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अमेरिका-इजरायल से हार नहीं मान रहा ईरान, क्या इसके पीछे है अयातुल्लाह की अंगूठी?

Iran Vs Israel-America युद्ध में मारे गए ईरान के नेताओं के हाथ में क्यों रहती है अंगूठी, शहादत से क्या रिश्ता?

खामेनेई की अंगूठी की कहानी
  • ईरान के अयातुल्लाह अंगूठी पहनते हैं जो उनकी पहचान और नेतृत्व का प्रतीक मानी जाती है
  • पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी की अंगूठी को राष्ट्रीय विरासत घोषित किया गया था और उनकी पहचान इसी अंगूठी से हुई थी
  • अयातुल्लाह खामेनेई की अंगूठी चांदी की होती है जिसमें विभिन्न रंग के पत्थर लगे होते हैं
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ईरान के अयातुल्लाह एक अंगूठी पहनते हैं. ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी भी ऐसी ही अंगूठी पहनते थे. जब अमेरिका ने उन पर मिसाइल से हमला किया तो उनकी पहचान अंगूठी से ही हुई थी. ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी जब हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए तो उनकी पहचान भी एक अंगूठी से हुई थी. अयातुल्लाह जिन मजलिसों में शामिल होते हैं. वहां एक अजीब संयोग होता है. जो लोग शहीदों या धर्मगुरूओं की तस्वीरें हाथ में लेकर आते हैं उनकी उंगलियों में अंगूठियां जरूर होती हैं. अयातुल्लाह किसी को कोई गिफ्ट दें तो उसमें सबसे खास है अंगूठी. ऐसा कहा जा रहा है कि खामेनेई की अंगूठी,शहादत के बाद नए अयातुल्लाह को दी गई है. आखिर ईरान के अयातुल्लाह क्यों पहनते हैं अंगूठी? ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की अंगूठी राष्ट्रीय विरासत क्यों घोषित की गयी? ईरान युद्ध में अयातुल्लाह की अंगूठी क्या इस्लाम का झंडा है? आइए समझते हैं कि इस अंगूठी की इतनी अहमियत क्यों है?

नेता मरते गए, अंगूठी बनी रही

28 फरवरी 2026 को तेहरान पर अमेरिका और इजरायल ने हमला किया. पहले ही अटैक में अयातुल्लाह खामेनेई और उनकी परिवार को मिटा देने का दावा किया. युद्ध शुरू हो गया. अमेरिका और इजरायल ने सोचा कि नेता के बिना ईरान लुढ़क जाएगा. युद्ध के फैसले कौन लेगा? युद्ध शुरू होने के साथ ही खत्म हो गया. दावे भी वैसे किए जाने लगे. तीन दिन के भीतर भीतर अमेरिका के ट्रंप ने कहा दिया कि वो जीत चुके हैं. युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा. लेकिन ईरान के प्लान कुछ और ही थे उसने दावा कर दिया कि युद्ध तो अभी शुरू हुआ है. खत्म तो ईरान करेगा. पूरी दुनिया हैरान हो गयी. ये हो क्या रहा है? अमेरिका और इजरायल ने ताबड़ तोड़ हमले किए और दावा किया कि उसने ईरान में सत्ता संभालने वाले अधिकारियों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी को भी खत्म कर दिया है.

अब ईरान ने एक छोटी फिल्म जारी की. जिसे आर्टीफिशिएल इंटलेजेंस की मदद से बनाया गया था. इस फिल्म ने ऐलान किया कि ईरान नेतृत्व विहीन नहीं है उसके पास उसका नेता है. जिसका नाम मुजतबा खामेनेई है. फिल्म को नाम दिया गया अयातुल्लाह इज बैक....

