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'मानसिक रूप से बीमार...', ख्लाजा आसिफ को पीएम मोदी पर टिप्पणी करना भारी, भारत ने जमकर सुना दिया - सूत्र

भारत सरकार से जुड़े सूत्र ने NDTV से कहा कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने जो कुछ कहा है उससे उनके दिमाग के खालीपन का पता चलता है. और ये भी पता चलता है कि उनके पास करने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वो ऐसी टिप्पणी करके अपना टाइम पास करते हैं.

'मानसिक रूप से बीमार...', ख्लाजा आसिफ को पीएम मोदी पर टिप्पणी करना भारी, भारत ने जमकर सुना दिया - सूत्र
पाक रक्षा मंत्री ने पीएम मोदी पर की टिप्पणी
NDTV
नई दिल्ली:

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ एक बार फिर गलत कारणों से चर्चाओं में बने हैं. इस बार चर्चाओं में रहने की प्रमुख वजह है कि पीएम मोदी को मिले अवॉर्ड पर उनकी टिप्पणी. ख्वाजा आसिफ की इन टिप्पणियों पर  भारत सरकार से जुड़े सूत्र ने उन्हें जमकर सुना दिया है. भारत सरकार से जुड़े सूत्र ने NDTV से कहा कि ख्वाजा आसिफ की ये टिप्पणी बताती है कि वो अपना संतुलन खो बैठे हैं. वो मानसिक रूप से बीमार हैं. ख्वाजा को आज जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उससे पाकिस्तान के बारे में बहुत कुछ पता चलता है. इससे ये भी साफ है कि उनके पास कोई काम-धंधा नहीं है. इसलिए वो बेतुकी बातें करके समय बिता रहे हैं. जलन हमेशा एक बुरी भावना होती है,खासकर तब जब यह नफ़रत फैलाने वाले किसी व्यक्ति की ओर से हो. 

पीएम मोदी पर टिप्पणी कर ख्वाजा ने कराई फजीहत

आपको बता दें कि ख्वाजा आसिफ़ ने इस अवॉर्ड को "सोची-समझी मान्यता" बताया और आरोप लगाया कि इसे PM मोदी के दौरे से ठीक पहले जल्दबाज़ी में तैयार किया गया था. सम्मान-पत्र के शुरुआती वर्शन में टाइपिंग की गलतियों की खबरों का ज़िक्र करते हुए, पाकिस्तानी मंत्री ने दावा किया कि यह घटना "अब तक की सबसे शर्मनाक बात" थी.

ख्वाजा की ये टिप्पणी इसलिए चर्चाओं में है क्योंकि खुद सेशेल्स सरकार ने पहले ही उन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. जिनमें कहा जा रहा था कि यह अवॉर्ड मनगढ़ंत था या पीएम मोदी की यात्रा के लिए बनाया गया था. इसे लेकर सेशेल्स के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान भी जारी किया था. इस बयान में कहा गया था कि 'ऑर्डर ऑफ द गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' देश के 'नेशनल ऑनर्स एक्ट' के तहत स्थापित किया गया था और पीएम मोदी के आगमन से पहले इसे औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई थी. 

इस बयान में आगे कहा गया था कि ऑनलाइन प्रसारित हो रहा दस्तावेज़ एक आंतरिक वर्किंग ड्राफ्ट था जिसे अंतिम प्रूफरीडिंग से पहले अनजाने में साझा कर दिया गया था, और इस बात पर जोर दिया गया कि अंतिम, आधिकारिक तौर पर स्वीकृत प्रशस्ति पत्र सम्मान समारोह के दौरान प्रस्तुत किया गया था और उसमें ऐसी कोई त्रुटि नहीं थी. 

खास बात ये है कि भारत ने इस अवॉर्ड से जुड़े विवाद पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की आलोचना में तथ्यों के बजाय "ईर्ष्या" झलकती है. सूत्रों ने आसिफ पर ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने का आरोप लगाया है, "जिनके बारे में उन्हें बहुत कम जानकारी है. 

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