वेनेजुएला के तानाशाह निकोलस मादुरो की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी पर वैश्विक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है. इस कड़ी में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया दी. मैक्रों ने मादुरो की सत्ता से विदाई का स्वागत तो किया, लेकिन जिस 'तरीके' से अमेरिका ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, उस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
'नतीजा सही, पर तरीका गलत'
कैबिनेट बैठक को संबोधित करते हुए मैक्रों ने स्पष्ट किया कि निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए अमेरिका द्वारा इस्तेमाल की गई विधि का फ्रांस 'न तो समर्थन करता है और न ही उसे मंजूरी देता है'. सरकार की प्रवक्ता मौड ब्रेगन ने फ्रांस 24 के हवाले से बताया कि मैक्रों ने मादुरो को एक 'तानाशाह' करार दिया और कहा कि उनका जाना वेनेजुएला के लोगों के लिए 'अच्छी खबर' है. पेरिस का यह रुख दर्शाता है कि वह राजनीतिक परिणाम से तो सहमत है, लेकिन एक संप्रभु देश के भीतर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के अंतरराष्ट्रीय कानूनी पहलुओं को लेकर आशंकित है.
अमेरिकी ऑपरेशन और कानूनी चुनौतियां
अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के भीतर एक गुप्त प्री-डॉन ऑपरेशन चलाकर मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स को हिरासत में लिया था. ट्रंप प्रशासन के अनुसार, दोनों को न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जहां मादुरो पर नार्को-टेररिज्म, ड्रग तस्करी और हथियारों से संबंधित कई आरोप लगाए जाएंगे. सितंबर से अब तक इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य हमलों में 115 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जिसे लेकर कानूनी विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की चिंता जता रहे हैं.
इस विवाद को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने और हवा दे दी है जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला को तब तक 'चलाएगा' (Run) जब तक कि वहां सुरक्षित और उचित सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता. ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी तेल हितों को फिर से हासिल करने की बात भी कही है. हालांकि बाद में विदेश मंत्री रुबियो मार्को ने भी यही बात स्पष्ट की.
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