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होर्मुज के बाद अब दुनिया को नया सिरदर्द दे सकता है ईरान, लाल सागर में US के लिए ढूंढ निकाला 'ट्रंप कार्ड'

हूती हमलों के डर से बड़ी शिपिंग कंपनियों को अपने जहाजों को लाल सागर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप से घुमाकर ले जाना पड़ा.

होर्मुज के बाद अब दुनिया को नया सिरदर्द दे सकता है ईरान, लाल सागर में US के लिए ढूंढ निकाला 'ट्रंप कार्ड'
ईरान ने ट्रंप के लिए नई बिसात बिछा दी है.
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने के बाद ईरान अब दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला देने वाले सबसे खतरनाक मोहरे को आगे करने की तैयारी में है. अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच तेहरान ने यमन के हूती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर के सबसे अहम 'बाब अल-मंदेब' समुद्री मार्ग को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है. 

अगर ऐसा होता है, तो दुनिया के दो सबसे बड़े ऊर्जा गलियारे एक साथ ठप हो जाएंगे और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.

ईरान में अमेरिका के बढ़ते हमलों और हूती विद्रोहियों के आक्रामक रुख के बीच विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान अब जंग का दायरा खाड़ी से बाहर फैला रहा है. इसका सीधा मकसद वाशिंगटन पर आर्थिक दबाव बनाना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को ठप करना है.

200 डॉलर प्रति बैरल पहुंचेगा तेल! हूती की सीधी धमकी

ईरान के प्रेस टीवी के अनुसार, यमन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ लहजे में कहा है कि अगर सऊदी अरब ने यमन पर हमले जारी रखे, तो यमन का सशस्त्र बल बाब अल-मंदेब को पूरी तरह सील कर देगा.

हूती आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा, "अगर मौजूदा हालात और बिगड़े, तो एक रणनीतिक समझौते के तहत बाब अल-मंदेब और होर्मुज दोनों जलमार्ग बंद कर दिए जाएंगे. इससे कच्चे तेल की कीमतें $200 प्रति बैरल तक उछल सकती हैं, जो पूरी दुनिया के लिए एक भयानक आर्थिक झटका होगा."

उन्होंने यह भी कहा कि वाशिंगटन, सऊदी अरब को यमन पर हमला करने के लिए भड़का रहा है, लेकिन यह चाल अमेरिका के खुद के हित में नहीं होगी.

ईरान का सबसे बड़ा दांव

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि अगर होर्मुज ईरान का सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार है, तो बाब अल-मंदेब उसकी आखिरी और सबसे असरदार रिजर्व कार्ड है.

मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार फवाज गर्गेस के मुताबिक, तेहरान अमेरिका को यह संदेश दे रहा है कि वह एक साथ दोनों जलमार्गों को संकट में डाल सकता है. इससे यह लड़ाई सिर्फ दो देशों का युद्ध न रहकर वैश्विक व्यापार की जीवन रेखा पर हमला बन जाएगी.

विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि स्थिति अब किसी सीधे महायुद्ध की जगह एक ऐसी अंतहीन खींचतान में बदल रही है. दोनों पक्ष बिना किसी बड़े समझौते के लगातार एक-दूसरे पर दबाव बढ़ा रहे हैं.

पूर्व अमेरिकी शांति वार्ताकार डेनिस रोस का कहना है कि वाशिंगटन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान के रुख को कैसे बदला जाए, ताकि वह फिर से बातचीत की मेज पर आए और किसी सर्वमान्य समझौते पर राजी हो.

लाल सागर में जहाजों पर फिर मंडराया संकट

यह पहली बार नहीं है जब हूती ने इस रास्ते को निशाना बनाया हो. अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध छिड़ने के बाद से ही ईरान समर्थित हूती गुटों ने लाल सागर में इजरायल और पश्चिमी देशों से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों पर हमले शुरू कर दिए थे.

इस लंबे रास्ते की वजह से समुद्री परिवहन लागत और सामानों की कीमतें काफी बढ़ गईं. इसके बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए और जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक टास्क फोर्स तैनात की.

किंग्स कॉलेज लंदन के सुरक्षा विशेषज्ञ एंड्रियास क्रिग के अनुसार, बाब अल-मंदेब को बंद करना ईरान के लिए 'परमाणु विकल्प' जैसा है. तेहरान इस कदम को तभी पूरी तरह लागू करेगा जब रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को लगेगा कि अब सीधे और पूर्ण युद्ध से बचना नामुमकिन है.

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