
भारत-बांग्लादेश के बीच शुरू हुई बस की फाइल फोटो
ढाका:
भारत और बांग्लादेश के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की पहल के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बांग्लादेश की उनकी समकक्ष शेख हसीना और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को हरी झंडी दिखा कर दो बस सेवाओं की शुरुआत की।
ये बस सेवाएं कोलकाता-ढाका-अगरतला और ढाका-शिलॉन्ग-गुवाहाटी के बीच चलेंगी और इनके माध्यम से पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश की राजधानी ढाका होते हुए भारत के पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के साथ जोड़ा जाएगा।
अपनी बांग्लादेश यात्रा के पहले दिन पीएम मोदी ने बस सेवाओं को हरी झंडी दिखाने के समारोह के दौरान शेख हसीन को अगरतला-ढाका-कोलकाता सेवा का पहला सांकेतिक टिकट सौंपा और इसी तरह से बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने ढाका-शिलॉन्ग-गुवाहाटी सेवा का पहला सांकेतिक टिकट मोदी को सौंपा। ममता बनर्जी ने हसीना को कोलकाता-ढाका-अगरतला सेवा का सांकेतिक टिकट सौंपा।
इन बस सेवाओं का मकसद पड़ोसी देशों के बीच संपर्क बढ़ाकर यहां के लोगों के बीच संपर्क को बेहतर बनाना है। कोलकाता-अगरतला-ढाका मार्ग पर दो बसें होंगी, जिसमें एक पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से चलेगी और दूसरी त्रिपुरा सरकार की ओर से चलाई जाएगी। ढाका-शिलॉन्ग-गुवाहाटी मार्ग पर एकमात्र बस बांग्लादेश की सरकार चलाएगी। शुरू में इस मार्ग पर बसें हफ्ते में तीन दिन चलेंगी, जिनमें से प्रत्येक गुवाहाटी और ढाका से चलेंगी।
कोलकाता-ढाका-अगरतला सेवा शुरू होने से पश्चिम बंगाल और भूमि से घिरे (लैंडकॉक्ड) त्रिपुरा राज्य के बीच की दूरी 560 किलोमीटर कम हो जाएगी। त्रिपुरा तीनों ओर से बांग्लादेश से घिरा हुआ है।
अभी ढाका-कोलकाता और ढाका-अगरतला के बीच अलग-अलग बस सेवाएं चल रही हैं।
भारत और बांग्लादेश रेल संपर्क को भी मजबूत बनाने को उत्सुक हैं। विशेष तौर पर 1965 से पूर्व किए गए रेल संपर्क को फिर से शुरू करने को लेकर दोनों देशों के बीच खासा उत्साह है।
दोनों देश तटीय पोत परिवहन समझौता भी करने को तत्पर हैं ताकि भारत से बांग्लादेश के विभिन्न बंदरगाहों तक छोटे पोतों के आवागमन की सुविधा तैयार की जा सके, जो अभी सिंगापुर होते हुए जाते हैं।
भारत यह महसूस करता है कि बांग्लादेश के साथ संपर्क बढ़ाने से उसको पूर्वोत्तर क्षेत्र का दक्षिण पूर्व एशिया के साथ संपर्क बनाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करने और बलिदान देने वाले सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करके की। इस मुक्ति संग्राम में भारत ने भी मदद की थी।
मोदी यहां बंगबंधु स्मारक संग्रहालय भी गए, जो बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान को समर्पित है।
इससे पहले मोदी के ढाका पहुंचने पर उनका शानदार स्वागत किया गया था। प्रोटोकॉल से अलग हटते हुए प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हजरत शाहजलाल हवाई अड्डे पर उनकी आगवानी की थी।
इस यात्रा के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि ढाका में जगह-जगह पीएम मोदी के बड़े-बड़े चित्रों के साथ ममता और हसीना के कटआउट लगाए गए हैं। ममता शुक्रवार की रात ही यहां पहुंचीं थीं।
ये बस सेवाएं कोलकाता-ढाका-अगरतला और ढाका-शिलॉन्ग-गुवाहाटी के बीच चलेंगी और इनके माध्यम से पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश की राजधानी ढाका होते हुए भारत के पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के साथ जोड़ा जाएगा।
अपनी बांग्लादेश यात्रा के पहले दिन पीएम मोदी ने बस सेवाओं को हरी झंडी दिखाने के समारोह के दौरान शेख हसीन को अगरतला-ढाका-कोलकाता सेवा का पहला सांकेतिक टिकट सौंपा और इसी तरह से बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने ढाका-शिलॉन्ग-गुवाहाटी सेवा का पहला सांकेतिक टिकट मोदी को सौंपा। ममता बनर्जी ने हसीना को कोलकाता-ढाका-अगरतला सेवा का सांकेतिक टिकट सौंपा।
इन बस सेवाओं का मकसद पड़ोसी देशों के बीच संपर्क बढ़ाकर यहां के लोगों के बीच संपर्क को बेहतर बनाना है। कोलकाता-अगरतला-ढाका मार्ग पर दो बसें होंगी, जिसमें एक पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से चलेगी और दूसरी त्रिपुरा सरकार की ओर से चलाई जाएगी। ढाका-शिलॉन्ग-गुवाहाटी मार्ग पर एकमात्र बस बांग्लादेश की सरकार चलाएगी। शुरू में इस मार्ग पर बसें हफ्ते में तीन दिन चलेंगी, जिनमें से प्रत्येक गुवाहाटी और ढाका से चलेंगी।
कोलकाता-ढाका-अगरतला सेवा शुरू होने से पश्चिम बंगाल और भूमि से घिरे (लैंडकॉक्ड) त्रिपुरा राज्य के बीच की दूरी 560 किलोमीटर कम हो जाएगी। त्रिपुरा तीनों ओर से बांग्लादेश से घिरा हुआ है।
अभी ढाका-कोलकाता और ढाका-अगरतला के बीच अलग-अलग बस सेवाएं चल रही हैं।
भारत और बांग्लादेश रेल संपर्क को भी मजबूत बनाने को उत्सुक हैं। विशेष तौर पर 1965 से पूर्व किए गए रेल संपर्क को फिर से शुरू करने को लेकर दोनों देशों के बीच खासा उत्साह है।
दोनों देश तटीय पोत परिवहन समझौता भी करने को तत्पर हैं ताकि भारत से बांग्लादेश के विभिन्न बंदरगाहों तक छोटे पोतों के आवागमन की सुविधा तैयार की जा सके, जो अभी सिंगापुर होते हुए जाते हैं।
भारत यह महसूस करता है कि बांग्लादेश के साथ संपर्क बढ़ाने से उसको पूर्वोत्तर क्षेत्र का दक्षिण पूर्व एशिया के साथ संपर्क बनाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करने और बलिदान देने वाले सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करके की। इस मुक्ति संग्राम में भारत ने भी मदद की थी।
मोदी यहां बंगबंधु स्मारक संग्रहालय भी गए, जो बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान को समर्पित है।
इससे पहले मोदी के ढाका पहुंचने पर उनका शानदार स्वागत किया गया था। प्रोटोकॉल से अलग हटते हुए प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हजरत शाहजलाल हवाई अड्डे पर उनकी आगवानी की थी।
इस यात्रा के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि ढाका में जगह-जगह पीएम मोदी के बड़े-बड़े चित्रों के साथ ममता और हसीना के कटआउट लगाए गए हैं। ममता शुक्रवार की रात ही यहां पहुंचीं थीं।
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