प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बताया कि देश के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी की अगुवाई में एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का फैसला लिया गया है. यह टास्क फोर्स एग्जाम रिफॉर्म्स पर काम करेगी.
पीएम मोदी ने कहा कि अब हमें भविष्य के बारे में सोचना है. परीक्षाओं को विश्वस्त बनाना है, ट्रांसपेरेंट बनाना है और ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना है, इसलिए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का फैसला लिया है, जो एग्जाम रिफॉर्म की तरफ फोकस करेगा.
नंदन नीलेकणी वही शख्स हैं, जिन्होंने भारत को 'आधार' दिया. वह जाने-माने बिजनेसमैन हैं. वह इन्फोसिस के को-फाउंडर भी हैं. उन्होंने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई थी. हालांकि, राजनीति में वह कामयाब नहीं हो सके.
कौन हैं नंदन नीलेकणी?
नंदन नीलेकणी का जन्म 2 जून 1955 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुआ था. उन्होंने कर्नाटक से ही अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की और उसके बाद आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की.
1978 में उन्होंने मुंबई की पाटनी कंप्यूटर सिस्टम से अपना करियर शुरू किया था, जहां उनकी मुलाकात नारायण मूर्ति से हुई. 1981 में नंदन नीलेकणी और नारायण मूर्ति ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपनी खुद की कंपनी 'इंफोसिस' शुरू की.
मार्च 2002 में नंदन नीलेकणी इंफोसिस के CEO बनाए गए.2009 में उन्होंने इंफोसिस छोड़ दी. 2017 में वह इंफोसिस में दोबारा आए और तब से ही इसके नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं.
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नंदन नीलेकणी की 4 बड़ी पहचान
1. इंफोसिस के को-फाउंडर: साल 1981 में नारायण मूर्ति और कुछ दोस्तों के साथ मिलकर देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी में से एक इंफोसिस की स्थापना की. वह 2002 से 2007 तक इसके CEO रहे. 2017 से नीलेकणी इसके नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं.
2. आधार कार्ड के जनक: जुलाई 2009 में इंफोसिस छोड़कर वह UIDAI के चेयरमैन बने. तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कहने पर उन्होंने यह पद संभाला था. उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्रिक आईडी सिस्टम 'आधार' का ढांचा तैयार किया और उसे लागू किया.
3. UPI के आर्किटेक्ट: आज जो हम QR कोड स्कैन करके UPI से सेकंडों में पेमेंट कर पाते हैं, उसके पीछे भी नंदन नीलेकणी की बड़ी भूमिका है. दिसंबर 2016 में डिजिटल पेमेंट का फ्रेमवर्क तैयार करने वाली कमेटी में भी नीलेकणी थे. इसके बाद 2019 में RBI की एक कमेटी की अध्यक्षता भी नंदन नीलेकणी ने की थी.
4. सबसे अमीर भारतीयों में से एक: नंदन नीलेकणी सबसे अमीर भारतीयों में से एक हैं. फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ 2.4 अरब डॉलर है. वह सबसे बड़े दानवीरों में से एक हैं. 2023 में उन्होंने IIT बॉम्बे को 3.8 करोड़ डॉलर का डोनेशन दिया था.
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राजनीति में भी आजमाई किस्मत
नंदन नीलेकणी टेक्नोलॉजी और बिजनेस में तो कामयाब हो गए, लेकिन राजनीति में उनकी किस्मत ने साथ नहीं दिया.
मार्च 2014 में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की और उस साल का लोकसभा चुनाव बेंगलुरु साउथ सीट से लड़ा. नीलेकणी 2014 के चुनाव के समय सबसे अमीर उम्मीदवारों में से एक थे. चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, उनके पास 7,700 करोड़ रुपये की संपत्ति थी.
हालांकि, इस चुनाव में नीलेकणी बुरी तरह हारे. यह वह चुनाव था, जिसमें जबरदस्त मोदी लहर चली थी और कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर सिमट गई थी. बेंगलुरु साउथ सीट से नीलेकणी को बीजेपी उम्मीदवार अनंत कुमार ने 2.28 लाख से ज्यादा वोटों से हरा दिया था.
इस हार के बाद वह राजनीति से दूर ही हो गए. मोदी सरकार में उन्हें कई कमेटियों का अध्यक्ष बनाया गया है और कइयों में वह सदस्य रहे हैं. अब शिक्षा में सुधार का जिम्मा भी सरकार ने उन्हीं पर सौंपा है.
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