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ईरान में कत्लेआम ने बगावत को कुचल दिया? अमेरिका से जंग का खतरा टला नहीं- 7 सवालों में समझें पूरी तस्वीर

Iran Protest Update: ईरान में प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 2,677 लोग मारे गए हैं. गुरुवार को मौत के आंकड़े में 106 की वृद्धि हुई और यह संख्या बढ़ने की संभावना है.

ईरान में कत्लेआम ने बगावत को कुचल दिया? अमेरिका से जंग का खतरा टला नहीं- 7 सवालों में समझें पूरी तस्वीर
Iran Protest Updates: ईरान के विरोध प्रदर्शनों में अबतक कम से कम 2677 लोग मारे गए हैं
  • ईरान में विरोध प्रदर्शन में अब तक कम से कम 2677 लोग मारे जा चुके हैं, आंकड़ा कहीं अधिक बढ़ सकता है
  • अमेरिका का दावा- ईरान सरकार ने अमेरिकी दबाव के बाद 800 लोगों को दी गई फांसी की सजा को फिलहाल रोक दिया है
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका की धमकी- ईरान के खिलाफ सभी विकल्प खुले हुए हैं
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ईरान में विद्रोही जनता का विरोध प्रदर्शन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अधिकारियों की क्रूर कार्रवाई के आगे गुरुवार, 15 जनवरी को धीमा पड़ता दिखा. प्रदर्शनों में कम से कम 2,677 लोग मारे गए हैं. गुरुवार को मौत के आंकड़े में 106 की वृद्धि हुई और यह संख्या बढ़ने की संभावना है. हालांकि दूसरी तरफ अमेरिकी हमले का खतरा टला नहीं है. अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की आपातकालीन बैठक ईरान को चेतावनी दी कि अभी भी 'सभी विकल्प मेज पर हैं.' आपको 7 सवालों में ईरान के विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी हमले के खतरे की पूरी तस्वीर बताते हैं.

Q- ईरान में अभी क्या हो रहा है?

एपी की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की राजधानी तेहरान में प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि अब पिछली रात हुई आगजनी या सड़कों पर मलबा का कोई नया निशान नहीं दिख रहा है. कई रातों से चली आ रही तेज गोलियों की आवाज भी फीकी पड़ गई है. अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनों पर कड़ी और हिंसक कार्रवाई के कारण कम से कम 2,677 लोग मारे गए हैं. गुरुवार को रिपोर्ट किया गया मौत का आंकड़ा एक दिन पहले की तुलना में 106 अधिक है. संगठन का कहना है कि यह संख्या बढ़ने की संभावना है. मरने वालों की संख्या दशकों में ईरान में विरोध या अशांति के किसी भी दौर से अधिक है और देश की 1979 की इस्लामी क्रांति के आसपास की अराजकता की याद दिलाती है.

Q- क्या ईरान में फांसी पूरी तरह रोक दी गई है?

अभी के लिए यही लग रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवर को देखते हुए ईरान की खामेनेई सरकार पीछे हट गई है. पहले ट्रंप ने दावा किया था कि उन्हें भरोसेमंद जानकारी मिली है कि ईरान में हत्याएं रोक दी गई हैं और जिन फांसियों को लेकर आशंका जताई जा रही थी, वे अब नहीं होंगी. अब व्हाइट हाउस ने बाद में दावा किया है कि ईरान में तय की गईं 800 फांसी रोक दी गई हैं. व्हाइट हाउस की प्रेस सैक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप और उनकी टीम ने चेतावनी दी थी कि अगर हत्याएं जारी रहीं तो इसके "गंभीर परिणाम" होंगे.

ईरान की न्यायपालिका ने भी गुरुवार, 15 जनवरी को साफ कर दिया था कि 26 साल के गिरफ्तार प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को फांसी नहीं सुनाई जाएगी. इतना ही नहीं उनपर ऐसे कोई आरोप भी नहीं लगाए गए हैं जिसमें मौत की सजा पाने का जोखिम भी हो. सुल्तानी मौजूदा अशांति शुरू होने के बाद मौत की सजा पाने वाले पहले ईरानी प्रदर्शनकारी थे. 

Q- क्या अमेरिका अब ईरान पर हमला नहीं करेगा?

हफ्तों तक बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक-दूसरे का सामना किया. यहां अमेरिका के दूत ने ईरान के इस्लामिक शासन के खिलाफ फिर से धमकियां दीं. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने परिषद को बताया, "सहयोगियों, मैं स्पष्ट कर दूं: राष्ट्रपति ट्रंप काम करने वाले व्यक्ति हैं, न कि अंतहीन बातें करने वाले व्यक्ति, जैसा कि हम संयुक्त राष्ट्र में देखते हैं... उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि नरसंहार को रोकने के लिए सभी विकल्प मेज पर हैं. और यह बात ईरानी शासन के नेतृत्व से बेहतर किसी को नहीं पता होनी चाहिए."

Q- अमेरिका ने और क्या कदम उठाए हैं?

अमेरिका ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की, जिसमें वहां के सीनियर सुरक्षा अधिकारियों, बंदियों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोपी कुख्यात जेल अधिकारी और तेल- पेट्रोकेमिकल बिक्री से अरबों डॉलर का कमाने वाली प्रमुख कंपनियों के एक विशाल नेटवर्क को निशाना बनाया गया. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में कहा, "यह ईरानी लोगों के साथ खड़े होने के लिए है. राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर, ट्रेजरी विभाग ईरानी लोगों के खिलाफ क्रूर कार्रवाई में शामिल प्रमुख ईरानी नेताओं पर प्रतिबंध लगा रहा है. ट्रेजरी शासन के मानवाधिकारों के अत्याचारी उत्पीड़न के पीछे के लोगों को निशाना बनाने के लिए हर उपकरण का उपयोग करेगा."

Q- संयुक्त राष्ट्र में ईरान की तरफ से क्या कहा गया?

बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप राजदूत होसैन दारजी ने अमेरिका की आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि ईरान में अशांति को हिंसा तक पहुंचाने में अमेरिका की सीधी भागीदारी थी. दारजी ने कहा, "ईरानी लोगों के लिए चिंता और मानवाधिकारों के समर्थन के दावों के खोखले बहाने के तहत, अमेरिका खुद को ईरानी लोगों के मित्र के रूप में चित्रित करने का प्रयास कर रहा है, साथ ही तथाकथित 'मानवीय' नैरेटिव के पर्दे में राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य हस्तक्षेप के लिए जमीन तैयार कर रहा है."

Q- ईरान में शव देने के बदले पैसे वसूल रही सरकार?

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार ईरान में विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिवारों ने बताया है कि अधिकारी उनके शवों को दफनाने के लिए वापस करने के लिए बड़ी रकम की मांग कर रहे हैं. कई सूत्रों ने बीबीसी फारसी को बताया है कि शवों को मुर्दाघरों और अस्पतालों में रखा जा रहा है और सुरक्षा बल उन्हें तब तक नहीं दे रहे हैं जब तक कि उनके रिश्तेदार पैसे नहीं सौंप देते. उत्तरी शहर रश्त में एक परिवार ने बीबीसी को बताया कि सुरक्षा बलों ने उनके रिश्तेदारों के शव को छोड़ने के लिए 700 मिलियन टोमन (4.51 लाख रुपए) की मांग की.

Q- ईरान में फंसे भारतीयों के लिए क्या कर रहा विदेश मंत्रालय?

ईरान में उभरती स्थिति को देखते हुए, विदेश मंत्रालय उन भारतीय नागरिकों की वापस लाने को तैयार है, जो भारत वापस आना चाहते हैं. हालांकि उन्हें वापस लाने का प्लान अभी होल्ड पर है क्योंकि स्थिति अभी जंग वाली नहीं है. जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहमी ने बताया है, "भारतीय दूतावास द्वारा शुरू की गई निकासी प्रक्रिया को अगली सूचना तक रोक दिया गया है. पहले उन्हें भारत लाने का निर्णय पूरी तरह से युद्ध संबंधी चिंताओं को देखते हुए एहतियाती उपाय के रूप में लिया गया था. हालांकि, आधिकारिक पुष्टि के बाद कि युद्ध जैसी स्थिति या आगे बढ़ने की उम्मीद नहीं है, अब यह स्पष्ट है कि इस समय निकासी की कोई आवश्यकता नहीं है."

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