- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर फोन पर चर्चा की
- दोनों नेताओं ने होर्मुज में सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को तुरंत बहाल करने की आवश्यकता पर सहमति जताई
- बातचीत के दौरान क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए आपसी सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया गया
मिडिल ईस्ट के तनाव (Middle East Crisis) ने दुनियाभर की सिरदर्दी बढ़ा रखी है. इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी को फोन किया. फोन पर पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पीएम मोदी से बात हुई. इस दौरान दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और जहाजों के लिए तुरंत खोलने की जरूर पर सहमति जताई और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग जारी रखने का भरोसा दोहराया.
Received a phone call from my dear friend President Emmanuel Macron. We discussed the situation in West Asia and agreed on the need to urgently restore safety and freedom of navigation in the Strait of Hormuz.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 16, 2026
We will continue our close cooperation to advance peace and stability…
मैक्रों और पीएम मोदी में हुई क्या बात
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए लिखा कि मेरे प्रिय मित्र, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का फ़ोन आया. इस दौरान हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को तत्काल बहाल करने की आवश्यकता है. इसके साथ ही इस बात पर जोर दिया कि हम इस क्षेत्र और उससे बाहर भी शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अपना घनिष्ठ सहयोग जारी रखेंगे.
ये भी पढ़ें : अमेरिका ने ईरान को फिर दी धमकी, कहा - डील पर नहीं माने तो होगा पहले से भी ज्यादा खतरनाक हमला
होर्मुज की वजह से तेल और गैस का संकट
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से दुनियाभर में तेल और गैस संकट खड़ा हो गया है. क्योंकि यहां से जहाजों की आवाजाही नियमित रूप से नहीं हो पा रही है. ईरान का करीबी सहयोगी और उसके तेल का सबसे बड़ा आयातक चीन भी अमेरिकी नाकेबंदी से बढ़ते ऊर्जा संकट को लेकर चिंतित है. इस नाकेबंदी के कारण ईरान के बंदरगाहों से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है. होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल व्यापार होता है.
ये भी पढ़ें : चीन ने ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बगैर रोक-टोक जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने को कहा
होर्मजु खोलने की मशक्कत
इस जलडमरूमध्य को खोलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रमुख मांगों में से एक है, इसके साथ ही वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की भी मांग कर रहे हैं. इससे पहले सप्ताहांत में इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता का पहला दौर स्थायी समाधान के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे जटिल मुद्दों पर मतभेद बने रहने के कारण कोई समझौता नहीं हो सका. इसके बाद अमेरिका ने नाकेबंदी लागू की. चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अमेरिकी नाकेबंदी की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘‘खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना'' बताया और कहा कि इससे तनाव बढ़ने तथा नाजुक युद्धविराम कमजोर पड़ने का खतरा है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं