Job News: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब तेजी से इंसानों की नौकरी खाने लगा है. इसका सबसे ताजा मामला बड़ी तंबाकू कंपनी ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको (BAT) में देखने को मिला है. कंपनी ने AI का इस्तेमाल बढ़ाते हुए अपने 9000 कर्मचारियों को बाहर करने का ऐलान कर दिया है. इसमें से 5500 लोगों की नौकरी तो इसी साल के अंत तक पूरी तरह खत्म हो जाएगी. वहीं, बचे हुए 3500 रोल्स बाहरी स्ट्रैटेजिक पार्टनर्स को सौंप दिए जाएंगे. इस फैसले से कंपनी को सालाना करोड़ों रुपये की बचत होगी.
'करीब 75 हजार करोड़ बचाने का लक्ष्य'
इसकी वजह है कंपनी का एक नया प्रोग्राम, जिसे 'Fit2Win' का नाम दिया गया है. इसका सीधा सा मकसद कंपनी के काम-काज को आसान बनाना और खर्चों को कम करना है. कंपनी ने साल 2028 के आखिर तक 600 मिलियन पाउंड यानी करीब 74904 करोड़ रुपये बचाने का टारगेट सेट किया है. अपने इसी टारगेट को पूरा करने के लिए BAT ने मशहूर आईटी कंपनी एक्सेंचर (Accenture) के साथ हाथ मिलाया है. इस डील के जरिए एक्सेंचर कंपनी को एडवांस AI सॉल्यूशंस देगी, जो दफ्तरों में इंसानों की जगह ले लेंगे.
हमदर्दी उनके साथ है, मुश्किल वक्त में सपोर्ट करेंगे: CEO
छंटनी का यह दौर ग्लोबल लेवल पर चल रहा है. ब्रिटेन में इस कंपनी के करीब 350 लोग काम करते हैं, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि वहां के कितने कर्मचारियों पर इसका सीधा असर पड़ेगा. इस कंपनी के CEO तादेउ मरोक्को ने द सन को बताया कि वे भविष्य की तैयारी कर रहे हैं. उनका मानना है कि कंपनी को कम खर्च में ज्यादा फुर्ती से काम करने वाली और नई तकनीक से लैस संस्था बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'बाजार बहुत तेजी से बदल रहा है और Fit2Win हमारे लिए बहुत जरूरी है. हम जानते हैं कि इसका असर हमारे कई साथियों पर पड़ेगा, लेकिन हम पूरी हमदर्दी और सम्मान के साथ उन्हें इस मुश्किल वक्त में सपोर्ट कर रहे हैं.'
सरकार की वॉर्निंग- 'टूट जाएगा पूरा सिस्टम'
AI के नाम पर नौकरियों में यह कटौती ऐसे वक्त में हो रही है, जब खुद ब्रिटेन सरकार इस तकनीक के खतरों को लेकर अलर्ट है. इसी महीने प्रधानमंत्री के चीफ सेक्रेटरी डैरेन जोन्स ने कंपनियों से अपील की थी कि वे AI के पीछे भागने के बजाय इंसानों पर पैसा खर्च करें. जोन्स ने बहुत साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर AI की वजह से नौकरियों का यह 'कत्लेआम' ऐसे ही चलता रहा, तो अगले 10 सालों में ब्रिटेन का पूरा वेलफेयर सिस्टम टूटकर बिखर जाएगा.
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एंट्री-लेवल जॉब्स पर सबसे बड़ा खतरा है AI
AI के आने से सबसे ज्यादा डर उन नौकरियों के खत्म होने का है, जो शुरुआत में फ्रेशर्स को मिलती हैं. अगर शुरुआती काम ही AI करने लगेगा, तो कॉलेज से निकलने वाले युवाओं का क्या होगा? ब्रिटेन के लिए यह हालत इसलिए भी डराने वाली है क्योंकि वहां पहले से ही 10 लाख युवा NEETs की कैटेगरी में आते हैं. NEETs का मतलब है वो युवा जो न तो कोई पढ़ाई कर रहे हैं, न उनके पास कोई नौकरी है और न ही वे कोई ट्रेनिंग ले रहे हैं. ऐसे में AI का बढ़ता इस्तेमाल इन युवाओं के भविष्य के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है.
क्या इसका असर इंडिया में भी होगा?
यह कंपनी भारत में अपनी सिगरेट सीधे नहीं बेचती है. इसके बजाय, उसने ITC में लगभग 22.9% की बड़ी हिस्सेदारी ले रखी है. BAT ने हाल ही में बेंगलुरु में एक ग्लोबल डिजिटल और टेक्नोलॉजी हब स्थापित करके भारत में अपने कामकाज का विस्तार किया है.
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