इस पूरे संदेश में अंगूठी पर बहुत जोर दिया गया. अयातुल्लाह खामेनेई की वापसी का ऐलान करने के लिए अंगूठी का इस्तेमाल किया गया है. ऐसा करके ईरान ने दुनिया को बताने की कोशिश की कि अयातुल्लाह की अंगूठी में ईरान की पहचान और संप्रभुता छिपी हुई है. खामेनेई और अयातुल्लाह ही ईरान के प्रतिरोध का चेहरा है. अयातुल्लाह ने जो धर्म आधारित सिस्टम बनाया है वही इजरायल और अमेरिका के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है. जिसका प्रतीक है अयातुल्लाह की अंगूठी.

khamenei Ring

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अयातुल्लाह खामेनेई के हाथ में अंगूठी चांदी की होती है. लेकिन इसमें लगे पत्थर का रंग बदलता रहता है. कोई एक पत्थर ऐसा नहीं है जो रंग बदलता रहता है. बल्कि अंगूठियां अलग अलग रंग के पत्थरों वाली होती है. अयातुल्लाह की अंगूठियों में जो रंग बदलते पत्थर दिखते हैं. उन्हें अकीक यानी एगेट, फिरोजा यानी टरक्यॉज, श्ब यानी कार्नेलियन कहते हैं.

अयातुल्लाह रूहेल्ला खुमैनी और उनके बाद अयातुल्लाह खामेनेई ने धर्म के धागे से ईरान को बांधा. जिसके केन्द्र में शिया इस्लाम की सोच है. अरब देशों में जब राजशाही का चलन था तब ईरान ने धर्म और डेमोक्रेसी के एक हाईब्रिड गवर्नेंस सिस्टम को दुनिया के सामने रखा. इसमें जज थे, राष्ट्रपति थे, संसद थी, सेना थी. लेकिन सबसे ऊपर अयातुल्लाह थे और उनकी धार्मिक क्रांति की रक्षा करने के लिए IRGC और बासिज फोर्स. ईरान में दो समान्तर सिस्टम बने जिनकी डोर अयातुल्लाह के हाथ में बंधी थी. हर हरकत के सुप्रीम आर्किटेक्ट अयातुल्लाह ही बने.

अंगूठी का तिलिस्म कैसे खड़ा हुआ

1979 में जब रुहेल्लाह खुमैनी अयातुल्लाह बने तो उन्होंने 1980 में एक खास परंपरा शुरू की थी. जिसे कुदुस डे के नाम से जानते हैं. इसके तीन मकसद थे. इजरायल के खिलाफ फिलीस्तीन राष्ट्र की मांग के लिए समर्थन दिखाना. यरुशलम पर इस्लामी दावे को मजबूत करना और पूर्वी यरुशलम में इज़रायल के कब्जे का विरोध करना. माना जाता है कि ईरान के पहले विदेश मंत्री इब्राहिम यज्दी इस विचार के जन्मदाता थे. कहने का मतलब ये कि अयातुल्लाह की संस्था अपने जन्म और विचार से अमेरिका और इजरायल की विरोधी है. वक्त के साथ जैसे जैसे ईरान आगे बढ़ा विरोध की ये सोच मजबूत हुई और संस्थागत होती चली गई. इतनी की खामेनेई का वचन ही ईरान का शासन हो गया और ईरान इस्लाम के सेनापति बनने का दावा करने लगा. ईरान और दुनिया के शिया अयातुल्लाह से इतने मुतमईन हो गए कि वो उनकी अंगूठी में शबाब देखने लगे और दुनिया में धर्म की जो ऐतिहासिक खाईं थी वो और मजबूत होती रही.

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अयातुल्लाह की मजलिसों में अंगूठी

अयातुल्लाह खामेनेई से मुलाकात ईरान में एक सिस्टम है. ये अयातुल्लाह की जिंदगी का अहम हिस्सा है. सेना के अधिकारी, स्कूल के छात्र, वैज्ञानिक, IRGC के कमांडर, औरतों के संगठन, कवि, सभी अयातुल्लाह से मिलने आते हैं. उनके सामने जमीन पर बैठते हैं. उनके उपदेश सुनते हैं. अयातुल्लाह उन्हें ईरान के मिशन और चुनौतियों के बारे में बताते हैं. इसपर किसी को ऐतराज हो सकता है कि जब चुनी हुई सरकार और संसद है तो अयातुल्लाह की मजलिसों में ये लोग क्यों जाते हैं? ये वो लोग हैं जो धर्म और सरकार को अलग देखते हैं. लेकिन ईरान धर्म को आधार बना कर सरकार चलाता है इसलिए उसे इसमें कुछ गलत नहीं लगता है. इन बैठकों में भी अयातुल्लाह की अंगूठी पाना बड़ी बात मानी जाती है.

