दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह, जो 15 सालों से अपनी ताकत के दम पर हुकूमत कर रहा है, उसने कुर्सी पर रहते कभी भी सार्वजनिक रूप में अपनी मां का नाम तक नहीं लिया. एक बार भी नहीं. आखिर क्यों... हम बात कर रहे हैं नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की. किम की मां की पहचान न केवल एक रहस्य है, बल्कि खुद किम जोंग उन के शासन के लिए एक खतरा मानी जाती है. ऐसा क्यों है, इसे समझने के लिए आपको नॉर्थ कोरिया के कास्ट सिस्टम यानी जाति व्यवस्था को जानना होगा.
किम जोंग उन का कुर्सी पर दावा
किम जोंग की जो तानाशाही है, या उनका नॉर्थ कोरिया के शासक की कुर्सी पर जो दावा है, वह काफी हद तक उनके 'माउंट पेक्टू' वंश से होने के दावे पर टिका है. यह वंश कोरियाई लोगों के पौराणिक संस्थापक कहे जाने वाले डैंगन से जुड़ा हुआ है. नॉर्थ कोरिया में माना जाता है कि कोरिया की कहानी माउंट पैक्टू से ही शुरू होती है. यह चीन और उत्तर कोरिया की सीमा पर स्थित एक पहाड़ है, जिसे कोरिया को सबसे पहले देश का रूप देने वाले पौराणिक संस्थापक डैंगन का जन्मस्थान माना जाता है.
किम जोंग इल ही किम जोंग उन के पिता थे और अपने पिता की तरफ से किम जोंग उन भी 'माउंट पेक्टू' वंश के होने का दावा करते हैं.
लेकिन किम जोंग उन की मां ऐसे किसी बड़ी समझी जाने वाली वंश की नहीं थीं. किम जोंग उन के मां के पक्ष की वंशावली एक अलग ही तस्वीर पेश करती है. माउंट पेक्टू के सैंकड़ों मील दूर जापान के ओसाका में किम जोंग उन की मां, को योंग हुई का जन्म हुआ था. को योंग का जन्म 1952 में ओसाका में हुआ था. उनके माता-पिता मूल रूप से जेजू द्वीप के रहने वाले थे, जो आज के साउथ कोरिया के दक्षिणी तट के पास स्थित है.
जापान में रहने के कारण, को योंग के परिवार को 'जैनिची कोरियन' कहा जाता था. यानी वे लोग जो 1910-1945 के दौरान कोरियाई प्रायद्वीप पर जापान के राज के समय आकर जापान में बस गए थे. हालांकि जब वह लगभग 10 साल की थीं, तो को योंग का परिवार नॉर्थ कोरिया चला गया.
यह परिवार उन लगभग 93,000 कोरियाई लोगों में शामिल था जो 1959 और 1984 के बीच नॉर्थ कोरिया चला आया था. उन्हें नॉर्थ कोरिया में मुफ्त स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और नौकरी के साथ एक सुखद जीवन का वादा किया गया था. वैसे नॉर्थ कोरिया जाने वाले इन प्रवासियों को शुरू से ही गलत नजर से देखा जाता था. कहा गया कि ये प्रवासी पूंजीवादी पड़ोसी देश जापान से नकद पैसे, कपड़े और घरेलू उपकरण साथ लाए थे.
नॉर्थ कोरिया का 'कास्ट सिस्टम' और किम जोंग उन कीं मां
इन प्रवासियों को 'जेजेपो' का नाम दिया गया. यह विदेशी, खतरनाक विचारधाराओं से दूषित माने जाने वाले समूह के लिए एक अपमानजनक शब्द है. भारत की तरह ही नॉर्थ कोरिया का समाज भी गहराई से विभाजित है. ठीक वैसे ही जैसे भारत में समाज को जातियों में बांटा गया है. किसी को तथाकथित ऊंचा समझा जाता है तो किसी को नीचा. यही वजह है कि कुछ विश्लेषक नॉर्थ कोरिया के समाज की तुलना भी जाति व्यवस्था से करते हैं.
नॉर्थ कोरिया के सख्त सामाजिक वर्गीकरण में जेजेपो लोग "ढुलमुल वर्ग" से संबंधित हैं, जो जाति व्यवस्था के तालिका में मूल लोग और शत्रु वर्गों के बीच कहीं है. उन पर सरकार और प्रशासन की कड़ी निगरानी रखी जाती है और इन्हें अक्सर न अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलता है और न ही अच्छी नौकरी.
वैसे तो किम जोंग के पिता की 4 पत्नियां थी लेकिन कानूनी पत्नी का दर्जा केवल एक को था. किम जोंग की मां, को योंग इन्हीं पत्नियों से एक थी लेकिन उनकी आधिकारिक शादी नहीं हुई थी. योजी गोमी नाम के एक जापानी रिपोर्टर का कहना है कि को योंग मशहूर 'मानसुडे आर्ट ट्रूप' में थीं और अपनी नेचुरल खूबसूरती और डांसिंग स्किल्स की वजह से किम का ध्यान खींचने में कामयाब रहीं. दोनों को प्यार हो गया और उनके तीन बच्चे भी हुए. एक बेटा किंम जोंग उन था.
यही वजह है कि दुनिया के सबसे ताकतवर तानाशाहों में गिने जाने वाले किम जोंग उन ने अपनी मां का नाम सार्वजनिक रूप से कभी नहीं लिया. उनकी मां की पहचान, उस कहानी से मेल नहीं खाती जिस पर किम परिवार ने दशकों से अपनी सत्ता की नींव रखी है. सवाल सिर्फ एक मां का नहीं, बल्कि उस छवि का है जिसे बचाने के लिए इतिहास, पहचान और रिश्तों तक को छिपा दिया गया. आखिर सत्ता बचाने की कीमत कितनी बड़ी हो सकती है, इसका जवाब शायद नॉर्थ कोरिया से बेहतर कहीं और नहीं मिलता.
(इनपुट- बीबीसी)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं