
मिस्र की एक अदालत ने शनिवार को अपदस्थ राष्ट्रपति होस्नी मुबारक और उनके शीर्ष सहयोगियों को 2011 के जनवरी माह में हुए क्रांतिकारी विद्रोह के दौरान प्रदर्शनकारियों की हत्या करने से जुड़े मामले में बरी कर दिया।
समाचार पत्र 'अल अहराम' की रिपोर्ट के अनुसार, काहिरा की अपराध अदालत में मुबारक के खिलाफ मुकदमा चल रहा है, जिसमें मुबारक सहित उनके कार्यकाल के दौरान आंतरिक मामलों के मंत्री रहे हबीब अल-अदली एवं उनके छह अन्य सहयोगियों पर प्रदर्शनकारियों की हत्या में संलिप्तता का आरोप था।
जनवरी, 2011 के दौरान मिस्र में हुए विद्रोह के कारण 30 वर्ष से सत्ता पर काबिज मुबारक को सत्ता गंवानी पड़ी थी।
मुबारक और उनके सहयोगियों को जून 2012 में दोषी करार दिया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
मामले में आए इस फैसले को हालांकि सफलतापूर्वक चुनौती दी गई और अप्रैल 2013 में इस पर फिर से सुनवाई शुरू हुई।
मुबारक, उनके दोनों बेटो -अला और गमाल- के साथ ही अल-अदली भी अदालत पहुंचे। अला और गमाल भी इस मामले में अभियुक्त थे, लेकिन उनके खिलाफ सिर्फ भ्रष्टाचार का आरोप था।
मुबारक (86) फिलहाल सार्वजनिक धन के गबन के अपराध में अलग से तीन साल कारावास की सजा काट रहे हैं।
काहिरा के दक्षिणी बाहरी इलाके में स्थित एक सैन्य अस्पताल में मुबारक अपनी सजा काट रहे हैं और अपनी अधिकांश सजा अब तक उन्होंने वहीं काटी है।
अल-अदली को भी मई 2011 में काला धन इकट्ठा करने और मुनाफाखोरी का दोषी पाया गया था, जिसके लिए उन्हें 12 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है।
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