अमेरिका ने ईरान में गिराए गए दो F-15E फाइटर जेट के क्रू को बचाने के लिए दर्जनों विमान, सैकड़ों जवान, सीआईए की गुप्त तकनीक और चालाकी भरी रणनीति का सहारा लिया. यह बेहद जोखिम भरा मिशन था, जिसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रक्षा अधिकारियों ने सोमवार को दी. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि गुरुवार देर रात विमान गिरने के कुछ ही घंटों के भीतर अमेरिकी सेना ने पायलट को बचा लिया था. उन्होंने बताया कि जैसे ही लोकेशन की पुष्टि हुई, बचाव कार्य के लिए हेलिकॉप्टर, हवा में ईंधन भरने वाले विमान और फाइटर जेट्स को तेजी से ईरान में भेजा गया और गिराए गए विमान के जीवित बचे सदस्य यानी वेपन सिस्टम्स ऑफिसर को करीब दो दिन बाद सुरक्षित निकाल लाया गया.
जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ प्रमुख जनरल डैन केन ने बताया कि A-10 वारथॉग विमान, जमीन पर गिरे पायलट के संपर्क में रहने की जिम्मेदारी निभा रहा था, लेकिन वो इस दौरान ईरानी फायरिंग की चपेट में आ गया. उन्होंने बताया कि A-10 की हालत ऐसी हो गई थी कि उसे नीचे उतारा नहीं जा सकता था. लेकिन पायलट ने सूझबूझ दिखाई, लड़ाई जारी रखी और बाद में एक मित्र राष्ट्र की सीमा में जाकर विमान से बाहर कूद गया. उसे तुरंत बचा लिया गया और वह सुरक्षित है. लेकिन वेपन सिस्टम्स ऑफिसर को ढूंढना और निकालना ज्यादा मुश्किल था.
ईरान में गिरे अमेरिकी पायलट ने क्या किया?
यह अधिकारी, जो F-15 की पिछली सीट पर ‘Dude-44 Bravo' कॉल साइन के साथ उड़ान भर रहा था, घायल था लेकिन उसने अपनी ट्रेनिंग के मुताबिक क्रैश साइट से दूर जाने की कोशिश की. वह पहाड़ी इलाके में चढ़ गया और एक गुफा या दरार में छिप गया. उसने शनिवार को अमेरिकी सेना से संपर्क किया.
ट्रंप ने कहा कि जब कोई विमान दुश्मन इलाके में गिरता है, तो सभी लोग उसी जगह पहुंचते हैं, इसलिए वहां से जितना दूर जा सकें उतना बेहतर होता है. सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने बताया कि एजेंसी ने ऐसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया, जो किसी और खुफिया एजेंसी के पास नहीं है, ताकि उस अधिकारी की लोकेशन पता लगाई जा सके. साथ ही, उस दूसरे पायलट को ढूंढ रहे ईरानी बलों को भ्रमित करने के लिए सीआईए ने एक धोखे वाली रणनीति भी अपनाई.
नहीं बताया- किस तकनीक का इस्तेमाल किया?
रैटक्लिफ ने इस ऑपरेशन को ऐसे बताया जैसे रेगिस्तान में रेत के एक कण को ढूंढना हो. सीआईए ने यह बताने से इनकार कर दिया कि उस एयरमैन को ढूंढने के लिए किस तरह की तकनीक इस्तेमाल की गई.
ड्रोन, अटैक एयरक्राफ्ट और दूसरे विमानों के बड़े बेड़े की सुरक्षा में रेस्क्यू टीम रविवार को आगे बढ़ी और वेपन सिस्टम्स ऑफिसर को निकालकर सुरक्षित वापस ले आई.
ट्रंप ने कहा कि इस ऑपरेशन में शामिल कई विमान सिर्फ दुश्मन को भ्रमित करने के लिए तैनात किए गए थे. उन्होंने कहा कि हम उन्हें अलग अलग दिशाओं में भेज रहे थे और इसका बड़ा हिस्सा धोखे की रणनीति था. हम चाहते थे कि उन्हें लगे कि वह किसी और जगह पर है.
वॉशिंगटन में इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारी लगातार संपर्क में थे और करीब दो दिनों तक फोन लाइन लगातार चालू रखी गई.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि जैसे ही हमारे पायलट गिरे, हमारा मिशन बिना रुके जारी रहा. कॉल कभी बंद नहीं हुई, मीटिंग कभी खत्म नहीं हुई और प्लानिंग लगातार चलती रही.
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