IRGC ट्रू प्रॉमिस-4 के जो वीडियो जारी करता है उसमें मिसाइल पर पोस्टर चिपकाने वालों के हाथ में भी वही अंगूठियां देखने को मिलती हैं. मोहम्मद बाघेर जोल्कदार भी अपने हाथ में वैसी ही अंगूठी पहनते हैं. जिन्हें ईरान ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सचिव बनाया है. लारीजानी के बाद उन्हें ये जगह मिली है.

अयातुल्लाह का सबसे खास तोहफा-अंगूठी

ईरान में शहीदों का दर्जा बहुत ऊंचा है. ईरान अपने शहीदों के लिए एक अलग जज्बा रखता है. अयातुल्लाह खामेनेई शहीदों के यहां जरूर जाते हैं. उनके आयोजनों में अभिभावक की तरह हिस्सा भी लेते हैं. एक शहीद की बेटी का निकाह था. खामेनेई वहां गए थे. निकाह मे कुछ रस्में निभाई. तोहफा भी दिया. ये तोहफा अंगूठी थी. जिसे दुल्हन और दूल्हे ने अपनी शादी के सबसे खास तोहफे की तरह पहना. शहीदों के बच्चे जब अयातुल्लाह से मिलने आते हैं तो उनकी खास मांग होती है कि अयातुल्लाह उन्हें अंगूठी दें. कई बार बच्चे अयातुल्लाह के लिए अंगूठी लाते हैं और बदले में उन्हें अयातुल्लाह की अंगूठी मिलती है. इससे ईरान के समाज में अयातुल्लाह के इमोशनल कनेक्ट और पॉवर का पता चलता है.

  • अयातुल्लाह खुमैनी,खमेनेई और मुजतबा अंगूठी पहनते हैं
  • अयातुल्लाह का खास उपहार मानी जाती है अंगूठी
  • अयातुल्लाह की अंगूठी में कुरान की आयत उकेरी गयी थी
  • जनरल कासिम सुलेमानी की अंगूठी को राष्ट्रीय धरोहर बनाया
  • अक़ीक पत्थर की अंगूठी को विशेष महत्व दिया जाता है
  • अयातुल्लाह की अंगूठियों में लाल,मरून,पीले,हरे,सफेद पत्थर
  • शहीदों के परिवार में अयातुल्लाह की अंगूठी का खास महत्व
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अयातुल्लाह ने ईरान की शख्सियत को बुलंद रखने के लिए अरब वर्ल्ड में ऐसे संस्थान और संगठन खड़े किए जो इजरायल और अमेरिका का विरोध करते हैं. इजरायली और अमेरिकी सेना के खिलाफ हथियारों के साथ युद्ध करते हैं, जिन्हें पश्चिमी दुनिया आतंकवादी कहती है. जैसे लेबनान में हिज्बुल्लाह-जहां इजरायल ईरान से ज्यादा हमला करता है. इस हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह से अयातुल्लाह खुलेआम मिलते थे. फोटो खिंचवा कर दुनिया के लिए जारी करते थे. दुनियाभर में जिस इस्माइल हानिया को सबसे बड़ा आतंकवाही कहा जाता है. उससे ईरान के अयातुल्लाह पूरे सम्मान और प्यार के साथ मिलते हैं. इसकी तस्वीरें भी जारी करते हैं. यमन में अंसार अल्लाह की मौजूदगी को आतंकी संगठन कहा जाता है लेकिन इसके प्रमुख नेता मोहम्मद अब्दुल सलाम से अयातुल्लाह खामेनेई जोश-खरोश से मिलते हैं. मुलाकात को जग जाहिर करते हैं. नाईज़ीरिया के प्रमुख शिया नेता जिन्हें वहां की सरकार आतंकी कहती थी उससे भी अयातुल्लाह मिलते हैं. उसके पूरे परिवार के साथ मिलते हैं. उसे उपहार में अंगूठियां देते हैं. पति को भी और पत्नी को भी. वहीं दूसरी ओर वो कतर के सुल्तान, क्यूबा के राष्ट्रपति, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और उनके जनरल फील्डमार्शल मुनीर से भी मिलते हैं. रूस और चीन के प्रतिनिधियों और राष्ट्रप्रमुखों से भी मुलाकात करते हैं. इस विरोधाभास को एक साथ साधने वाली सत्ता का नाम है अयातुल्लाह जिनकी पहचान अब उनकी अंगूठी से है.

