों से जो भी दान उन्हें मिलता था, उसमें से वे कभी 228 रुपये तो कभी उससे थोड़े ज्यादा पैसे बैंक में जमा कर देते थे. इसी बचत की वजह से उन्हें बैंक के लकी ड्रॉ में शामिल होने का मौका मिला और वे करोड़पति बन गए.

'मेरे पिछले जन्म के कर्मों का फल है'

इतनी बड़ी रकम जीतने के बावजूद चान कहते हैं कि उन्हें पैसों का कोई मोह नहीं है. उनका मानना है कि यह जीत कोई भगवान का चमत्कार या आशीर्वाद नहीं है, बल्कि उनके पिछले जन्मों के 'कर्म' का नतीजा है. बौद्ध भिक्षु ने बताया कि उन्होंने कभी भी पैसों के लिए मन्नत नहीं मांगी थी, ना ही उन्हें इस पैसे की जरूरत है.

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मलेशिया के भिक्षुओं को मिलती है कम मदद

बैंक पहुंचकर लॉटरी टिकट लेने बौद्ध भिक्षु ने 'द सन मलेशिया' से भी बात की थी, जिसमें उन्होंने बताया कि थाईलैंड जैसे देशों की तुलना में, मलेशिया में बौद्ध भिक्षुओं को संस्थाओं से काफी कम आर्थिक मदद मिलती है. ऐसे में संन्यासी समाज के लिए आपस में एक-दूसरे की मदद करना बहुत जरूरी हो जाता है. उनका मंदिर पहले से ही उन बीमार भिक्षुओं की मदद करता आ रहा है, जो इलाज के लिए पेनांग आते हैं.'

2 हिस्सों से दान कर देंगे पूरे 2 करोड़ रुपये

चान ने आगे कहा, 'इसीलिए मैंने फैसला किया है कि मैं ये सारा पैसा समाज की भलाई के लिए वापस कर दूंगा क्योंकि मुझे इसकी जरूरत नहीं है. 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की इस रकम का एक बड़ा हिस्सा बीमार और जरूरतमंद लोगों की मदद में खर्च किया जाएगा. जबकि दूसरा हिस्सा दान-पुण्य करके धर्म के कामों में खर्च होगा.

'पैसे की असली कीमत यही है'

बौद्ध भिक्षु का कहना है कि इन पैसों का सही इस्तेमाल होना जरूरी है. अगर कोई पैसे का समझदारी से इस्तेमाल करता है, तो यह उसको और दूसरों को खुशी देता है. पैसे की असली कीमत बस यही है.

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