Odisha Violence Police Injured: ओडिशा के रायगढ़ा जिले में हालात उस समय बेकाबू हो गए, जब जमीन और सड़क निर्माण को लेकर आदिवासी ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस टकराव में 30 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं. आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से आदिवासियों को जमीन खाली करने की चेतावनी दी गई थी, जिससे गुस्सा भड़क उठा और मामला हिंसा में बदल गया. फिलहाल इलाके में तनाव बना हुआ है और प्रशासन ने स्थिति संभालने के लिए सख्त कदम उठाए हैं.
जमीन और सड़क निर्माण बना विवाद की जड़
दरअसल, यह घटना रायगढ़ जिले के काशीपुर ब्लॉक की सुंगेर पंचायत के शगाबाड़ी गांव की है. यहां आदिवासी समुदाय के लोग वेदांता एल्युमिना कंपनी से जुड़े सड़क निर्माण प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे. बताया जा रहा है कि यह सड़क शगाबाड़ी गांव को सिजीमाली माइनिंग क्षेत्र से जोड़ने के लिए बनाई जा रही है, जिसे सरकार की मंजूरी मिल चुकी है.
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कलेक्टर का वीडियो वायरल
रायगढ़ा के कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी कुलकर्णी आशुतोष सी ने धमकी भरे लहजे में आदिवासी लोगों से अपनी जमीन खाली करने को कहा. साथ ही अपने डॉक्यूमेंट्स दिखाने को कहा और गांव वालों को बताया कि पूरा इलाका वेदांता को माइनिंग के लिए अलॉट कर दिया गया है. आपके हितों की रक्षा के लिए हमारे पास एक आदिवासी CM है. सरकार ने यहां माइनिंग पर बिल पास कर दिया है. यहां से आप हट जाओ, पुलिस तैनात है. कानून को अपने हाथ में मत लो. इस घटना का वीडियो भी सामने आया है. इन बातों से ग्रामीणों में रोष और डर दोनों बढ़ गए.
पुलिस पहुंचने से हालात बिगड़े
जब विरोध बढ़ने लगा तो पुलिस हालात संभालने और ग्रामीणों से बातचीत के लिए मौके पर पहुंची. लेकिन तनाव पहले से ही इतना ज्यादा था कि बात बिगड़ गई. देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया और ग्रामीणों की ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई. इसके जवाब में अफरा-तफरी मच गई और दोनों तरफ से टकराव हुआ.
30 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल
इस हिंसक झड़प में 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए. घायलों में रायगढ़ के एसडीपीओ गिरिधर साहू और काशीपुर के थाना प्रभारी देब मलिक जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, कम से कम सात पुलिसकर्मियों की हालत गंभीर है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रायगढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया है. अन्य घायलों का इलाज काशीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जारी है.
बिगड़ते हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाके में धारा 144 लागू कर दी है. किसी भी तरह की भीड़ जुटाने पर रोक लगा दी गई है. रायगढ़ कलेक्टर कुलकर्णी आशुतोष सी और एसपी स्वाति एस. कुमार खुद मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
आदिवासियों की चिंता और विरोध
स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि वे माइनिंग और उससे जुड़े विकास कार्यों का लगातार विरोध कर रहे हैं. उनकी चिंता है कि इससे उन्हें अपनी जमीन छोड़नी पड़ेगी, पर्यावरण को नुकसान होगा और उनकी रोजी-रोटी छिन जाएगी. इसी डर और अनिश्चितता ने विरोध को और उग्र बना दिया.
स्थिति काबू में लाने की कोशिश जारी
फिलहाल प्रशासन हालात को शांत करने में जुटा है. इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और किसी भी नई हिंसा को रोकने के लिए कड़ी निगरानी की जा रही है. यह मामला एक बार फिर आदिवासी इलाकों में विकास परियोजनाओं और स्थानीय लोगों के अधिकारों के बीच बढ़ते टकराव को सामने लाता है.
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