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क्या अमेरिका में युद्धबंदी हैं वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, क्या दुविधा बढ़ा रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी अदालत में पेशी के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने खुद को युद्ध बंदी बताया था. इस पर अब बहस हो रही है. आइए जानते हैं कि युद्धबंदी होने पर उनके साथ क्या कर सकता है अमेरिका.

क्या अमेरिका में युद्धबंदी हैं वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, क्या दुविधा बढ़ा रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप
नई दिल्ली:

अमेरिका ने एक सैन्य अभियान चलाकर तीन जनवरी को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया था. मादुरो पर अमेरिका ने ड्रग्स की तस्करी से संबंधित आतंकवाद के आरोप लगाए हैं.अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें सोमवार को न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया.वहां उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए जज से कहा,''मैं एक सभ्य व्यक्ति हूं, अपने देश का राष्ट्रपति हूं.'' इस दौरान मादुरो ने खुद को युद्धबंदी भी बताया. यानी ऐसा व्यक्ति जिसे युद्ध के दौरान दुश्मन देश ने पकड़ा हो. इसके बाद से ही इस बात पर बहस हो रही है कि क्या अमेरिका मादुरो के साथ युद्धबंदी जैसा व्यवहार करेगा और क्या उन पर जिनेवा समझौता लागू होगा. 

अमेरिकी अदालत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने क्या कहा

मैनहट्टन की अदालत में जेल की नीली-नारंगी रंग की वर्दी में आए मादुरो ने अभियोजकों द्वारा लगाए गए आरोप सुने. इस मामले में उनकी पत्नी और बेटे को भी सह-आरोपी बनाया गया है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मादुरो को पकड़ना कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक अभियान था. इसलिए इसके लिए संसद की अनुमति की इजाजत की जरूरत नहीं थी. अदालत में मादुरो ने एक दुभाषिए के जरिए अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा,''मैं निर्दोष हूं. मैंने कोई अपराध नहीं किया है. मैं एक सम्मानित व्यक्ति हूं और अब भी अपने देश का राष्ट्रपति हूं.'' उन्होंने खुद को युद्धबंदी (POW: Prisoner of War) बताया. इसके बाद जज ने उन्हें आगे बोलने से रोक दिया. उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस ने भी इस दौरान खुद को निर्दोष बताया.

क्या निकोलस मादुरो अमेरिका में युद्धबंदी हैं?

दरअसल अमेरिका ने 2015 में वेनेजुएला को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था. उसके बाद से ही अमेरिका वहां अघोषित युद्ध छेड़े हुए है.ऐसे में जब युद्ध जैसे हालात हों और राष्ट्रपति को पकड़ा जाए, तो उसे युद्धबंदी माना जा सकता है.
लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइकल वाल्टज् का कहना है कि यह कार्रवाई कानून लागू करने की कार्रवाई थी,न की युद्ध. वाल्टज् ने कहा कि यह वेनेजुएला या उसके लोगों के खिलाफ युद्ध नहीं है. हम वेनेजुएला पर कब्जा नहीं कर रहे हैं. 

लेकिन रूबियो और वाल्टज् के बयान राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों से जुदा थे. शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा था, ''जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण नहीं हो जाता, तब तक अमेरिका वेनेजुएला का शासन संभालेगा.'' उन्होंने रविवार को पत्रकारों से कहा कि अगर वेनेजुएला सरकार वहां के हालात को संभालने की उनकी योजना में सहयोग करने से इनकार करती है, तो अमेरिका वेनेजुएला पर दूसरा सैन्य हमला करने के लिए तैयार है.

कानून के जानकारों के मुताबिक ट्रंप ने एक तरह से यह स्वीकार किया है कि अमेरिका वेनेजुएला के साथ सशस्त्र संघर्ष में शामिल है.वह कैरिबियन और पूर्वी प्रशांत इलाके में ड्रग्स तस्करों की 100 से अधिक हत्याओं को उचित ठहराना चाहते हैं. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ने के लिए न तो इंटरपोल की मदद ली गई और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया को अपनाया गया. ऐसे में बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए किसी देश के राष्ट्रपति को पकड़ना अवैध है.

क्या मादुरो पर लागू होंगे जिनेवा कन्वेंशन के प्रावधान

ऐसे में अगर मादुरो युद्धबंदी हैं, तो उन पर 1949 के तीसरे जिनेवा समझौते के प्रावधान लागू होते हैं. इसमें युद्धबंदियों के साथ मानवीय व्यवहार करने और युद्ध खत्म होने पर उन्हें उनके देश वापस भेजने का प्रावधान है. इस समझौते के मुताबिक किसी युद्धबंदी पर किसी दूसरे देश में, खासकर बंदी बनाने वाले देश में मुकदमा चलाया जा सकता है. उसे सजा भी सुनाई जा सकती है, लेकिन केवल युद्ध अपराध जैसे कुछ खास मामलों में ही. इन अपराधों को युद्ध अपराध (मानवता के विरुद्ध अपराध) की श्रेणी में रखा जाना चाहिए, न कि केवल युद्ध में प्रतिरोध के रूप में. मादुरो पर मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों का आरोप लगाया गया है न कि युद्ध अपराधों का.

ट्रंप के अनुसार भी मादुरो युद्धबंदी हैं क्योंकि उन्होंने घोषणा की थी कि मादुरो ने मादक पदार्थों की तस्करी के जरिए अमेरिका के खिलाफ युद्ध शुरू किया था. उनका कहना है कि ड्रग्स की ओवरडोज की वजह से अमेरिका में मौतें हुई हैं. इसका मतलब यह है कि मादुरो के मामले में जिनेवा समझौते लागू होंगे. लेकिन क्या डोनाल्ड ट्रंप इसे स्वीकार करेंगे, इसके लिए हमें कुछ दिन और इंतजार करना होगा. 

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