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IIT, IIM और UPSC से सीखिए, पेपर लीक रोकने के क्या हैं सबसे सटीक मॉडल

Paper Leak Law : भारत में IIT, IIM और UPSC ने पिछली घटनाओं से सबक लेकर कंप्यूटर आधारित परीक्षा, कड़ी गोपनीयता और बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र विकसित किया है, जिससे देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी हुई है.

IIT, IIM और UPSC से सीखिए, पेपर लीक रोकने के क्या हैं सबसे सटीक मॉडल
इस आर्टिकल में हम IIT,IIM,UPSC परीक्षाओं को पेपर लीक प्रूफ बनाने के लिए क्या स्ट्रेटजी अपनाती है, बताएंगे.

Exam Leak Prevention : 2024 और फिर 2026... देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) का लगातार पेपर लीक होने से देश में आक्रोश पैदा हो गया. इससे लाखों बच्चों का भविष्य प्रभावित हुआ. यही नहीं कई बच्चे दोबारा पेपर देने के दबाव को झेल नहीं पाए और आत्महत्या जैसा बड़ा कदम भी उठा लिया. सिर्फ नीट पेपर ही नहीं और भी कई परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं और धांधली से लोगों का विश्वास शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर डगमगाने लगा. धीरे-धीरे इस अविश्वास ने आंदोलन का रूप ले लिया. और 16 मई को स्थापित कॉरकोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग लेकर धरना प्रदर्शन करने का एलान कर दिया. इस प्रदर्शन ने पूरे देश में चिंगारी लगा दी. जिसका परिणाम यह हुआ कि देश के कोने-कोने से लाखों युवाओं ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया और अपनी मांग को लेकर डंटे रहे. यह प्रदर्शन 36 दिन तक चला. 

इस दौरान छात्रों, सीजेपी और सरकार के बीच बड़ा संघर्ष चला. कई बार बैठकें हुईं. लेकिन छात्रों ने ठान ली थी की सरकार अब ठोस कदम उठाए और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. आखिर में 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान को अपने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया. जिसके कुछ घंटे बाद नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी होंगे, इसका भी एलान सरकार ने कर दिया. साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा पेपर लीक को रोकने के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा कर दी गई. जिसकी अध्यक्षता नंदन नीलकेणी करेंगे, इसकी भी जानकारी पीएम मोदी ने दी. 

सब मिलाकर सरकार ने पूरी कमर कस ली है कि भविष्य में पेपर लीक जैसा मामला दोबारा न हो. लेकिन इन सब घटनाओं के बीच एक बात दिमाग में लोगों के आती है कि आईआईटी,आईआईएम और यूपीएससी जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक क्यों नहीं होते हैं. आखिर ये किस मॉडल को फॉलो करते हैं. जिससे इनकी गोपनीयता और पारदर्शिता कायम है. इसके अलावा चीन में होने वाली दुनिया की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा गाओकाओ का पेपर लीक क्यों नहीं होता?

आज के इस आर्टिकल में हम इन परीक्षाओं की केस स्टडी से समझाएंगे आखिर...इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं का पेपर लीक प्रूफ मॉडल इनका इतना सख्त कैसे है- 


केस 1: IIT पेपर लीक

1997 में, IITs के लिए एक बड़ी शर्मनाक घटना हुई जब एंट्रेंस टेस्ट से कुछ घंटे पहले ही प्रश्न पत्र लीक हो गए. उस समय परीक्षा पेन और पेपर आधारित होती थी, जिसे रद्द करना पड़ा और बाद में दोबारा आयोजित करना पड़ा.

तब से, JEE में कई बदलाव हुए हैं:

परीक्षा सीबीटी मोड
  • अब पेपर पूरी तरह से कंप्यूटर-आधारित होते हैं, जिससे इंसानी दखल कम हो गई है
  • JEE (मेन्स) के लिए, IITs मुख्य रूप से प्रश्न तैयार करने के चरण में शामिल होते हैं, बाकी प्रक्रियाएं NTA द्वारा संभाली जाती हैं.
  • लेकिन JEE (एडवांस्ड) के लिए, IITs पूरी परीक्षा प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं, जो लगभग एक साल पहले हर संस्थान में JEE चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के नामांकन के साथ शुरू होती है.
7 पुराने IITs की होता है अहम भूमिका
  • सात पुराने IITs की भूमिका अहम होती है और वे बारी-बारी से मुख्य आयोजक बनते हैं.
  • IITs यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत सावधानी बरतते हैं कि प्रश्न पत्र पूरी गोपनीयता के साथ तैयार किए जाएं
  • अलग-अलग शहरों में हर विषय के लिए प्रश्नों के अलग-अलग सेट तैयार करने का काम करते हैं
  • हर समूह में पुराने IITs के फैकल्टी सदस्य होते हैं
  • ये समूह हर साल नए सिरे से बनाए जाते हैं
  • प्रश्न पत्रों के सेट JEE चेयरमैन को सौंपे जाते हैं, जिनके पास ही सारी जानकारी होती है

 
केस 2: IIM पेपर लीक

CAT 2003 के पेपर लीक होने के बाद भारत की प्रमुख मैनेजमेंट एंट्रेंस परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे थे. परीक्षा रद्द कर दी गई और महीनों बाद दोबारा परीक्षा आयोजित की गई.

