- 19 साल बाद हमास ने गाजा की गवर्निंग बॉडी भंग की, लेकिन हथियार छोड़ने पर अब भी सहमति नहीं.
- नई समिति प्रशासन संभालेगी, मगर हथियार अब भी हमास के पास ही रहेगा. इसे सौंपने के लिए उसने शर्त रखी है.
- विशेषज्ञों के मुताबिक यह बड़ा राजनीतिक संकेत है, लेकिन गाजा की असली सत्ता का सवाल अभी बाकी है.
7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला कर हमास ने करीब 1200 लोगों को मार डाला और 251 लोगों को बंधक बना लिया. नतीजा, गाजा में इजरायल ने बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया, जिसमें हजारों की संख्या में फिलिस्तीनी मारे गए. फिर पिछले साल अक्तूबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से युद्धविराम समझौता किया गया तो शुरू हुई इजरायली बंधकों की रिहाई और हमास के कैदियों और बंदियों की मुक्ति का सिलसिला, लेकिन अब अचानक हमास ने एक बड़ा राजनीतिक फैसला लिया है. उसने अपनी गवर्निंग बॉडी को भंग करने का एलान कर दिया है. इससे पूरे मध्य-पूर्व की राजनीति में हलचल पैदा हो गई है. पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि हमास अब सत्ता छोड़ रहा है, लेकिन असली तस्वीर इससे कहीं ज्यादा जटिल है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गाजा के मौजूदा हालात को मानव निर्मित भुखमरी कहा है
बता दें कि हमास गाजा पट्टी में मौजूद एक सशस्त्र फिलिस्तीनी समूह और राजनीतिक आंदोलन है. गाजा के 30 से 40 फीसद क्षेत्र पर इसी हमास का नियंत्रण है. हालांकि इसे अमेरिका, ब्रिटेन, इजरायल और कई अन्य देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है.
हमास के इस फैसले के बाद अब गाजा का नागरिक प्रशासन संभालने की जिम्मेदारी नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) को देने की बात कही गई है.
हमास ने ऐसा क्यों किया?
हमास का कहना है कि वह गाजा के प्रशासन से पीछे हट रहा है ताकि इजरायल के पास सैन्य कार्रवाई जारी रखने का कोई बहाना न रहे. इसके अलावा गाजा में युद्ध के बाद प्रशासन को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा था. युद्धविराम (सीजफायर) के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने के लिए भी यह कदम जरूरी माना जा रहा है. वो दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है.

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क्या हमास की सत्ता खत्म हो गई?
इसका सीधा जवाब है- नहीं. यही सबसे बड़ा सवाल भी है. हमास प्रशासन छोड़ने की बात तो कर रहा है, लेकिन अपने हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि असली विवाद सत्ता नहीं, बल्कि हथियारों पर नियंत्रण को लेकर है. यानी सरकार कोई और चला सकता है, लेकिन अगर हथियार हमास के पास ही रहेंगे तो उसका प्रभाव बना रहेगा.
NCAG क्या है जिसके हाथ में गाजा का प्रशासन सौंप रहा है हमास?
संयुक्त राष्ट्र से समर्थित और अमेरिका की मध्यस्थता वाली शांति योजना के तहत गठित यह समिति तकनीकी विशेषज्ञों (टेक्नोक्रेट्स) की है और इसका मकसद रोजमर्रा का प्रशासन चलाना है, न कि राजनीतिक शासन करना. इसका गठन 2025 में युद्धविराम के बाद किया गया था. इसका उद्देश्य गाजा में बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी नागरिक सेवाएं चलाना, पुनर्निर्माण की निगरानी करना और प्रशासन को राजनीतिक संगठनों से अलग रखना है.

