विज्ञापन
This Article is From Sep 12, 2013

परमाणु करार से पूर्व लंबित मुद्दों का निपटारा करने की जरूरत : जापान

नई दिल्ली: जापान ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि भारत के साथ परमाणु असैन्य करार होने से पहले कई ऐसे लंबित मुद्दे हैं जिनका समाधान जरूरी है।

नई दिल्ली में सातवें भारत जापान ऊर्जा वार्ता के बाद जापान की वित्त और उद्योग मंत्री तोशीमित्सु मोतेगी ने कहा, ‘‘कई लंबित मुद्दे हैं जिन पर हमें कार्यकारी समूहों में चर्चा करना है ताकि हम इन प्रयासों को तेज कर सके।’’

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जापान के मंत्री ने हालांकि इन लंबित मुद्दों का ब्यौरा नहीं दिया, बस इतना कहा कि इन पर कार्यकारी समूह में अब भी चर्चा चल रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण मुद्दा है। अब भी कई कठिनाइयां बनी हुई हैं। इस विषय पर अभी भी कार्यकारी समूह के बीच चर्चा चल रही है। इसलिए मैं महसूस करता हूं कि लंबित मुद्दे क्या हैं, इनका जिक्र करना बुद्धिमानी नहीं होगी।’’

जापानी मंत्री ने कहा, ‘‘यह गुमराह करने वाला होगा, इसलिए मैं इसके बारे में विशिष्ट टिप्पणी करने से बचना चाहता हूं।’’

अहलुवालिया ने कहा, ‘यह हमारे सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र है लेकिन हम कोई समयसीमा तय नहीं करने जा रहे हैं। हम आगे बढ़ रहे हैं, देखते हैं कि चीजें किस दिशा में आगे बढ़ती हैं। यह जटिल मुद्दों में शामिल है और इसका हमें निपटारा करना है।’

मोंतेगी ने कहा कि वार्ता जल्द से जल्द पूरा करने के प्रयास किये जा रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कुछ ही दिन पहले दोनों देशों ने तीन वर्ष के अंतराल के बाद तोक्यों में असैन्य परमाणु करार पर बातचीत शुरू की है।

वर्ष 2010 में शुरू परमाणु ऊर्जा वार्ता मार्च 2011 में फुकुशीमा परमाणु दुर्घटना के बाद से थमी हुई है। अंतिम वार्ता नवंबर 2010 में हुई थी।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके जापानी समकक्ष शिंजो अबे ने मई में तोक्यो में अपने अधिकारियों को परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग समझौता जल्द करने के लिए वार्ता में तेजी लाने का निर्देश देने का फैसला किया था।

उसके बाद तोक्यो में संयुक्त कार्यबल की चौथे दौर की बातचीत हुई। भारत परमाणु अप्रसार संधि का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है और यही बात मतभेद के विभिन्न बिंदुओं में एक है। जहां भारत का कहना है कि परमाणु करार के लिए उसका गैर-प्रसार व्यवहार ही उसके बेदाग होने का पर्याप्त प्रमाण है वहीं जापान चाहता है कि भारत ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से मंजूरी मिलने से पहले परमाणु परीक्षण नहीं करने का जो वादा किया था, वह उसका अनुपालन करे।

ऊर्जा की भारी किल्लत से जूझ रहे भारत के लिए भारत-जापान असैन्य परमाणु करार बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि असैन्य परमाणु संयंत्रों के अहम अवयव रियक्टर वेसेल्स की आपूर्ति पर जापानी कंपनियों का एक तरह से एकाधिकार है और इस तरह के करार नहीं होने से ये कंपनियां उन फ्रांसीसी एवं अमेरिकी कंपनियों को इन अवयवों की आपूर्ति नहीं कर पाएंगी जिन्हें भारत में परमाणु संयंत्रों के लिए आर्डर मिला है।

बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने यह दोहराया कि असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग महत्वपूर्ण है और दोनों पक्षों ने इस तथ्य का भी स्वागत किया कि इस माह शुरू में हुई परमाणु ऊर्जा कार्यबल की बैठक हुई। दोनों नेताओं के बीच परमाणु ऊर्जा नीतियों पर भी चर्चा हुई।

दोनों पक्षों ने सालाना भारत जापान ऊर्जा वार्ता आयोजित करने की जरूरत और ऊर्जा सुरक्षा एवं वैश्विक पर्यावरण को अहम चुनौती मानते हुए उन पर लगातार ध्यान देने पर बल दिया।

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
जापान भारत परमाणु करार, भारत जापान संबंध, Japan-India Nuke Deal, India Japal Relations