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कतर के पूर्व अमीर शेख हमद अल थानी का निधन, देश की तकदीर बदलने वाली थी शख्सियत

शेख हमद अल थानी ने कतर के अकूत तेल और गैस भंडार के दम पर लंदन के मशहूर 'हैरॉड्स' डिपार्टमेंट स्टोर को खरीदा और दुनिया भर में कतर की धाक जमाई.

कतर के पूर्व अमीर शेख हमद अल थानी का निधन, देश की तकदीर बदलने वाली थी शख्सियत
सैंडहर्स्ट की ब्रिटिश सैन्य अकादमी से पढ़े शेख हमद ने एक साधारण से खाड़ी देश को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है.
Amiri Diwan Handout

कतर को एक छोटे से रेगिस्तानी देश से निकालकर दुनिया के नक्शे पर कूटनीति, मीडिया और अर्थव्यवस्था का पावरहाउस बनाने वाले पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. 

कतर की सरकारी समाचार एजेंसी (QNA) ने उनके निधन की पुष्टि की है, हालांकि मौत की वजह का खुलासा नहीं किया गया है. शेख हमद की शख्यिसत को लेकर कतर में उनकी बहुत इज्जत है. उनके फैसलों की वजह से देश की तकदीर बदल गई. साल 2013 में खुद सत्ता छोड़कर अपने युवा बेटे को कमान सौंपकर पूरे अरब जगत को चौंका दिया था.

1995 में अपने पिता शेख खलीफा को बिना खून-खराबे के तख्तापलट में हटाकर सत्ता संभालने वाले शेख हमद ने 18 सालों तक कतर पर राज किया. जून 2013 में जब उन्होंने स्वेच्छा से गद्दी छोड़ी, तब तक वे कतर को दुनिया के सबसे अमीर और असरदार देशों में खड़ा कर चुके थे.

शासन के दौरान की अहम उपलब्धियां

शेख हमद ने अपने शासन के दौरान अंतरराष्ट्रीय न्यूज प्रसारक 'अल जज़ीरा' की नींव रखी. ये चैनल कतर की सरकार की तरफ से वित्तपोषित है. इसके अलावा उन्होंने लंदन के मशहूर 'हैरॉड्स' डिपार्टमेंट स्टोर को खरीदा और दुनिया भर में कतर की धाक जमाई.

पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) फुटबॉल क्लब में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की और कतर एयरवेज को एक वैश्विक एयरलाइन बनाया. इतना ही नहीं, 2022 फीफा विश्व कप की सफल मेजबानी का सेहरा भी उन्हीं के दूरदर्शी विचारों के सिर बंधता है.

डिप्लोमेसी में कतर को किया आगे

शेख हमद की विदेश नीति ने कतर को वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया. हालांकि, उनके फैसलों ने कई बार पश्चिमी और क्षेत्रीय सहयोगियों को असहज किया. एक तरफ जहां कतर ने 9/11 हमलों के बाद अमेरिकी सेना के मुख्य लॉजिस्टिक बेस की मेजबानी की. वहीं दूसरी तरफ तालिबान को दोहा में अपना दफ्तर खोलने की इजाजत दी थी.

उन्होंने गाजा में हमास, मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड और ईरान के साथ भी संबंध बनाए रखे. 2012 में वे गाजा पट्टी का दौरा करने वाले पहले राष्ट्राध्यक्ष बने थे. हालांकि, इजराइल के साथ भी उन्होंने शुरुआती दौर में व्यापारिक संबंध रखे थे. 

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