- ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में तनाव बढ़ने के बाद कतर की राजधानी दोहा में फिर से बातचीत होने जा रही है
- बातचीत का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद का समाधान निकालना बताया गया है
- ईरान के राष्ट्रपति ने कतर में फ्रीज की गई संपत्ति में से कुछ राशि जारी करने और प्रतिबंध हटाने की बात कही
पिछले एक सप्ताह में ईरान और अमेरिका के बीच जो हुआ उससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई. दोनों ने एक-दूसरे के ठिकानों पर फिर से हमले शुरू कर दिया. इससे लगने लगा कि इन दोनों के बीच किसी समझौते पर पहुंचना बहुत मुश्किल है. शायद सीजफायर भी अब नहीं टिकेगा. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान की मांग पर कल दोहा में अमेरिका उसके साथ मीटिंग करेगा,
ईरान ने नहीं किया है इन्कार
इस मीटिंग का मकसद होर्मुज को लेकर ईरान की दावेदारी और अमेरिका की शर्तों में एक बीच रास्ता निकालना बताया जा रहा है. बातचीत की जानकारी रखने वाले सूत्र ने कहा कि मध्यस्थों ने किसी भी घटना के दौरान तनाव कम करने के लिए इस बातचीत के लिए रास्ता बनाया है. दोनों देश तनाव और सीजफायर टूटने के बावजूद टेक्निकल बातचीत जारी रखने पर सहमत हैं. यह टेक्निकल बातचीत पहले स्विट्जरलैंड में होने वाली थी, मगर तनाव को देखते हुए इसे दोहा करने का फैसला हुआ. हालांकि, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि टेक्निकल मीटिंग्स की पुष्टि नहीं हुई है.
ईरान के राष्ट्रपति ने दिए संकेत
ईरान के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोमवार को कहा कि समझौते के बाद कतर में फ्रीज की गई 12 अरब डॉलर की संपत्ति में से 6 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे और ईरान को लौटा दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि हालिया समझौते से ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए हैं और इसे ईरानी लोगों के लिए एक बड़ी जीत बताया. कुल-मिलाकर समझिए तो ईरान के राष्ट्रपति ने अपनी जनता को ये समझाने की कोशिश की है कि इस समझौते से ईरान का ही फायदा है.
दोनों देशों में विश्वास की कमी
अमेरिका और ईरान ने 17 जून को चार महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के मकसद से 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत दोनों पक्ष लड़ाई रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर सहमत हुए थे. इस रास्ते से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का व्यापार होता है. यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुश्किल मुद्दों पर 60 दिनों तक और गहरी बातचीत का रास्ता बनाता है, हालांकि दोनों पक्षों ने इस बात पर अलग-अलग बातें कही हैं कि किस बात पर सहमति बनी थी. यही कारण है कि होर्मुज से लेकर खाड़ी में फिर से बमबारी हो गई.
यह भी पढ़ें-
श्रीलंका में भारत-पाकिस्तान डेलिगेशन के बीच हुई वार्ता? जानें- केंद्र सरकार ने क्या दिया जवाब
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं