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This Article is From Feb 05, 2013

1971 में मानवता के खिलाफ अपराध के लिए जमात नेता को उम्रकैद

कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के एक शीर्ष नेता को 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ आजादी के संषर्घ के दौरान ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के लिए विशेष बांग्लादेशी ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
ढाका: कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के एक शीर्ष नेता को 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ आजादी के संषर्घ के दौरान ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के लिए विशेष बांग्लादेशी ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश अब्दुल हसन ने बताया कि जमात नेता अब्दुल कादिर मुल्ला अब आजीवन कारावास की सजा काटेंगे।

उनके खिलाफ सुनाये गये फैसले के अनुसार सुनवाई में उन पर लगे छह में से पांच आरोप सिद्ध हो चुके हैं।

उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में लाया गया। फैसले के ठीक बाद जमात कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुयी भिड़ंत में कई लोग घायल हो गए।

ट्रिब्यूनल ने तीन सप्ताह पहले ही अबुल कलाम आजाद को मौत की सजा सुनाई थी जो एक निजी चैनल पर इस्लाम कार्यक्रमों को बढ़ाव दे रहा था। उसे जमात-ए-इस्लामी से निष्कासित किया गया था।

मुल्ला को 13 जुलाई 2010 को उनकी पार्टी के अन्य नेता मोहम्मद कमरुज्जमान के साथ 1971 में मानवता के खिलाफ अंजाम देने के लिए सुप्रीम कोर्ट परिसर के सामने से गिरफ्तार किया गया था।

ट्रिब्यूनल ने 28 मई 2012 को उन्हें अभ्यारोपित किया था जिनमें निहत्थें नागरिकों पर हमला करवाने में भूमिका का अपराध शामिल था। अटॉर्नी जनरल महबूबे आलम ने फैसले के बाद मीडिया से कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस मामले में मुल्ला को फांसी की सजा होगी।
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Bhasha
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