दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ रहा है. वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारतीय बड़ी संख्या में काम करते हैं और यही वजह है कि संघर्ष प्रभावित इलाकों में सबसे अधिक जोखिम भी उन्हीं को झेलना पड़ता है. भारतीय नाविकों के संगठन फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने एक वीडियो जारी कर उन खतरनाक परिस्थितियों की तस्वीर पेश की है, जिनका सामना भारतीय नाविकों को समुद्र में करना पड़ रहा है. वीडियो में एक मालवाहक जहाज के आसपास सशस्त्र नौकाएं दिखाई देती हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं.
वैश्विक समुद्री क्षेत्र में है भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी
समुद्री परिवहन क्षेत्र में भारतीयों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दुनिया के कुल नाविकों में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 12.2 प्रतिशत है. ऐसे में जब भी किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर संघर्ष या तनाव बढ़ता है, उसका सीधा असर भारतीय नाविकों पर पड़ता है. होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग माना जाता है. वैश्विक स्तर पर तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से होकर गुजरती है.
On 22 April, in the Strait of Hormuz, a vessel carrying 22 crew members, of whom 21 were Indian, faced a deeply distressing situation.
— FSUI (@FSUIINDIA) August 20, 2026
These were not pirates.
They were naval forces of the IRGC.
Videos show several small boats surrounding the vessel, the intensity of the… pic.twitter.com/5UgxtZETSd
वीडियो में दिखा भयावह घटनाक्रम
फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया की ओर से जारी वीडियो 22 अप्रैल की एक घटना से जुड़ा बताया गया है. जानकारी के अनुसार उस समय भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या वाले एक पनामा ध्वजधारी कंटेनर जहाज को कथित तौर पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी नौकाओं ने घेर लिया था. वीडियो में देखा जा सकता है कि जहाज के आसपास कई तेज गति वाली नौकाएं मौजूद हैं. स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती दिखाई देती है और चालक दल के सदस्य जहाज के भीतर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते नजर आते हैं. यूनियन का दावा है कि इस दौरान रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) भी दागा गया था.
जहाज पर सवार थे 21 भारतीय
घटना के समय जहाज पर 21 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे. बाद में भारत के जहाजरानी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. हालांकि इस घटना ने समुद्र में काम कर रहे भारतीय कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. नाविक संगठनों का कहना है कि संघर्ष क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम जरूरी हैं.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
जून में प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी के बाद से होर्मुज और उसके आसपास व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम 15 नाविकों की जान जा चुकी है. बताया गया है कि मृतकों में कई भारतीय नाविक भी शामिल थे. रिपोर्ट के बाद समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.
भारत सरकार ने उठाए एहतियाती कदम
घटनाओं के बाद भारत सरकार ने स्थिति पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी. पिछले महीने एक नाविक की मृत्यु के मामले में भारत ने ईरान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया और उसके उप राजदूत को तलब कर अपनी चिंता जताई. इसके अलावा जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे मौजूदा हालात को देखते हुए भारतीय नाविकों को होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर तैनात करने से पहले विशेष सावधानी बरतें.
शिपिंग महानिदेशालय की चेतावनी
डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग (Directorate General of Shipping) ने अपने आदेश में कहा कि हालिया हमलों के कारण संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में काम कर रहे नाविकों और व्यापारिक जहाजों के सामने जोखिम काफी बढ़ गया है. अधिकारियों ने जहाजों के कप्तानों (कैप्टन) को निर्देश दिया है कि वे फारस की खाड़ी, होर्मुज और आसपास के समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखें. साथ ही नेवल रूट संबंधी चेतावनियों और सुरक्षा अलर्ट की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित करें.
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