ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के खत्म करने के लिए एक डील पर सहमति लगभग बन गई है. इस पोस्ट को ट्रंप ने भी पोस्ट किया है. अराघची ने कहा है कि अंतिम रूप दिए जाने तक मीडिया को अटकलों से बचना चाहिए. ईरान के विदेश मंत्री ने लिखा, "इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पहले कभी इतना करीब नहीं था. जब तक यह फाइनल नहीं हो जाता, मीडिया को इसके कंटेंट के बारे में अंदाजा लगाने से बचना चाहिए. हमारे जिम्मेदार और ट्रांसपेरेंट नजरिए के हिसाब से, सभी डिटेल्स सही समय पर जनता के साथ शेयर की जाएंगी."
लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में बड़े मुद्दों पर मतभेद हैं. इसे लेकर कुछ सवाल अब भी हैं जिनके जवाब मालूम नहीं हैं. सीएनएन ने समझौते में शामिल एक राजनयिक, ट्रंप प्रशासन के सीनियर अधिकारी और ईरानी मीडिया के हवाले से इन बड़े मतभेदों को रिपोर्ट किया है.

होर्मुज स्ट्रेट का बॉस कौन होगा?
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर धुंध अब भी बरकरार है. US अधिकारी ने कहा कि स्ट्रेट फिर से खुल जाएगा और राजनयिक ने बताया कि ईरान को ट्रांजिट फीस लेने की इजाजत नहीं होगी, लेकिन यह नहीं बताया कि समुद्री ट्रैफिक की देखरेख कौन करेगा. ईरानी मीडिया मीडिया ने फीस का कोई जिक्र नहीं किया है. इससे पता चलता है कि तेहरान ने शायद वह मांग छोड़ दी है.
वहीं ईरान के फ्रीज किए गए फंड को लेकर भी कोई सहमति बनने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं. राजनयिक के मुताबिक, ईरान की यह मांग साफ तौर पर गायब है कि वह अपने अरबों डॉलर के फंड को अनफ्रीज कराए. इन फंड्स पर अमेरिका की पाबंदी लगी है.
लेकिन ईरानी मीडिया आउटलेट्स का कहना है कि इस डील में 24 बिलियन डॉलर रिलीज़ करना शामिल है. इसमें से भी आधा साइन करते ही तुरंत मिल जाएगा.
युद्ध के मुआवजे का क्या हुआ?
युद्ध के मुआवजे पर भी संकट के बादल हैं. ईरानी मीडिया ने 300 बिलियन डॉलर के रिकंस्ट्रक्शन फंड पर भी जोर दिया है, इसे युद्ध के दौरान हुए नुकसान के मुआवजे के तौर पर दिखाया है. US अधिकारी और राजनयिक ऐसे किसी प्रोविजन का जिक्र नहीं कर रहे हैं.
इजरायल और लेबनान का मुद्दा भी अनुउत्तरित रहा है. भले ही इजरायल और हिज्बुल्लाह सीधे तौर पर बातचीत में शामिल न हों, लेकिन सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ड्राफ्ट में ऐसे कमिटमेंट शामिल हैं जो दोनों पार्टियों पर असर डालते हैं. जैसे कि सीज़फ़ायर जिसमें लेबनान भी शामिल हो. ऐसा लगता है कि यह अरेंजमेंट वॉशिंगटन और तेहरान पर निर्भर करता है कि वे अपने-अपने पार्टनर्स से इसका पालन करवाएं. हालांकि, इजरायल ने बार-बार कहा है कि वह हिज्बुल्लाह पर हमला करता रहेगा.
न्यूक्लियर को लेकर भी असमंजस
इसके ठीक उलट, ईरानी मीडिया का कहना है कि ईरान तुरंत कोई नया वादा नहीं करेगा और मेमो पर साइन करने के बाद 60-दिन की बातचीत के दौरान ही न्यूक्लियर बातचीत करेगा. इस बीच, डिप्लोमैट ने कहा कि यह समझौता न्यूक्लियर मुद्दे पर अमेरिका की सभी जरूरतों को पूरा करता है. इसमें ईरान का हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक भी शामिल है.
कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि भले ही विदेश मंत्री अराघची और ट्रंप प्रशासन को लेकर ये कह रहे हैं डील बहुत करीब है, लेकिन कई मुद्दों पर दोनों पक्षों में सहमति की खाई अब भी गहरी है.
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