अयातुल्लाह खामेनेई अपने प्रमुख मेहमानों को उपहार में अंगूठी देते हैं. नाइजेरिया के प्रसिद्ध शिया नेता शेख इब्राहिम जकजकी जब अपने परिवार के साथ अयातुल्लाह से मिलने आए थे तो अयातुल्लाह खामेनेई ने जकजकी को अंगूठी दी. ये अंगूठी भी चांदी की बनी थी. जकजकी की पत्नी को भी अंगूठी दी जिसमें हरे रंग का पत्थर था. अयातुल्लाह जब किसी शहीद के परिवार में होने वाली शादी में जाते थे तो शादी के दौरान दूल्हा और दुल्हन के लिए उनका सबसे पसंदीदा गिफ्ट अंगूठी ही होती थी. किसी को भी अगर अयातुल्लाह अपनी ओर से शबाब देना चाहते थे तो अंगूठी देते थे. ऐसे दृश्य उनकी सभाओं में देखे जाते हैं. जबकि वो खुद एक हाथ से अपनी उंगली में पड़ी अंगूठी उतार देते हैं और किसी को देने के लिए भेज देते हैं.

अयातुल्लाह का जलवा

ईरान में अयातुल्लाह खुमैनी सेंट्रल फीगर है. उनके समाधि के भीतर और बाहर ईरान का सबसे बड़ा आयोजन होता है. इसमें दुनिया के भर के डिप्लोमेट हिस्सा लेते हैं. ईरान के कोने कोने से अलग अलग ट्राइब्स के प्रतिनिधि आते हैं. जेन जी और अल्फा जनरेसन के नवयुवक होते हैं. महिलाएं आती हैं. छोटे छोटे बच्चे आते हैं. सबके हाथों में खुमैनी के पोस्टर और झंडे होते हैं. ये दिखाता है कि ईरान में अयातुल्लाह के इन्स्टीट्यूशन को कितना सावधानी से बनाया और चलाया जाता है. ये दिखाता है कि ईरान में धर्म और धर्म से जुड़े किरदारों की पैठ कितनी गहरी है. इसका एक पक्ष ये भी है कि इनके मन में ईरान विरोधियों के प्रति कुछ भी कर गुजरने की भावना बहुत मजबूत होती है.

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धर्मयुद्ध

आपको वो तस्वीर याद होगी. इस तस्वीर में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप बीच मे बैठे हैं. लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर रखा है. प्रार्थना हो रही है. पूरी दुनिया में इस प्रार्थना सभा की बहुत चर्चा हुई. मिलिट्री कमांडर्स को ये कहते सुना गया कि ईरान के साथ युद्ध ईश्वर की योजना का हिस्सा है. ईश्वर ने इसके लिए ट्रंप को चुना है. ये युद्ध आर्मागिडान की तरह ही है. ईरान पर अपने हमले को उचित ठहराने के लिए इज़रायल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू बार बार यरूशलम में क्रिश्चियन, यहूदी और मुस्लिमों के धार्मिक स्थल को युद्ध में खींच रहे हैं. मुस्लिम जगत के एक और खलीफा हैं तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दुगान. उनका दावा है कि इजरायल के इस युद्ध का टारगेट यरुशलम पर कब्जा है. ये बात दिगर है कि आजकल ईरान से उनका आंकड़ा छत्तीस का है. इस युद्ध में अयातुल्लाह की अंगूठी का महत्व वहां भी दिखता है जबकि नेतन्याहू बार बार ईरान के लोगों को अयातुल्लाह के खिलाफ विद्रोह के लिए भड़काते हैं.

नेतन्याहू की इस पहल में ईरान के निर्वासित राजकुमार रेजा पहलवी भी शामिल हैं. वो बार बार अयातुल्लाह के खिलाफ ईरान के लोगों को खुल कर सामने आने को कहते हैं. अपने शासन में अच्छे दिनों की गारंटी देते हैं. युद्ध से पहले भी ईरान में सामाजिक प्रदर्शन हुए थे. इसे ईरान पर हमले की डीजायन का हिस्सा माना गया. अंदर से कमजोर ईरान को युद्ध में फंसा देंगे. अयातुल्लाह और उनके सिस्टम को मार देंगे. इसके बाद के हालात में नई रिजीम को जनता का प्रतिनिधि बना कर ईरान की सत्ता सौंप युद्ध से निकल जाएंगे. लेकिन ये सब योजना के मुताबिक नहीं हुआ. जनता का विरोध सरकार और महंगाई के खिलाफ माना गया. अयातुल्लाह के नहीं. अंगूठी ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई.

