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बैग में मिली सिर कटी लाश... डेथ मिस्ट्री ने चौंकाया, आखिर में पता चला कि हत्या नहीं सुसाइड है

महिला का चेहरा गहरा बैंगनी पड़ चुका था और नाखून नीले थे, जो जहर के कारण दम घुटने के पक्के लक्षण थे. इसके अलावा, उसके शरीर से किसी भी तरह की नींद की गोली, शराब या नशीले पदार्थ के अंश नहीं मिले.

बैग में मिली सिर कटी लाश... डेथ मिस्ट्री ने चौंकाया, आखिर में पता चला कि हत्या नहीं सुसाइड है
शव पर मौत से पहले की चोट, सिर में फ्रैक्चर या किसी भी तरह के संघर्ष के निशान नहीं थे. (सांकेतिक तस्वीर)

साल 2019 में क्रिसमस के ठीक बाद दक्षिण चीन के गुआंगडोंग प्रांत में एक ग्रामीण को एक्सप्रेसवे के किनारे एक पीला सूटकेस लावारिस पड़ा मिला. जब उसने पास जाकर देखा, तो उसके होश उड़ गए. सूटकेस के भीतर एक महिला का बिना सिर का धड़ बंद था. पुलिस को सूचना दी गई और छानबीन के दौरान घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर एक लाल बैग भी मिला. इसके अंदर काले प्लास्टिक में लिपटा महिला का कटा हुआ सिर और कुछ कपड़े थे. इस खौफनाक मंजर को देखकर पहली नजर में यही लगा कि यह बेहद क्रूरता से किया गया मर्डर है.

लगभग सात साल बाद इस चौंकाने वाले मामले की पूरी सच्चाई एक फॉरेंसिक साइंस जर्नल 'गुआंगडोंग पुलिस साइंस एंड टेक्नोलॉजी' में प्रकाशित एक शोध पत्र के जरिए सामने आई है. इस मिस्ट्री का जो नतीजा चीनी फॉरेंसिक टीम ने निकाला, उसने सबको हैरान कर दिया. पुलिस जांच और वैज्ञानिक सबूतों ने यह साबित कर दिया कि महिला की हत्या नहीं हुई थी, बल्कि उसने खुदकुशी की थी.

फॉरेंसिक जांच में हुआ बड़ा खुलासा

शव की हालत को देखकर पुलिस ने तुरंत इलाके को सील कर दिया था. फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने जब पीले सूटकेस की जांच की, तो उस पर रगड़ के गहरे निशान थे और उसका हैंडल टूटा हुआ था. इससे साफ था कि शव को किसी चलती गाड़ी से नीचे फेंका गया था. शव की पहचान करीब 27 वर्षीय महिला के तौर पर हुई. फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट्स ने जब शव के हिस्सों को जोड़कर जांच शुरू की, तो उन्हें कुछ ऐसे सुराग मिले जिन्होंने पूरी कहानी ही पलट दी.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, गर्दन और जांघों पर काटने के गहरे निशान थे, लेकिन घावों के किनारे बेहद साफ और चिकने थे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन घावों से न तो बहुत ज्यादा खून बहा था और न ही शरीर की तरफ से कोई जीवित प्रतिक्रिया हुई थी. फॉरेंसिक साइंस में यह इस बात का पुख्ता सबूत होता है कि चोटें मौत के बाद यानी 'पोस्टमॉर्टम' के दौरान आईं थीं. इसका मतलब साफ था कि जब महिला के शरीर के टुकड़े किए गए, तब तक उसकी जान जा चुकी थी.

जहर के सुराग ने बदली जांच की दिशा

चूंकि शव पर मौत से पहले की चोट, सिर में फ्रैक्चर या किसी भी तरह के संघर्ष के निशान नहीं थे, इसलिए फॉरेंसिक टीम ने टॉक्सिकोलॉजी का सहारा लिया. लैब एनालिसिस में महिला के पेट, खून और लिवर के सैंपल में 'बिसुलटैप' नाम का एक कृषि कीटनाशक पाया गया. इस खतरनाक कीटनाशक की भारी मात्रा शरीर में जाने से सांस की मांसपेशियां पैरालाइज हो जाती हैं और दम घुटने से मौत हो जाती है.

फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि 'बिसुलटैप' की गंध इतनी तेज और तीखी होती है कि इसे किसी को उसकी मर्जी के बिना धोखे से खिलाना नामुमकिन है. चूंकि महिला को बांधने या जबरदस्ती करने के कोई सबूत नहीं थे, इसलिए मर्डर की थ्योरी खारिज हो गई.

पुलिस ने सुलझा ली मर्डर मिस्ट्री

फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद पुलिस ने जब कड़ियों को जोड़ा, तो पूरी कहानी शीशे की तरह साफ हो गई. 'नानफांग डेली' की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतका की पहचान हुनान प्रांत की रहने वाली 'पैन' के तौर पर हुई. दरअसल, पैन का अपने पति से घरेलू विवाद हुआ था. इसके बाद उसने आत्महत्या की धमकी दी थी. पति जब काम पर चला गया, तो पैन ने गुस्से और डिप्रेशन में आकर कीटनाशक पी लिया. शाम को जब पति घर लौटा, तो पत्नी मृत पड़ी थी और पास में कीटनाशक की बोतल थी.

पत्नी की लाश देखकर पति बुरी तरह डर गया. उसे लगा कि पैन के मायके वाले और पुलिस इस मौत के लिए उसी को जिम्मेदार ठहराएंगे. इसी घबराहट और बदनामी के डर से उसने एक खौफनाक फैसला लिया. वह बाजार गया और एक चाकू, नया सूटकेस और नायलॉन के बैग खरीद लाया. उसने किराए के फ्लैट के बाथरूम में पत्नी की लाश के टुकड़े किए, उन्हें बैग्स में पैक किया और अपनी कार से हुनान से गुआंगडोंग की तरफ निकल गया. फिर उसने शव को एक्सप्रेसवे के किनारे फेंक दिया. आखिर में कोर्ट ने पति को शव को क्षत-विक्षत करने के आरोप में ढाई साल की सजा सुनाई है. 

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