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खामेनेई की मौत पर ईरान ने रखा था 40 दिन का शोक, इस दिन ही थम गई जंग; ईरान की सड़कों पर उमड़ा जन सैलाब

Iran US War Ceasefire: ईरान में खामेनेई के समर्थन में शोक जुलूस निकाले जा रहे हैं, सरकार संकट के बीच जनता का साथ दिखाना चाहती है.

खामेनेई की मौत पर ईरान ने रखा था 40 दिन का शोक, इस दिन ही थम गई जंग; ईरान की सड़कों पर उमड़ा जन सैलाब

Iran US War Ceasefire: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के ठीक 40वें दिन मध्य-पूर्व शांति की खबर आई है. अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के लिए युद्धविराम का ऐलान हो चुका है. यह शांति समझौता ऐसे वक्त में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बेहद सख्त डेडलाइन दी थी. ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आया, तो वह फारसी सभ्यता के वजूद को ही मिटा देंगे.

इस युद्धविराम की टाइमिंग काफी अहम मानी जा रही है. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के शोक के 40 दिन आज पूरे हो रहे हैं. ईरान ने उनकी मौत पर देशव्यापी 40 दिनों के शोक का ऐलान किया था, जो आज समाप्त हो रहा है. दिलचस्प बात यह है कि जैसे ही शोक की अवधि खत्म हुई, युद्ध के मैदान से मिसाइल की गूंज शांत हो गई. 

ट्रंप की प्रेशर पॉलिटिक्स

इस युद्धविराम के पीछे राष्ट्रपति ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' वाली रणनीति को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. ट्रंप ने ईरान को एक निश्चित समय सीमा के भीतर डील करने की चेतावनी दी थी.

उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा था कि यदि ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानीं, तो अंजाम बेहद विनाशकारी होगा. ट्रंप के इस अल्टीमेटम ने ईरान के रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि इस बार खतरा सिर्फ शासन तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक पहचान और सभ्यता पर था.

जंग के इन 40 दिनों में ईरान की हालत काफी नाजुक हो गई थी. एक तरफ सर्वोच्च नेता का न होना और दूसरी तरफ लगातार होते मिसाइल हमलों ने देश की कमर तोड़ दी थी. ऐसे में ट्रंप की डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले सीजफायर पर सहमति बनना ईरान के लिए एक 'सेफ एग्जिट' की तरह देखा जा रहा है. अब दोनों पक्ष बातचीत के जरिए रास्ता निकालने पर चर्चा करेंगे.

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चेहलुम पर सड़कों पर भीड़ 

खामेनेई की मौत के 40 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक उनका आधिकारिक रूप से अंतिम संस्कार नहीं किया गया है.मीजान न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 8 अप्रैल को पूरे देश में शोक जुलूस निकाले जा रहे हैं.

ये जुलूस मस्जिदों से निकलकर मुख्य चौराहों की ओर बढ़ रहे हैं. सड़कों पर मौजूद इस भीड़ के जरिए ईरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि संकट की इस घड़ी में भी जनता शासन के साथ खड़ी है.

कल यानी 9 अप्रैल को तेहरान के रिपब्लिक स्क्वायर से एक विशाल मार्च निकाला जाएगा. ये मार्च सीधे उस जगह तक जाएगा जहां खामेनेई की मौत हुई थी. इसके अगले दिन पूरे देश में खामेनेई की रिकॉर्डेड आवाज में दुआओं का प्रसारण किया जाएगा.

जानकारों का मानना है कि इस्लामिक रिपब्लिक ने रमजान और खामेनेई की मौत के शोक का इस्तेमाल राजनीतिक ढाल के तौर पर किया है, ताकि सड़कों पर समर्थकों की मौजूदगी बनी रहे और सरकार के खिलाफ उठने वाली किसी भी आवाज को दबाया जा सके.

अब आगे क्या?

फिलहाल सीजफायर होने से युद्ध के बादल तो छंट गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह शांति स्थायी होगी? ट्रंप और ईरान के बीच होने वाली यह 'डील' किन शर्तों पर आधारित होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं.

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