- दुनिया की सबसे मशहूर हथिनियों में शामिल “हैप्पी” अब इस दुनिया में नहीं रही
- यही वह हथिनी थी जिसने वैज्ञानिकों को पहली बार दिखाया था कि हाथी आईने में खुद को पहचान सकते हैं
- 55 साल की उम्र में “हैप्पी” को मौत की दवा देकर सुला दिया गया
दुनिया की सबसे मशहूर हथिनियों में शामिल “हैप्पी” अब इस दुनिया में नहीं रही. यही वह हथिनी थी जिसने वैज्ञानिकों को पहली बार दिखाया था कि हाथी आईने में खुद को पहचान सकते हैं. उसकी वजह से जानवरों की समझ और सोच को लेकर पूरी दुनिया में नई बहस शुरू हुई थी. लेकिन अब 55 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई है. दरअसल उसे मौत दी गई है. अमेरिका के न्यूयॉर्क के ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर ने बुधवार को बताया कि 55 साल की उम्र में “हैप्पी” को मौत की दवा देकर सुला दिया गया.
एशियाई हथिनी हैप्पी को मंगलवार को उसी चिड़ियाघर में सुलाया गया, जहां वह लगभग 50 साल से रह रही थी. चिड़ियाघर अधिकारियों ने कहा कि उम्र से जुड़ी कई बीमारियां पिछले कुछ हफ्तों में तेजी से बढ़ गई थीं. उसके शरीर में किडनी और लिवर के काम करने की क्षमता कम होने के संकेत भी दिख रहे थे.
उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर के कई कर्मचारी बहुत दुखी हैं, क्योंकि कुछ लोग 30 साल से ज्यादा समय से उसकी देखभाल कर रहे थे. हैप्पी की मौत के बाद अब 57 साल की “पैटी” न्यूयॉर्क शहर में प्रदर्शित होने वाली आखिरी हथिनी रह गई है. इस चिड़ियाघर चलाने वाली संस्था “वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी” ने 20 साल पहले फैसला किया था कि वह अब नए हाथी नहीं लाएगी.
कहानी हथिनी हैप्पी की
हैप्पी का जन्म एशिया के जंगलों में हुआ था. जब वह सिर्फ एक साल की थी, तब उसे अमेरिका लाया गया. साल 1977 में चिड़ियाघर पहुंचने से पहले उसका नाम फिल्म “स्नो व्हाइट एंड द सेवन ड्वार्फ्स” के एक किरदार के नाम पर रखा गया था. चिड़ियाघर के एनिमन प्रोग्राम डायरेक्टर कीथ लोवेट ने कहा कि हैप्पी अपने देखभाल करने वालों के साथ बहुत घुली-मिली रहती थी और तरबूज या स्ट्रॉबेरी जैसी अपनी पसंदीदा चीजें देखकर जल्दी खुश हो जाती थी.
कभी-कभी वह खाने की चीजें बाद में खाने के लिए अपने कान में छिपाकर रख लेती थी. साल 2005 में हैप्पी ने वैज्ञानिकों को दिखाया कि हाथी आईने में खुद को पहचान सकते हैं. यह आत्म-जागरूकता की निशानी मानी जाती है और बहुत कम जीवों में देखी जाती है. इस प्रयोग के दौरान हैप्पी ने आईने में खुद को देखा और अपनी आंख के ऊपर बने “एक्स” निशान को बार-बार अपनी सूंड से छुआ. वह निशान वह सिर्फ आईने में ही देख सकती थी.
(इनपुट- एपी)
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