World News: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक अच्छी नींद किसी लग्जरी से कम नहीं है. लेकिन अगर बात जापान की करें, तो वहां के लोग दुनिया भर के प्रमुख देशों के मुकाबले सबसे कम सोते हैं. ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) के आंकड़े बताते हैं कि जापानी लोग अमेरिकियों की तुलना में औसतन डेढ़ घंटा कम सोते हैं. इसके पीछे लॉन्ग ट्रेवल, काम के लंबे घंटे और एक ऐसा कल्चर जिम्मेदार है जो नींद को ज्यादा अहमियत नहीं देता. नतीजा यह है कि नींद की कमी से जूझ रहे इस देश में 'चैन की नींद' अब 8300 करोड़ रुपये की इंडस्ट्री बन चुकी है.
वाशिंगटन पोस्ट ने जापान के इस नए स्लीप टेक मार्केट (Sleep Tech Market) का जायजा लिया. आंखों पर पट्टी बांधने वाले स्लीप मास्क या आरामदायक तकियों का जमाना अब पुराना हो गया है. अब बाजार में ऐसे स्मार्ट बेड्स और गैजेट्स आ गए हैं जो 'पावर नैप' के लिए एकदम परफेक्ट माहौल बनाते हैं. आइए, समझते हैं कि जापान में अच्छी नींद पाने के लिए क्या-क्या नए प्रयोग हो रहे हैं.
20 मिनट की झपकी के लिए खास कपड़े
जापान में ऐसे कई ब्रांड्स हैं जो खास फाइबर से बने पजामे बेच रहे हैं. इनका दावा है कि ये पजामे मांसपेशियों की रिकवरी और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं. इसके अलावा, बाजार में ऐसे स्मार्ट वियरेबल्स मौजूद हैं जो आपको सिर्फ 20 मिनट की पावर 'नैप लेने' में मदद करते हैं. इन गैजेट्स का टारगेट आपको 'नॉन-REM स्टेज 2' स्लीप तक पहुंचाना होता है, ताकि आप गहरी नींद में जाने से बच सकें. अगर आप गहरी नींद में चले जाते हैं, तो उठने के बाद आपको भारीपन और सुस्ती (Sleep Inertia) महसूस होती है.
टोक्यो की एक कंसल्टिंग फर्म में काम करने वाले 52 साल के मासायोशी मसुयामा कहते हैं, 'मेरे लिए वर्किंग डेज में 8 घंटे की नींद लेना बिल्कुल नामुमकिन है. इसलिए मैं पावर नैप लेने के तरीके को बेहतर बनाना चाहता हूं ताकि यह मेरे लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो.'
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ऑफिस में 'खड़े होकर सोने' वाले बॉक्स
जो लोग ऑफिस में नींद से बेहाल रहते हैं, उनके लिए जापान ने एक अनोखा सॉल्यूशन निकाला है, वो है 'स्टैंडिंग नैप बॉक्स'. टोक्यो के त्सुताया इलेक्ट्रिकल्स में डिस्प्ले के लिए रखा गया ऐसा ही एक स्लीप बॉक्स आज टोक्यो मेट्रोपॉलिटन इलाके के कई दफ्तरों में इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्या सच में खड़े-खड़े 'नॉन-REM स्टेज 2' वाली नींद ली जा सकती है? इसके जवाब में टोक्यो के उत्तर में स्थित त्सुकुबा यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटीग्रेटिव स्लीप मेडिसिन के प्रमुख मासाशी यानागिसावा कहते हैं कि हां, यह मुमकिन है. उनका कहना है कि पावर नैप के लिए सबसे सही पॉजिशन क्या है, इस पर ज्यादा रिसर्च नहीं हुई है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि आप 20 मिनट बाद उठ जाएं.
यानागिसावा ने चेतावनी देते हुए कहा कि ये शॉर्ट नैप्स नींद की कमी का पक्का इलाज नहीं हैं. वे कहते हैं, 'अगर आपको तुरंत पावर नैप आ जाती है, तो इसका मतलब ही यही है कि आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है. पावर नैप सिर्फ एक इमरजेंसी उपाय है.'
स्लीप लैब में बदलते 'कैप्सूल होटल'
जापान के सस्ते कैप्सूल होटल डॉरमेट्री की तरह होते हैं जहां लोग छोटे-छोटे पॉड्स में सोते हैं. अब ये पॉड्स नींद पर रिसर्च करने के लिए बेहतरीन जगह बन गए हैं क्योंकि हर पॉड का माहौल एक जैसा और कंट्रोल में होता है. नाइन आवर्स आकासाका नाम के ऐसे ही एक होटल ने अपने पॉड्स में ढेरों सेंसर्स लगाए हैं. आपको शरीर पर कोई गैजेट पहनने की जरूरत नहीं है, ये सेंसर्स खुद आपकी नींद को मॉनिटर करते हैं. यह होटल ग्राहकों का डेटा (पहचान छिपाकर) मेडिकल और रिसर्च संस्थानों के साथ शेयर करता है. अगर किसी मेहमान की नींद की रिपोर्ट खराब आती है, तो होटल उन्हें क्लीनिक जाने की सलाह भी देता है. रिपोर्ट मांगने वाले ग्राहकों को उनके स्लीप पैटर्न और 'स्लीप एप्निया' जैसी बीमारियों के रिस्क फैक्टर की पूरी जानकारी दी जाती है.
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2.36 लाख के स्मार्ट बेड्स, स्लीप फ्रेंडली फ्लैट्स
जापानी डेवलपर्स अब आपके बिस्तर को पूरी तरह बदल रहे हैं. बाजार में ऐसे स्मार्ट बेड्स आ गए हैं जिनमें इन-बिल्ट एयरफ्लो सिस्टम है, जो जापान की गर्म और उमस भरी रातों में नमी को कम करके आपको आरामदायक नींद देता है. कुछ बेड्स ऐसे भी हैं जो हल्की-हल्की वाइब्रेशन पैदा करते हैं ताकि आप रिलैक्स होकर सो सकें.
जापान की जानी-मानी फर्नीचर कंपनी निटोरी (Nitori) ने इस साल एक ऐसा स्मार्ट बेड लॉन्च किया है जो सेंसर्स की मदद से सोने वाले की स्थिति को समझता है और पूरी रात अपने एंगल को खुद-ब-खुद एडजस्ट करता रहता है. हालांकि, इसकी कीमत 2,36,974 रुपये है. यही नहीं, जापान में अब ऐसे नए फ्लैट्स बन रहे हैं, जिनकी लाइटिंग, तापमान और नमी को इस तरह कंट्रोल किया जाता है कि निवासियों को बेहतर नींद आ सके.
जापान क्यों नहीं सो पा रहा?
जापान के ज्यादातर घरों के हर कमरे में छत पर तेज रोशनी वाले बल्ब लगे होते हैं. स्लीप एक्सपर्ट यानागिसावा बताते हैं कि अच्छी नींद के लिए रात 8 बजे के बाद घरों में हल्की और धीमी रोशनी होनी चाहिए. वे बताते हैं कि जापानियों का तेज रोशनी से एक सांस्कृतिक लगाव है. वे तेज रोशनी को संपन्नता का प्रतीक मानते हैं. अमेरिका और यूरोप के घरों की तुलना में यानागिसावा इसे एक 'विशुद्ध जापानी समस्या' मानते हैं, जहां रात के वक्त घरों में बहुत ज्यादा रोशनी होती है.
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