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अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए मौत बनकर अंतरिक्ष से आई इजरायल की 'नीली चिड़िया'

सिल्वर स्पैरो मिसाइल परिवार की सबसे उन्नत और सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है. इसे ईरान की शाहेब-3 जैसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का जवाब देने के लिए विकसित किया गया था.

अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए मौत बनकर अंतरिक्ष से आई इजरायल की 'नीली चिड़िया'
खामेनेई की मौत स्पैरो मिसाइल से हुई ऐसा कई रिपोर्ट में दावा किया गया है.
  • इजरायल की ब्लू स्पैरो मिसाइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या में अहम भूमिका निभाई है
  • ब्लू स्पैरो मिसाइल लगभग 1,240 मील की मारक क्षमता वाली है और पृथ्वी के वायुमंडल को पार कर टारगेट तबाह करती है
  • ब्लू स्पैरो मिसाइल को लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जाता है और यह ठोस-ईंधन बूस्टर से संचालित होती है
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28 फरवरी की सुबह, जब तेहरान जागकर उठा, तो अयातुल्ला अली खामेनेई ईरानी राजधानी के मध्य में स्थित पाश्चर स्ट्रीट पर एक नेतृत्व परिसर में पहुंचे. 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता ने पिछले कई सप्ताह इजरायली हमलों के डर से भूमिगत रहने के बाद एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए बाहर आए थे. मगर, कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई. जिस हथियार ने उन्हें मारा, वह न तो धीरे-धीरे आया और न ही वह आसपास से आया. मौत देने वाली इजरायल की नीली चिड़िया थी, और सीधे अंतरिक्ष से चलकर आई थी. इस नीली चिड़िया को इजरायल में ब्लू स्पैरो कहा जाता है और ये लड़ाकू विमान से दागी जाने वाली एक मिसाइल है. 

ईरान में कई ठिकानों को निशाना बनाने में इजरायल की ब्लू स्पैरो मिसाइल ने अहम भूमिका निभाई है. इसी मिसाइल से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या हुई थी. बताया जाता है कि लगभग 1,240 मील की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल अपने टारगेट को हिट करने से पहले पृथ्वी के वायुमंडल को पार कर जाती है और फिर पलटकर टारगेट को तबाह कर देती है.

कई रिपोर्टों के अनुसार, ये शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल अंतरिक्ष की सीमा तक यात्रा करने के बाद पृथ्वी पर वापस आ गिरी और शनिवार, 28 फरवरी को उस स्थान पर जा गिरी, जहां खामेनेई और कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी मौजूद थे.

स्पैरो मिसाइलों के परिवार में सिर्फ ब्लू ही नहीं है, बल्कि ब्लैक और सिल्वर स्पैरो मिसाइलें भी शामिल हैं. 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान इराक ने इजरायल पर जो मिसाइलें दागी थीं, उन्हीं को ध्यान में रखकर इन मिसाइलों को विकसित किया गया था. 

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ब्लू स्पैरो

ब्लू स्पैरो, राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स द्वारा विकसित एयर लॉन्च्ड बैलिस्टिक टारगेट मिसाइलों के परिवार का हिस्सा है. इसे इजरायल के एरो मिसाइल-रक्षा कार्यक्रम के लिए विभिन्न प्रकार के बैलिस्टिक खतरों का सामना करने के लिए बनाया गया है.  ब्लू स्पैरो लगभग 6.5 मीटर लंबी है और लॉन्च से पहले इसका वजन लगभग 1,900 किलोग्राम है. यह सिंगल स्टेज ठोस-ईंधन बूस्टर द्वारा संचालित होती है.

ब्लू स्पैरो को आमतौर पर लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जाता है, जिसके बाद इसके बूस्टर रॉकेट इसे उच्च ऊंचाई वाले बैलिस्टिक पथ पर भेजते हैं, और फिर पेलोड अपने लक्षित टारगेट की ओर नीचे उतरता है.

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ब्लैक स्पैरो

ब्लैक स्पैरो मिसाइल को कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खतरों, विशेष रूप से सोवियत संघ द्वारा निर्मित स्कड-बी जैसे सिस्टम को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था. यह इजरायल की स्पैरो परिवार की एयर लॉन्च टारगेट मिसाइलों का हिस्सा है, जिनका उपयोग देश की मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स के टेस्ट करने के लिए किया जाता है.

कम दूरी की एकल-श्रेणी की ब्लैक स्पैरो डिफेंस सिस्टम्स को वास्तविक परिस्थितियों में लक्ष्यों को ट्रैक करने और रोकने में सक्षम बनाती है. इस मिसाइल का कई फ्लाइट और इंटरसेप्शन टेस्ट में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है.

सिल्वर स्पैरो

सिल्वर स्पैरो मिसाइल परिवार की सबसे उन्नत और सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है. इसे ईरान की शाहेब-3 जैसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का जवाब देने के लिए विकसित किया गया था. यह मिसाइल ब्लू और ब्लैक स्पैरो वेरिएंट से बड़ी है. सिल्वर स्पैरो का पहला परीक्षण सितंबर 2013 में किया गया था, जब इसे इजरायल और अमेरिका के संयुक्त मिसाइल डिफेंस टेस्ट के हिस्से के रूप में भूमध्य सागर के ऊपर लॉन्च किया गया था.

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