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कैसे डेनमार्क की झोली में आया ग्रीनलैंड, 212 साल पहले 14 जनवरी की दिलचस्प कहानी तानाशाह नेपोलियन की हार से जुड़ी

Greenland History: आज से ठीक 212 साल पहले डेनमार्क को आधिकारिक रूप से ग्रीनलैंड का कब्जा मिला था. सच कहें तो डेनमार्क ने बड़ी चालाकी से ग्रीनलैंड को अपने पाले में कर लिया था.

कैसे डेनमार्क की झोली में आया ग्रीनलैंड, 212 साल पहले 14 जनवरी की दिलचस्प कहानी तानाशाह नेपोलियन की हार से जुड़ी
Greenland History: डेनमार्क ने बड़ी चालाकी से ग्रीनलैंड को अपने पाले में कर लिया था.
  • 14 जनवरी 1814 को कील संधि पर हस्ताक्षर हुए, जो नेपोलियन युद्धों के दौरान शांति समझौता थी
  • डेनमार्क ने कील संधि के अनुच्छेद IV के तहत ग्रीनलैंड को नॉर्वे से अलग कर अपने कब्जे में रखा
  • ग्रीनलैंड 1979 से अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के नियंत्रण में हैं
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अमेरिका एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर धमकियां दे रहा है. वेनेजुएला में मिलिट्री ऑपरेशन चलाने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अटैक मोड में हैं. चाहे सैन्य हमला हो या बातचीत, वो किसी तरीके से डेनमार्क के अर्धस्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कब्जा करने का संकेत दे रहे हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि आज यानी 14 जनवरी 2025 से ठीक 212 साल पहले डेनमार्क को आधिकारिक रूप से ग्रीनलैंड का कब्जा मिला था. सच कहें तो डेनमार्क ने बड़ी चालाकी से ग्रीनलैंड को अपने पाले में कर लिया था.

खास बात है कि यह सब नेपोलियन की हार से जुड़ा है. अब आपके मन में ख्याल आ रहा होगा कि ऐसी कौन सी संधि हुई थी जिसमें हारे हुए देश ने चालाकी से ग्रीनलैंड खुद को दे दिया. चलिए आपको कील संधि के बारे में सब बताते हैं. 

बड़े काम की बात: ग्रीनलैंड में साल 1979 से व्यापक स्वशासन है, हालांकि रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के हाथों में है. इसीलिए ग्रीनलैंड को डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त हिस्सा माना जाता है. ग्रीनलैंड और डेनमार्क में बैठी दोनों जगह की सरकारों ने साफ-साफ कह दिया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है लेकिन ट्रंप और उनकी सरकार मान नहीं रही है.

कील संधि

कील संधि पर 14 जनवरी, 1814 को हस्ताक्षर किया गया था. कील की संधि एक शांति समझौता थी जिसने नेपोलियन युद्धों के दौरान डेनमार्क-नॉर्वे और नेपोलियन विरोधी गठबंधन (विशेष रूप से स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम) के बीच शत्रुता को समाप्त कर दिया था. नेपोलियन युद्धों के दौरान, डेनमार्क फ्रांस के साथ था और नेपोलियन की हार के बाद, डेनमार्क को कील की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर होना पड़ा. युद्ध में हारे डेनमार्क ने नार्वे का नियंत्रण स्वीडन को सौंप दिया. जबकि डेनमार्क उसी नॉर्वे साम्राज्य में आने वाले ग्रीनलैंड सहित अटलांटिक द्वीप समूह अपने पास रखने में कामयाब रहा.

ग्रीनलैंड के लिए इस संधि का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह था कि इसके बाद ग्रीनलैंड नॉर्वे साम्राज्य से अलग हो गया. डेनमार्क ने यहां चालाकी दिखाई. वह नॉर्वे की मुख्य भूमि को स्वीडन को सौंपने के लिए मजबूर हो गया. लेकिन डेनमार्क वार्ताकारों ने बड़ी चालाकी से कील संधि में एक विशिष्ट खंड (अनुच्छेद IV) डाल दिया. इस अनुच्छेद ने "नॉर्वे पर निर्भर पुराने क्षेत्र" - ग्रीनलैंड, आइसलैंड और फ़रो द्वीप समूह को ट्रांसफर से बाहर कर दिया. यानी पूरा नॉर्वे पाने के बावजूद यह तीनों क्षेत्र स्वीडन को नहीं मिला.

इस संधि ने ग्रीनलैंड पर नॉर्वे साम्राज्य के 434 वर्षों को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया. इसके बाद ग्रीनलैंड एक प्रत्यक्ष डेनिश कॉलोनी (और बाद में एक स्वायत्त क्षेत्र) बन गया.

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