यरुशलम के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर गुरुवार, 23 जुलाई को बड़ा हंगामा देखने को मिला. इजरायल के हजारों यहूदी कट्टरपंथी वहां पहुंच गए. उनके साथ इजरायल के बेहद दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर भी मौजूद थे. इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव और बढ़ा दिया. हथियारबंद इजरायली पुलिस की सुरक्षा में ये लोग धार्मिक स्थल के अंदर गए. वहां उन्होंने प्रार्थना की, इजरायल का झंडा लहराया और राष्ट्रगान गाया. इसे राजनीतिक ताकत दिखाने वाली उकसाने वाली कार्रवाई माना जा रहा है.
दरअसल कई दशक पुराना एक नाजुक समझौता है, जिसे 'स्टेटस क्वो' कहा जाता है. इसके तहत इस जगह पर गैर-मुसलमानों को प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है. जहां मुसलमान इस जगह को अल-हरम अल-शरीफ कहते हैं, जबकि यहूदी इसे टेम्पल माउंट कहते हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इतामार बेन-गवीर ने कई विवादित दौरों और यहूदी श्रद्धालुओं के लिए नियमों में एकतरफा बदलाव करके इस समझौते को कमजोर किया है. उन्होंने यहूदियों को वहां प्रार्थना की किताबें और छपी हुई धार्मिक सामग्री ले जाने की भी अनुमति दिलाई. इतना ही नहीं जनवरी में उन्होंने अपने एक करीबी वैचारिक सहयोगी को यरुशलम पुलिस का प्रमुख बनवाया. इससे इस धार्मिक स्थल से जुड़े और बड़े बदलावों का रास्ता आसान हो गया.
Hard-right Israeli Minister of National Security Itamar Ben-Gvir performs rituals during an ongoing large-scale incursion into Al-Aqsa Mosque compound in occupied Jerusalem marking the so-called anniversary of the "destruction of the Temple." pic.twitter.com/TaGIjNbPZp
— Quds News Network (@QudsNen) July 23, 2026
गुरुवार को क्या हुआ?
गुरुवार को इजरायली लोगों ने परिसर के उन हिस्सों में भी प्रार्थना की, जो अल-अक्सा मस्जिद और सातवीं सदी में बने डोम ऑफ द रॉक के पास हैं. इजरायली अखबार हारेत्ज की रिपोर्ट के मुताबिक, लिकुड पार्टी के सांसद अमित हलेवी भी उस समूह में शामिल थे जिसने इजरायल का झंडा लहराया और राष्ट्रगान गाया. रिपोर्ट में उन इजरायली 'टेम्पल माउंट' कार्यकर्ताओं का हवाला दिया गया है, जो इस जगह पर यहूदियों को पूजा करने का अधिकार दिलाने की मांग कर रहे हैं.
इस हंगामें भी कवायद के बाद इतामार बेन-गवीर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम यहां बहुत बड़ी प्रगति देख रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वहां प्रार्थना करने वाले यहूदियों को ऐसा महसूस होता है जैसे वे इस जगह के मालिक हों. वह पहले भी कह चुके हैं कि वह अल अक्सा मस्जिद के परिसर में इजरायल का झंडा फहराना चाहते हैं और वहां एक यहूदी उपासना स्थल (सिनेगॉग) बनाना चाहते हैं.
बता दें कि गुरुवार को यहूदियों का पवित्र दिन तिशा ब'आव भी था. इस दिन उसी जगह पर बने पहले मंदिर, जिसे ईसा पूर्व 10वीं सदी में नष्ट कर दिया गया था, और दूसरे मंदिर, जिसे ईस्वी सन 70 में रोमन साम्राज्य ने ध्वस्त कर दिया था, को याद किया जाता है.
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