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मोबाइल लोकेशन बना काल, पता चल गया ईरान ने खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैनिकों को कैसे बनाया निशाना

ईरान ने कैसे मिडिल ईस्ट के पुराने टेलीकॉम सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाया?

मोबाइल लोकेशन बना काल, पता चल गया ईरान ने खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैनिकों को कैसे बनाया निशाना
US Iran War: ईरान ने रोमिंग डेटा से कैसे खोजे अमेरिकी सेना के ठिकाने? (प्रतिकात्मक फोटो)

सोचिए, अगर आपके दुश्मनों को सिर्फ आपके मोबाइल नंबर के जरिए यह पता चल जाए कि आप इस समय कहां मौजूद हैं. कुछ ऐसा ही करने का दावा ईरानी हैकर्स को लेकर किया जा रहा है. खबरों के मुताबिक, उन्होंने मिडिल ईस्ट के पुराने टेलीकॉम सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर वहां मौजूद अमेरिकी कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टर्स के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाया. मोबाइल जासूसी पर रिसर्च करने वाले ग्रुप 'मोबाइल सर्विलांस मॉनिटर' के मुताबिक, मिडिल ईस्ट के टेलीकॉम नेटवर्क पर अचानक ऐसे रिक्वेस्ट की बाढ़ आ गई, जिनका मकसद अपने देश के नेटवर्क से बाहर इस्तेमाल हो रहे खास मोबाइल फोनों की लोकेशन पता करना था.

इस नॉन-प्रॉफिट संस्था को शुरू करने वाले साइबरसिक्योरिटी रिसर्चर गैरी मिलर ने द न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) को बताया कि यह डेटा एक सोचे-समझे हमले का संकेत था.

अमेरिका और ईरान की हाईटेक जंग

फाइनेंशियल टाइम्स (FT) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये खतरनाक साइबर हमले ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के उस संघर्ष के दौरान हुए जो फरवरी के आखिर में शुरू हुआ. पूरे मिडिल ईस्ट में हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिनमें बहरीन भी शामिल है. मिलर के मुताबिक, बहरीन में टेलीकॉम नेटवर्क पर SS7 पिंग नाम की जानकारी मांगने वाली रिक्वेस्ट की बाढ़ आ गई थी. SS7 पिंग एक तरह की साइलेंट क्वेरी होती है जिसे ग्लोबल टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क के जरिए किसी टारगेट फोन का पता लगाने या यह कन्फर्म करने के लिए भेजा जाता है कि वह एक्टिव है और रोमिंग में है.

FT की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी देशों के अधिकारियों का मानना ​​है कि ईरान या उसके सहयोगी अमेरिकी सैनिकों का पता लगाने के लिए लोकल फोन प्रोवाइडर्स के साथ रोमिंग एग्रीमेंट का फायदा उठा रहे हैं. मिलर ने कहा, "ईरान के पास निश्चित रूप से रियल-टाइम, तुरंत और लगातार लोकेशन की जानकारी पाने की क्षमता है. अगर ईरान अमेरिकी यूजर्स को ट्रैक करने के लिए इस क्षेत्र में SS7 या मोबाइल नेटवर्क एक्सेस का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, तो मुझे बहुत हैरानी होगी."

उन्होंने आगे कहा कि डेटा में रोकी गई ट्रैकिंग की कुछ कोशिशों को ईरान के एक मोबाइल फोन ऑपरेटर से जोड़ा जा सकता है, जिससे एक ऐसा फिंगरप्रिंट बनता है जो कई अन्य से मेल खाता है. मिलर ने कहा, "ऐसा लगता है कि यह किसी खास यूजर को टारगेट करने का मामला है. वे खास डिवाइस को टारगेट कर रहे हैं."

लोकेशन पाकर अमेरिकी ठिकानों पर ईरान कर रहा था हमले?

ईरान ने अपने क्षेत्रीय मिलिशिया की मदद से युद्ध के दौरान इराक, बहरीन (जहां अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा तैनात है) और मिडिल ईस्ट के अन्य इलाकों में कई होटलों पर हमले किए हैं. कुछ मौकों पर, इन हमलों में अमेरिकी कॉन्ट्रैक्टर और कर्मचारी घायल भी हुए हैं. NYT से बात करते हुए, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की साइबर सुरक्षा रिसर्चर निकिता शाह ने कहा कि ईरान का टारगेट का पता लगाने के लिए फोन नेटवर्क सिग्नल का इस्तेमाल करना उसकी साइबर-वॉर क्षमताओं में हुई तरक्की को दिखाता है. इससे ईरानी मिसाइलों की मारक क्षमता के दायरे में मौजूद अमेरिकी कर्मचारियों के लिए खतरा पैदा हो गया है.

शाह ने कहा, "पिछले कुछ सालों में, और खासकर इस संघर्ष के दौरान, ईरान काफी क्रिएटिव हो गया है. मेरे लिए, यह तकनीक के मामले में एक कदम आगे बढ़ने का संकेत है."

अमेरिकी सेना कर रही इनकार

अप्रैल में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने संसद को बताया कि उसे दुश्मनों द्वारा युद्ध क्षेत्र में अमेरिकी कर्मचारियों को निशाना बनाने या उन पर नजर रखने के लिए कमर्शियल लोकेशन डेटा के इस्तेमाल से जुड़ी कई खतरे की रिपोर्ट मिली हैं. हालांकि CENTCOM ने कहा कि उसने "अपनी सेना को सुरक्षित रखने के लिए फोर्स की सुरक्षा के ऐसे उपाय किए, जो पहले नहीं किए गए हैं और जिनके बारे में हम बात नहीं कर सकते.

इसके अलावा, एक अमेरिकी अधिकारी ने FT को बताया कि "ऐसा कोई भी दावा कि हमलों में डेटा ट्रैकिंग की अहम भूमिका थी... तथ्यों से अलग है."

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