- पूरे जर्मनी की ट्रेनें एक साथ कम से कम ढाई घंटे के लिए रुक गईं और रात के वक्त हजारों यात्री स्टेशनों पर फंस गए
- ऐसा रेलवे की संचार प्रणाली यानी कम्युनिकेशन सिस्टम में आई एक तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ
- इसी सिस्टम का इस्तेमाल रेलवे नेटवर्क के अंदरूनी संचार यानी जानकारी को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है
जर्मनी की रेल व्यवस्था अचानक थम गई. पूरे देश की ट्रेनें एक साथ कम से कम ढाई घंटे के लिए रुक गईं और रात के वक्त हजारों यात्री स्टेशनों पर फंस गए. सभी इंक्वायरी काउंटरों पर लंबी कतारें लग गईं. कुछ घंटों के लिए ऐसा लगा मानो यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का रेलवे नेटवर्क ठहर गया हो. वजह कोई दुर्घटना या हड़ताल नहीं, बल्कि रेलवे की संचार प्रणाली यानी कम्युनिकेशन सिस्टम में आई एक तकनीकी गड़बड़ी थी, जिसने पूरे देश में रेल सेवाओं को प्रभावित कर दिया.
एपी की रिपोर्ट के अनुसार देश की मुख्य रेलवे कंपनी डॉयचे बान ने इस समस्या की पहली जानकारी देने के लगभग ढाई घंटे बाद, रात करीब 1 बजे कहा कि दिक्कत दूर कर ली गई है और फिर ट्रेनें धीरे-धीरे फिर शुरू की गईं.
आखिर ऐसा हुआ क्यों?
कंपनी ने बताया कि पूरे देश में GSM-R डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में समस्या आ गई थी. इसी सिस्टम का इस्तेमाल रेलवे नेटवर्क के अंदरूनी संचार यानी जानकारी को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है. बिना इसके ट्रेनों को चलाना असंभव है क्योंकि उस केस में टक्कर टाला नहीं जा सकता. बाद में कंपनी ने कहा कि समस्या का कारण पता लगा लिया गया है, लेकिन यह नहीं बताया कि वह कारण क्या था.
बिल्ड अखबार के अनुसार, डॉयचे बान की प्रमुख एवलिन पाला ने कहा कि वे इमरजेंसी सिस्टम की मदद से स्थिति को स्थिर करने में सफल रहे.
इस दौरान लोगों को हर सुविधा दी गई
जब ट्रेनें रुकी थीं, उस दौरान डॉयचे बान ने कहा कि वह यात्रियों को टैक्सी और होटल वाउचर दे रही है. जहां संभव था, वहां स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनों को यात्रियों के बैठने के लिए जगह उपलब्ध कराया गया. कंपनी ने इस स्थिति के लिए माफी भी मांगी. बाद में कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि तकनीकी गड़बड़ी दूर कर ली गई है और सेवाएं फिर शुरू हो रही हैं. लेकिन साथ ही कहा कि यात्रियों को कुछ समय तक ट्रेनों के संचालन में बाधा आ सकती है.
एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार कई दशकों तक पर्याप्त निवेश न होने के कारण जर्मनी की रेल व्यवस्था पुरानी हो गई है और ट्रेनें अक्सर देर से चलती हैं. अब जर्मनी बड़े सरकारी निवेश के जरिए अपने पुराने रेल नेटवर्क को तेजी से आधुनिक बनाने की कोशिश कर रहा है.
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