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Iran Protests: महंगाई की आग में उबल रहा ईरान! सड़कों पर उतरा गुस्‍सा, 6 की मौत, नहीं थम रहा बवाल

ईरान इस वक्‍त महंगाई की आग में जल रहा है. सबसे तीखी झड़पें अजना (Azna) शहर में दिखीं-तेहरान से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम. सोशल मीडिया पर आए वीडियो में सड़कों पर आग, गूंजती गोलियां और भीड़ में से निकलता नारा- 'बेशर्म! बेशर्म!' साफ सुनाई देता है.

Iran Protests: महंगाई की आग में उबल रहा ईरान! सड़कों पर उतरा गुस्‍सा, 6 की मौत, नहीं थम रहा बवाल
Iran Protests Over Economy Spread Beyond Tehran: ईरान में विरोध प्रदर्शन अब ग्रामीण प्रांतों की ओर भी बढ़ता दिख रहा है.
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  • ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के कारण राजधानी तेहरान समेत ग्रामीण प्रांतो में भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं
  • प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है
  • सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया है
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दुनियाभर के देश जब नए साल का जश्‍न मना रहे थे, ईरान महंगाई की आग में जल रहा था. 31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 की रातें ईरान में भी शोर में तब्‍दील थीं, लेकिन शासन के खिलाफ नारे, गोलियों की आवाज और सड़कों पर आग की गवाह बन रही थीं. गिरती अर्थव्यवस्था, बेलगाम महंगाई और गिरती मुद्रा ने लोगों के सब्र की हद पार कर दी है. राजधानी तेहरान (Tehran) से बाहर निकलकर विरोध की लपटें अब ग्रामीण प्रांतों तक फैल चुकी हैं. गुरुवार को कम से कम छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई, इनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं, और आशंका जताई जा रही है कि अब शासन-प्रशासन और सख्‍ती दिखा सकता है.

ईरान की सड़कों पर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍लाह अली खामेनेई के खिलाफ खुलेआम नारेबाजी हो रही है. ईरान की सड़कों पर दिख रहा ये आक्रोश सिर्फ नारेबाजी तक सीमित नहीं है. विरोध तेहरान से निकलकर कस्बों और गांवों तक पहुंच रहा है. सत्ता यहां मुहाने पर खड़ी है, जहां से दो रास्‍ते निकलते हैं- संवाद का रास्ता या फिर से सख्‍ती का.

राजधानी तेहरान से दूर लोर इलाकों में हिंसा

सबसे तीखी झड़पें अजना (Azna) शहर में दिखीं-तेहरान से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम. सोशल मीडिया पर आए वीडियो में सड़कों पर आग, गूंजती गोलियां और भीड़ में से निकलता नारा- 'बेशर्म! बेशर्म!' (Shameless! Shameless!)-साफ सुनाई देता है.

अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी (Fars News Agency) ने यहां तीन मौतों की सूचना दी है. सरकारी मीडिया ने हिंसा को लेकर सीमित जानकारी दी, जबकि सुधारवादी रुझान वाले मीडिया संस्थानों ने फार्स के हवाले से रिपोर्टिंग की. वर्ष 2022 में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की गिरफ्तारी के बाद से मीडिया पर दबाव बना हुआ है, जिसका असर इस कवरेज पर भी दिखता है.

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लॉर्डेगन और कूहदश्त में गोलीबारी और गिरफ्तारी

चहारमहल-ओ-बख्तियारी प्रांत के लॉर्डेगन (Lordegan) शहर (जो तेहरान से करीब 470 किलोमीटर दक्षिण में है) में सामने आए वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच गोलीबारी की आवाज सुनाई देती है. फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक, यहां दो लोगों की मौत हुई.

