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दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र चालू होते बज उठी खतरे की घंटी, 15 साल बाद हुआ शुरू लेकिन घंटों भी नहीं चला

काशीवाजाकी-कारीवा संभावित क्षमता के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है. हालांकि सात में से केवल एक रिएक्टर को फिर से शुरू किया गया था.

दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र चालू होते बज उठी खतरे की घंटी, 15 साल बाद हुआ शुरू लेकिन घंटों भी नहीं चला
  • जापान का काशीवाजाकी-कारीवा परमाणु ऊर्जा संयंत्र 2011 के फुकुशिमा हादसे के बाद बंद हुआ था
  • प्लांट के एक रिएक्टर को जापान के परमाणु नियामक की मंजूरी के बाद बुधवार देर रात पुनः शुरू किया गया था
  • रिएक्टर के स्टार्टअप के दौरान अलार्म बजने पर सुरक्षा कारणों से उसे कुछ ही घंटों बाद बंद कर दिया गया
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जापान में दुनिया का सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र (न्यूक्लियर इनर्जी प्लांट) 15 साल बाद फिर से शुरू किया जा रहा था. पूरी दुनिया की नजर काशीवाजाकी-करिवा प्लांट पर थी क्योंकि 2011 के फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना के बाद इसे भी बंद कर दिया गया था. लेकिन इस प्लांट को चालू करने की प्रक्रिया शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद ही गुरुवार, 22 दिसंबर को इसे रोकना पड़ा. न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार प्लांट के ऑपरेटर ने कहा है कि प्लांट का न्यूक्लियर रिएक्टर "स्थिर" है.

2011 फुकुशिमा आपदा के बाद से बंद यह न्यूक्लियर प्लांट जापान के निगाटा प्रांत में है. काशीवाजाकी-कारीवा प्लांट में वैसे कुल 7 रिएक्टर हैं लेकिन इनमें से केवल एक को फिर से शुरू किया गया था. इस रिएक्टर को फिर से चालू करने की प्रक्रिया जापान के परमाणु नियामक से अंतिम हरी झंडी मिलने के बाद बुधवार देर रात शुरू हुई थी. प्लांट के ऑपरेटर टोक्यो इलेक्ट्रिक (TEPCO) के प्रवक्ता ताकाशी कोबायाशी ने बताया कि रिएक्टर स्टार्टअप प्रक्रियाओं के दौरान अलार्म बज उठा, और उसके कारण इसे बंद कर दिया गया है.

अच्छी बात है कि रिएक्टर स्टेबल यानी स्थिर है. प्रवक्ता ने बताया कि रिएक्टर "स्थिर है और बाहर कोई रेडियोएक्टिव प्रभाव नहीं है." अब ऑपरेटर अलार्म क्यों बजा, उसके कारणों की जांच कर रहे हैं. अभी यह नहीं बताया जा सकता है कि संचालन कब फिर से शुरू होगा.

फिर से क्यों शुरू किया जा रहा प्लांट?

काशीवाजाकी-कारीवा संभावित क्षमता के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है. हालांकि सात में से केवल एक रिएक्टर को फिर से शुरू किया गया था. 2011 में जब जापान ने भीषण भूकंप और सुनामी के कारण फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के तीन रिएक्टरों को बंद कर दिया था, तब जापान ने परमाणु ऊर्जा पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद यह प्लांट भी ऑफलाइन हो गई थी.

हालांकि अब जापान जीवाश्म ईंधन (तेल-गैस) पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है. वह 2050 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा को फिर से जिंदा करना चाहता है.

यह भी पढ़ें: फुकुशिमा की दर्दनाक यादों और डर के बीच जापान में फिर शुरू हुआ दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट

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