- संसद के बजट सत्र में विपक्ष और सरकार के बीच चार मुख्य मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है.
- विपक्षी नेताओं ने महिला सांसदों पर आरोप, आठ सांसदों के निलंबन, और बोलने के अधिकार पर सवाल उठाए हैं.
- सरकार का कहना है कि महिला सांसदों का व्यवहार वीडियो फुटेज में स्पष्ट है और निलंबन वापसी पर चर्चा बाद में होगी.
संसद के बजट सत्र में चल रहे गतिरोध को सुलझाने की कोशिश तेज हो गई है. सोमवार को विपक्षी नेताओं की स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी अध्यक्ष से मुलाकात की. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्पीकर से संसद भवन में मुलाकात हुई. इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा नेता अखिलेश यादव, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी और DMK सांसद टी आर बालू भी स्पीकर से मिले थे. विपक्षी सांसदों की स्पीकर से हुई मुलाकात के दौरान 4 मुद्दों पर बने गतिरोध के बारे में बात हुई. लेकिन सरकार के सूत्रों के अनुसार बातचीत के बाद भी गतिरोध बना हुआ है.
राहुल गांधी के 4 मुद्दों को लेकर सहमति नहीं बन सकी है.
- पहला मुद्दा विपक्ष की महिला सांसदों पर लगाए गए आरोप.
- दूसरा मुद्दा है विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन.
- तीसरा मुद्दा बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को लोक सभा में बोलने देना.
- चौथा मुद्दा राहुल गांधी को बोलने का मौक़ा नहीं देना.
इन चारों मुद्दों पर सरकार का क्या है कहना
- सरकार का कहना है कि जहां तक पहले मुद्दे का सवाल है यह तो वीडियो फुटेज में भी दिख रहा है कि महिला सांसद पीएम के आसन की ओर बढ़ रही हैं.
- दूसरे मुद्दे के बारे में सरकारी सूत्रों के अनुसार निलंबन वापसी पर चर्चा तभी हो सकती है जब गतिरोध सुलझे.
- निशिकांत दुबे के मुद्दे पर सरकार का कहना है कि उन्होंने मुद्दा उठाने की कोशिश की थी लेकिन चेयर की ओर से अनुमति नहीं दी गई थी, बाद में उनके भाषण से कई हिस्से हटा दिए गए थे.
- जहां तक राहुल गांधी के बोलने का सवाल है, चेयर की अनुमति से वे बोल सकते हैं लेकिन वे फिर से वही मुद्दा उठाएँगे तो क्या होगा?
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष एक राय नहीं
दूसरी तरह कांग्रेस खेमे की ओर से स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा जोर-शोर से चल रही है. लेकिन स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बारे में सरकारी सूत्रों का कहना है कि इसे लेकर विपक्ष में ही एक राय नहीं है. टीएमसी और एनसीपी इसके पक्ष में नहीं हैं. बल्कि अधिकांश विपक्षी पार्टियां चाहती हैं कि सदन में काम हो ताकि वे जनता से जुड़े मुद्दों को उठा सकें.
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