वॉशिंगटन स्थित अब्दोर्रहमान बोरोउमंद मानवाधिकार केंद्र (Abdorrahman Boroumand Center for Human Rights in Iran) ने भी दो प्रदर्शनकारियों की मौत की पुष्टि की और एक तस्वीर साझा की, जिसमें बॉडी आर्मर पहने और शॉटगन थामे एक ईरानी पुलिसकर्मी दिखाई देता है.

इसी बीच, कूहदश्त (Kouhdasht) शहर में हुए प्रदर्शनों के बाद स्थानीय अभियोजक काजेम नाजरी (Kazem Nazari) ने बताया कि 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अब हालात नियंत्रण में हैं. यह जानकारी न्यायपालिका से जुड़े मिजान समाचार एजेंसी (Mizan News Agency) ने दी.

बसीज स्वयंसेवक की मौत

बुधवार रात हुए एक अलग प्रदर्शन में अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड (Revolutionary Guard) से जुड़े बसीज (Basij) संगठन के 21 वर्षीय स्वयंसेवक की मौत हो गई. सरकारी समाचार एजेंसी इरना (IRNA) ने मौत की पुष्टि की, लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दी.

स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क (Student News Network), जिसे बसीज के करीब माना जाता है, ने लोरेस्तान प्रांत के उप-राज्यपाल सईद पौरअली (Saeed Pourali) के हवाले से कहा कि स्वयंसेवक की मौत “दंगाइयों” की वजह से हुई. उन्होंने माना कि विरोध आर्थिक दबाव, महंगाई और मुद्रा में उतार-चढ़ाव की देन है, लेकिन चेताया कि “लोग अपनी जायज मांगों को स्वार्थी तत्वों के हाथों न जाने दें.”

2022 हिंसक प्रदर्शन की यादें हुईं ताजा

ये विरोध प्रदर्शन वर्ष 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं, जब 22 वर्षीय महसा अमीनी (Mahsa Amini) की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में उग्र आंदोलन हुए थे. फर्क यह है कि इस बार प्रदर्शन अभी पूरी तरह देशव्यापी नहीं हैं, लेकिन इनके पीछे की आर्थिक वजहें कहीं ज्यादा गहरी हैं.

कुछ वर्ष पहले ईरान में ऐसा ही विरोध प्रदर्शन देखा गया था.

कुछ वर्ष पहले ईरान में ऐसा ही विरोध प्रदर्शन देखा गया था.
Photo Credit: Wikimedia Commons (File Photo)

गिरती करेंसी और 'मजबूर' सरकार की सीमाएं

सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) की नागरिक सरकार संवाद के संकेत दे रही है, लेकिन वे भी मानते हैं कि ईरानी मुद्रा रियाल (Rial) की तेज गिरावट ने हालात मुश्किल कर दिए हैं. मौजूदा समय में 1 अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की कीमत करीब 14 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है.

स्‍टेट टीवी ने अलग से यह भी बताया कि सुरक्षा बलों ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है-इनमें पांच कथित राजशाही समर्थक और दो यूरोप-आधारित (Europe-based) समूहों से जुड़े बताए गए हैं. एक अन्य अभियान में 100 तस्करी की पिस्तौलें जब्त करने का भी दावा किया गया, हालांकि विस्तार नहीं दिया गया.

अंतरराष्ट्रीय दबाव और रणनीति

सरकार ने ठंड का हवाला देते हुए कई इलाकों में सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) घोषित किया. चूंकि ईरान में गुरुवार-शुक्रवार सप्ताहांत (Weekend) होता है और शनिवार इमाम अली (Imam Ali) का जन्मदिन है, इसे राजधानी से लोगों को बाहर भेजने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.

इधर, जून में इजराइल (Israel) के साथ हुए 12-दिवसीय युद्ध और उसके दौरान अमेरिकी हमलों के बाद से ईरानी नेतृत्व लगातार दबाव में है. ईरान का कहना है कि वह अब किसी भी स्थल पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) नहीं कर रहा और बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की चेतावनियों के चलते हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.

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