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अमेरिका को भारी पड़ रहा ईरान युद्ध! पहले 48 घंटे में ही दागे 51 हजार करोड़ के हथियार, सांसदों में चिंता

अमेरिकी संसद में पेश पेंटागन के अनुमान के मुताबिक, ईरान पर शुरुआती दो दिन के हमले में ही अमेरिकी सेना ने लगभग 5.6 अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद खर्च कर दिए थे. इसमें अन्य खर्च शामिल नहीं है.

अमेरिका को भारी पड़ रहा ईरान युद्ध! पहले 48 घंटे में ही दागे 51 हजार करोड़ के हथियार, सांसदों में चिंता
  • अमेरिकी सेना ने ईरान युद्ध के पहले दो दिन में ही हथियार-गोला बारूद पर लगभग 5.6 अरब डॉलर खर्च कर दिए
  • इसमें सैनिकों की तैनाती, विमान और नौसैनिक बेड़े के रखरखाव जैसे संचालन के बड़े खर्च शामिल नहीं हैं
  • अमेरिका में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि इतने महंगा सैन्य अभियान आखिर कितने दिन तक चल पाएगा

ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका किस कदर हथियार और संसाधन झोंक रहा है, इसकी झलक एक नई रिपोर्ट से मिलती है. इसमें बताया गया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के शुरुआती दो दिनों में ही डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने करीब 5.6 अरब डॉलर (लगभग 51,400 करोड़ रुपये) की रकम तो सिर्फ हथियार और गोला-बारूद पर ही फूंक दी थी. बाकी खर्च अलग हैं. 

सांसदों को चिंता, तेजी से खत्म हो रहा सैन्य भंडार

वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया है कि रकम का यह अनुमान अमेरिकी संसद कांग्रेस के साथ साझा की गई जानकारी पर आधारित है. इसके बाद अमेरिका में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि अमेरिका इतने महंगे सैन्य अभियान को आखिर कितने दिन तक जारी रख पाएगा. कई सांसदों को चिंता है कि अमेरिकी सेना तेजी से अपने अत्याधुनिक हथियारों के सीमित भंडार को खत्म कर रही है.

देखें- अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध, लेकिन जीत रहा रूस?

शुरुआती हमले में ही फूंक दिए 5.6 अरब डॉलर

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान पर शुरुआती हमले में ही पेंटागन ने लगभग 5.6 अरब डॉलर केवल हथियारों पर खर्च कर दिए थे. यह आंकड़ा केवल युद्ध के पहले दो दिनों का है. इसमें सैनिकों की तैनाती, विमान और नौसैनिक संसाधनों के रखरखाव या क्षेत्र में सैनिकों को बनाए रखने जैसे व्यापक संचालन खर्च शामिल नहीं हैं.

मिशन ईरान के लिए ट्रंप मांग रहे एक्स्ट्रा फंड

ईरान युद्ध पर सैन्य खर्च का यह अनुमान कांग्रेस के साथ ऐसे समय साझा किया गया है, जब ट्रंप प्रशासन मिशन जारी रखने के लिए अतिरिक्त फंड मांगने की तैयारी कर रहा है. जंग शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ईरान के ऊपर हजारों हमले कर चुकी है. हमलों की भीषणता को देखते हुए कैपिटल हिल में अमेरिकी सेना के उच्चस्तरीय हथियार भंडार के तेजी से खत्म होने की आशंका गहराने लगी है.

दूसरे इलाकों से सैन्य उपकरण भेजे जा रहे

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर संघर्ष लंबा चलता है तो हथियारों का भंडार और दबाव में आ सकता है क्योंकि अमेरिका पहले से ही यूक्रेन को हथियार देने और एशिया में सैन्य प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने के कारण अपने संसाधनों का उपयोग कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जंग जारी रखने के लिए अन्य इलाकों से अमेरिकी संसाधन को ट्रांसफर करना शुरू कर दिया गया है. थाड मिसाइल रक्षा प्रणाली के कुछ हिस्सों को दक्षिण कोरिया से यहां भेजा गया है.

रणनीतिक जोखिम... विशेषज्ञों ने किया आगाह

पेंटागन ने ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाव के लिए एडवांस पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की भी इस्तेमाल किया है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदम रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकते हैं. अमेरिकी हथियार भंडार पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट मार्क कैनसियन ने चेतावनी दी कि एयर डिफेंस सिस्टम को दूसरी जगह भेजने से अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी तैयारी कमजोर हो सकती है. उन्होंने कहा कि आप जितने ज्यादा थाड और पैट्रियट दागते हैं, उतना ही इंडो-पैसिफिक और यूक्रेन में जोखिम बढ़ता है.

देखें- ईरान युद्ध पर कन्फ्यूज है अमेरिका? जंग जल्दी खत्म होने के ट्रंप के बयान पर ईरान ने दिखाया आईना

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मनोज शर्मा
मनोज शर्मा
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