हमास
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हालांकि अंग्रेजी अखबार 'द गार्जियन' के मुताबिक इस समिति के 13 सदस्य जनवरी में साथ आने के बावजूद अभी काहिरा (मिस्र) में ही रुके हुए हैं और गाजा में अब तक अपने प्रवेश की राह देख रहे हैं. दरअसल, बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने उन्हें गाजा में घुसने से रोक रखा है.
NCAG और मध्यस्थ देशों (कतर, मिस्र, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात) का कहना है कि गाजा में सभी हथियार एक ही सरकारी व्यवस्था के अधीन होने चाहिए. और यही यहां सबसे बड़ा विवाद का विषय भी बना हुआ है. यह विवाद एक सरकार, एक कानून और एक हथियार को लेकर है.
हमास ने साफ कर दिया है कि वह अपने हथियार तब तक नहीं छोड़ेगा, जब तक इजरायल गाजा पट्टी के 60% से अधिक हिस्से से अपना नियंत्रण नहीं हटाता. हमास का कहना है कि पहले गाजा में एक मान्य फिलिस्तीनी प्रशासन बने, उसके बाद ही वह हथियारों पर चर्चा करेगा.

बेंजामिन नेतन्याहू
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इजरायल का क्या रुख है?
इजरायल दो बातों पर अड़ा हुआ है. उसका कहना है कि हमास दोबारा गाजा की सत्ता में नहीं लौटना चाहिए . साथ ही वह यह भी चाहता है कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी को भी सीधे गाजा का नियंत्रण नहीं दिया जाना चाहिए. इसका मतलब ये भी हुआ कि हमास की गवर्निंग बॉडी के भंग होने के बाद गाजा पर शासन कौन करेगा, इस पर सहमति अभी तक नहीं बन सकी है.
क्या युद्धविराम पर असर पड़ेगा?
जानकारों का मानना है कि प्रशासनिक बदलाव सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन जब तक हथियारों का मुद्दा नहीं सुलझता, तब तक युद्धविराम का दूसरा चरण आगे बढ़ना मुश्किल रहेगा.
मान लीजिए किसी संस्था का मैनेजर इस्तीफा दे देता है, लेकिन संस्था की चाबियां, सुरक्षा और पूरा नियंत्रण उसके पास ही रहता है. ऐसे में नया मैनेजर पूरी तरह काम नहीं कर पाएगा. गाजा की स्थिति फिलहाल कुछ ऐसी ही है.
हमास का यह फैसला राजनीतिक रूप से बड़ा कदम माना जा रहा है. इससे यह मैसेज भी जाता है कि वो भले ही हमास प्रशासन से पीछे हटने को तैयार है, पर जब तक हथियारों का नियंत्रण और गाजा की सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की सरकार पर सहमति नहीं बनती तब तक फैसले से बड़ा जमीनी बदलाव होने की संभावना नगण्य है.
एक्सपर्ट्स की राय
गाजा के राजनीतिक विश्लेषक पूर्व प्रोफेसर मखाइमर अबुसादा के न्यूज एजेंसी एएफपी पर छपे बयान के मुताबिक, "हमास का यह कदम प्रतीकात्मक ज्यादा दिखता है. असली समस्या सरकार को भंग करने की नहीं है बल्कि हथियार छोड़ने पर सहमति की है. जब तक हमास हथियार नहीं छोड़ेगा, तब तक गतिरोध की स्थिति बनी रहेगी."
यानी सबसे बड़ा सवाल अब भी हमास के हथियार ही हैं, केवल प्रशासन छोड़ देने से हालात नहीं बदलेंगे.
काहिरा वार्ता में शामिल एक राजनयिक सूत्र के मुताबिक, "हमास के नजरिए से यह फैसला कई मकसद पूरे करता है. एक तरफ वो यह दिखाना चाहता है कि शांति प्रक्रिया को वो आगे बढ़ा रहा है, साथ ही वह दूसरी तरफ इजराइल पर भी अपने वादे पूरे करने का दबाव बना रहा है."
वहीं NCAG के प्रमुख अली शाअत न्यूज एजेंसी एएफपी से बात में कहते हैं, "समिति गाजा की जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार है, लेकिन इसकी सफलता के लिए एक सरकार, एक कानून और एक सशस्त्र बल का होना जरूरी है."
वे कहते हैं कि नई व्यवस्था तभी सफल होगी जब पूरे गाजा में सुरक्षा और हथियारों पर एक ही निकाय का नियंत्रण होगा.
यानी जानकारों की राय में हमास के इस फैसले के बावजूद हथियारों पर नियंत्रण का मुद्दा जब तक नहीं सुलझता, इसे गाजा में वास्तविक सत्ता परिवर्तन नहीं माना जा सकता है.
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