- मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की अफगान नीति की विफलता पर सवाल उठाते हुए आतंकवाद को गंभीर समस्या बताया
- उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से व्यापार बंद है, लेकिन आतंकवादी आसानी से पाकिस्तान में प्रवेश कर रहे हैं
- रहमान ने पाकिस्तान की विदेश नीति की कड़ी आलोचना करते हुए बताया कि भारत, अफगानिस्तान, ईरान और चीन नाराज हैं
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी सरकार के अफगानिस्तान से निपटने के तरीके की आलोचना की और सवाल उठाया कि उनकी अफगान नीति इतनी बुरी तरह विफल क्यों हुई. रविवार को रावलपिंडी में एक सभा को संबोधित करते हुए रहमान ने उस विरोधाभास को उजागर किया जहां अफगानिस्तान से व्यापार अवरुद्ध है, लेकिन चरमपंथी लगातार सीमा पार कर रहे हैं.
'अनार या खरबूजा'
रहमान ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाल के दशकों में, हमने कभी यह नहीं सोचा कि हमारी अफगान नीति इतनी बुरी तरह विफल क्यों हुई. एक अनार या खरबूजा भी पाकिस्तान में प्रवेश नहीं कर सकता, फिर भी आतंकवादी सीमा पार करते रहते हैं. अधिकारियों का कहना है कि आतंकवादी वहां से आ रहे हैं. अगर वे आ रहे हैं, तो उन्हें रोकें. अगर वे आ रहे हैं, तो उन्हें खत्म कर दें. अफगान सरकार ने कभी भी आपकी कार्रवाई पर आपत्ति नहीं जताई है."
रहमान ने पाकिस्तान की विदेश नीति की कड़ी आलोचना की
Maulana Fazlur Rehman:
— Open Source (@Open_Sourc3w) February 8, 2026
It's unbelievable, not a single pomegranate can cross from Afghanistan into Pakistan, yet terrorists are coming in nonstop?!
Does this sound like reason or logic to anyone? pic.twitter.com/S5x35KB34r
गिनाए दुश्मन
रहमान ने इस्लामाबाद की विदेश और आर्थिक नीतियों की भी आलोचना करते हुए उन्हें "पूरी तरह विफल" बताया. जेयूएफ नेता ने कहा कि ये नीतियां इतनी नाकाम हैं कि "भारत हमारा दुश्मन है, अफगानिस्तान हमारा दुश्मन है, और यहां तक कि ईरान और चीन भी हमसे नाराज हैं." उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जनता जवाब की हकदार है और जोर देकर कहा कि "कोई भी राष्ट्र तब तक जीवित नहीं रह सकता, जब उसकी नीतियां केवल अलगाव, अविश्वास और असुरक्षा पैदा करती हैं."
रहमान ने यह भी तर्क दिया कि देश की विदेश नीति नागरिक सरकार द्वारा नहीं बल्कि सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा निर्धारित की जाती है. उन्होंने कहा, "एक जनरल आता है और कहता है कि हम बातचीत करेंगे; दूसरा आता है और कहता है कि हम युद्ध छेड़ेंगे."
"चीन को अब हम पर भरोसा नहीं रहा"
रहमान ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए गए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के प्रबंधन में सरकार की विफलता की भी आलोचना की. चीन के घटते भरोसे के कारण यह परियोजना ठप पड़ी है. रहमान ने कहा, "इस कार्यकाल में सीपीईसी में कोई खास प्रगति नहीं हुई है क्योंकि चीन को अब हम पर भरोसा नहीं रहा."

उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यकाल में सीपीईसी परियोजना रुक गई थी, तब चीन और इस्लामाबाद दोनों ने शिकायतें की थीं; हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा सरकार का रवैया इससे अलग है? उन्होंने कहा, "आज मैं पूछता हूं, क्या इस सरकार के तहत एक भी ईंट आगे बढ़ी है?"
रहमान के अनुसार, चीन को पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार से द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने और परियोजना के क्रियान्वयन में सुधार की उम्मीद थी. उन्होंने दावा किया, "इसके बजाय, आज चीन पाकिस्तान से नाराज है."
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