अमेरिका का दावा है अयातुल्लाह की बासिज फोर्स ने जनता का विद्रोह कुचल दिया. युद्ध से पहले अमेरिका धमकी दे रहा था कि अगर प्रदर्शनकारियों को फांसी हुई तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा. फांसी रुक गयी लेकिन हमला हो गया. अब ईरान में आंदोलनकारियों को फांसी दी जा रही है. हमले के बाद नेतन्याहू ने ईरान को क्रूरता में चंगेजखान कहा. ईसा मसीह की एंट्री करवायी.

ईरान तो धर्म राज्य है ही. वो तो अपने यहां युद्ध को धार्मिक विरोध में विजय की तरह ही लोगों के सामने रख रहा है. अयातुल्लाह को मानने वाले उनकी इस सोच को सही मानते हैं. शहादत को शबाब मानते हैं. यहां पर ईरान के श्रेष्ठ कमांडर कासिम सुलेमानी से जुड़ा एक किस्सा जानना जरूरी है. जब अमेरिका ने ईराक के बगदाद में उनके ऊपर हमला किया. उन्हें मार दिया, तो उनके शरीर की पहचान अंगूठी से हुई थी. ईरान ने उनकी अंगूठी को रा्ष्ट्रीय महत्व की चीज घोषित कर दिया.

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप भी कासिम सुलेमानी की तारीफ करते हैं. उन्होंने ईरान के रूलिंग ईलीट के दिमाग की भी काफी तारीफ की है. यहां ये बात गौर करने वाली है कि दुश्मन तक तारीफ कर रहा है लेकिन मुस्लिम राष्ट्र ईरान के झंडे तले जाने को तैयार क्यों नहीं दिखते हैं.

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  • पैग़म्बर मोहम्मद चांदी की अंगूठी में अक़ीक पत्थर पहनते थे
  • पैग़म्बर मोहम्मद ने अंगूठी का इस्तेमाल मुहर की तरह किया
  • इमाम अली और अन्य इमाम के अंगूठी पहनने का हदीस में जिक्र
  • अक़ीक,फिरोज़ा,दुर-ए-नज़फ की अंगूठियां पहनी जाती हैं
  • अंगूठी चांदी की पहनी जाती है,सोने की अंगूठी की मनाही है
  • पैगंबर और अहल-ए-बैत की सुन्नत का प्रतीक है
  • दाहिने हाथ की अंगुश्ते शहादत की बगल वाली उंगली में पहनते हैं
  • अंगूठी के पत्थर में कुरान की आयतें उकरने का रिवाज़ है
  • अंगूठी में अक़ीक पत्थर को बहुत खास माना जाता है
  • अंगूठी में लाल अक़ीक की लोकप्रियता सबसे ज्यादा है
  • अक़ीक- बरकत, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक
  • फ़िरोज़ा- हिम्मत, सफलता और नज़र बद से सुरक्षा का प्रतीक

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कहा तो ये भी जा रहा है कि ईरान के अयातुल्लाह 46 साल से अमेरिका के हमले का इंतजार और पलटवार की तैयारी कर रहे थे. अमेरिका के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद उन्होने अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ युद्ध की तैयारी की. उनके सामने वायुसेना कमजोर थी तो शाहेद ड्रोन बनाए. एयर डिफेंस आयरन डोम के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन का कॉकटेल बनाया. समुद्र में अपनी रक्षा के लिए पानी वाले ड्रोन तैयार किए. ब्रह्मास्त्र बनाया होर्मुज।इसे अयातुल्लाह की तैयारियों की अच्छाई माना जाए या फिर बुराई?

अयातुल्लाह और उनके धर्मतंत्र के विशेष इंतजाम से दुनिया हैरान है. सब कह रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल बुरी तरह फंस चुके हैं. लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकन हमलों की लीबिया,इराक और सीरिया जैसी केस स्टडी भी हैं जिन्हें अमेरिका ने ऐसे तबाह किया कि वहां आजतक सिस्टम नहीं बन पाया है. ऐसे में अयातुल्लाह की अंगूठी का भविष्य क्या है?

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