इसके बाद IIM ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई कदम उठाए

IIMs पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं.

सीनियर फैकल्टी रखते हैं निगरानी
  • सीनियर फैकल्टी मेंबर्स व्यक्तिगत रूप से प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था की निगरानी करते हैं.
  • IIMs ने प्रश्न पत्र प्रिंटिंग के नियमों को सख्त किया, स्टेकहोल्डर्स के लिए जानकारी तक पहुंच कम की और आखिरकार 2009 में CAT को कंप्यूटर-आधारित फॉर्मेट में बदल दिया.
हर साल रोटेशन
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIMs) हर साल रोटेशन के आधार पर कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) आयोजित करते हैं
  • हर साल एक पुराने IIM को नोटिफिकेशन जारी करने और एप्लीकेशन प्रोसेस से लेकर परीक्षा तक, पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को संभालने के लिए नियुक्त किया जाता है.
  • इस पेपर में तीन अलग-अलग सेक्शन होते हैं और CAT परीक्षा के लिए अलग-अलग टेस्टिंग स्लॉट के हिसाब से एक सुरक्षित डेटाबेस से सवाल चुनकर पेपर तैयार किए जाते हैं.
  • सेंटर पर सुरक्षित सर्वर और इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने से हैकिंग जैसी घटनाओं की संभावना खत्म हो जाती है.
  • परीक्षा का संचालन करने वाले सीनियर प्रोफेसर यह पक्का करते हैं कि प्रक्रिया सुचारू रूप से चले और कोई गड़बड़ी न हो.

 केस 3: UPSC

गोपनीयता है कायम

UPSC ने काफी हद तक गोपनीयता और प्रक्रिया की ईमानदारी बनाए रखी है. यूपीएससी (UPSC) ने सख्ती, तय प्रोटोकॉल और संस्थागत मर्यादा कायम की है, जिससे परीक्षा प्रक्रिया से छेड़छाड़ की कोई भी कोशिश बहुत मुश्किल हो जाती है. बता दें कि अकेले सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के लिए हर साल लगभग दस लाख उम्मीदवार आवेदन करते हैं. इसके अलावा, आयोग इंजीनियरिंग सेवाओं, कंबाइंड मेडिकल सेवाओं, NDA, CDS, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) और अन्य भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करता है.

कई चरणों में होती है परीक्षा

UPSC में पेपर लीक का खतरा कम होने का एक कारण यह है कि इसकी ज़्यादातर प्रमुख परीक्षाएं कई चरणों में आयोजित की जाती हैं. जिसके कारण किसी भी तरह की गड़बड़ी करना और भी मुश्किल हो जाता है.  वहीं, प्रश्न पत्र तैयार करने का काम विशेषज्ञों के एक सख्त टीम की निगरानी में तैयार किया जाता है. बता दें कि यूपीएससी का पेपर अलग-अलग एक्सपर्ट्स स्वतंत्र रूप से सवाल तैयार करते हैं.

मॉडरेटर और पेपर सेटर सख्त गोपनीयता के तहत काम करते हैं और वे ही उन सवालों के पूल से प्रश्न पत्र तैयार करते हैं. प्रक्रिया तक कम लोगों की पहुंच होने से यह अधिक सुरक्षित हो जाती है.

विदेशों में पेपर लीक प्रूफ मॉडल

चीन का पेपर लीक प्रूफ मॉडल

चीन डेली की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सरकार 'गाओकाओ' (Gaokao) परीक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला मानती है. नवंबर 2015 और अप्रैल 2024 के बीच 11,000 से ज्यादा लोगों को सजा दी गई. बता दें कि यहां नकल करते पकड़े जाने पर उम्मीदवारों को सजा हो सकती है, जिसमें परीक्षा के स्कोर रद्द होना या भविष्य की परीक्षाओं से निलंबित किया जाना शामिल है.

दक्षिण कोरियापेपर लीक प्रूफ मॉडल

CSAT/सुनेउंग (Suneung) परीक्षा को कड़ी सुरक्षा के साथ राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जाता है. यही नहीं पेपर तैयार करने वालों को एक गुप्त और अज्ञात जगह पर ले जाया जाता है, जहां वे बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे रहते हैं. यह तब तक चलता है जब तक परीक्षा आधिकारिक तौर पर खत्म न हो जाए.

यूके (UK) पेपर लीक प्रूफ मॉडल

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