वाशिंगटन:
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का प्रशासन भारत सहित अपने महत्वपूर्ण सहयोगियों को सशस्त्र ड्रोन बेचने पर जोर दे रहा है लेकिन उसे सांसदों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सांसदों ने ड्रोन प्रौद्योगिकी के प्रसार को लेकर चिंता जताई है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। समाचार पत्र 'वाल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन चाहता है कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य देशों के पास इस तरह के पायलट रहित विमानों की संख्या और अधिक हो ताकि अफगानिस्तान में अमेरिका का बोझ कम करने और भविष्य में लीबिया जैसा अभियान चलाने में मदद मिले। भारत जो कुछ समय से इजरायल से ड्रोन विमान खरीद रहा है, वह अमेरिकी ड्रोन विमानों का खरीदार हो सकता है। भारत हालांकि, अपने ड्रोन विमान को विकसित करने में जुटा है लेकिन उसके पास प्रेडटर्स एवं रीपर्स जैसे सशस्त्र ड्रोन विमान नहीं हैं। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां इन ड्रोन विमानों का इस्तेमाल पाकिस्तान में अलकायदा और तालिबान को निशाना बनाने में करती हैं।
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