- हरियाणा के सूरजकुंड में 39वां अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला ‘लोकल टू ग्लोबल’ थीम पर आयोजित हो रहा है
- मेले का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी उपस्थित थे
- मेले में 50 से अधिक देशों के लगभग 700 प्रतिभागी शामिल हैं, जो इसकी वैश्विक स्वीकृति को दर्शाता है
हरियाणा के सूरजकुंड में आज 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला-2026 की शुरुआत हुई. ‘लोकल टू ग्लोबल, आत्मनिर्भर भारत की पहचान' थीम पर आधारित इस मेले का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे. 31 जनवरी से 15 फरवरी तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय मेले में 50 से ज़्यादा देशों और 700 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी है. शिल्प, लोककला और संस्कृति के इस उत्सव में इस बार भारत की विविधता के साथ वैश्विक रंग भी साफ नजर आ रहे हैं.

उपराष्ट्रपति बोले– ‘वसुधैव कुटुंबकम' की जीवंत मिसाल है सूरजकुंड
उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला दशकों से भारत की सांस्कृतिक आत्मा और सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक रहा है. उन्होंने कहा कि यह मेला ‘वसुधैव कुटुंबकम' के भारतीय दर्शन को साकार करता है, जहां पूरी दुनिया एक परिवार की तरह एक मंच पर आती है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की सोच में कारीगरों की भूमिका बेहद अहम है और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जैसे प्रयास पारंपरिक शिल्पकारों को कौशल, बाज़ार और आर्थिक सशक्तिकरण दे रहे हैं.

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी: लोकल को ग्लोबल बनाना ही आत्मनिर्भरता
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेला हमारी प्राचीन विरासत और आधुनिक सोच का संगम है. उन्होंने कहा कि ‘लोकल टू ग्लोबल' की थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन को ज़मीन पर उतारती है, जहां गांव-कस्बों के कारीगरों का हुनर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंच रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और पहचान पर गर्व का नाम है.

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मिस्र पार्टनर कंट्री, यूपी और मेघालय थीम स्टेट
इस वर्ष मेले में मिस्र पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मिस्र और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताओं के वाहक हैं और यह सांस्कृतिक साझेदारी देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करती है. साथ ही उत्तर प्रदेश और मेघालय थीम स्टेट के रूप में मेले में अपनी विशिष्ट लोक-संस्कृति और शिल्प परंपराओं की झलक पेश कर रहे हैं.

शिल्प के साथ संगीत और संस्कृति का महोत्सव
सूरजकुंड मेला इस बार सिर्फ शिल्प तक सीमित नहीं है. मुख्य चौपाल और महा स्टेज पर हर शाम लोक, बॉलीवुड, सूफी, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और हास्य की प्रस्तुतियां होंगी. देश-विदेश के नामचीन कलाकार मेले की सांस्कृतिक संध्याओं को खास बनाएंगे.

50+ देशों की मौजूदगी, बढ़ता वैश्विक भरोसा
हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड शिल्प मेले के प्रति अंतरराष्ट्रीय भरोसा लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष 50 से अधिक देशों के करीब 700 प्रतिभागी मेले में शामिल हुए हैं, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है.

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करीब 15 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद
आयोजकों के मुताबिक, पिछले वर्ष की तरह इस बार भी 15 लाख से ज़्यादा पर्यटकों के मेले में पहुंचने की उम्मीद है. सुरक्षा, परिवहन और सुविधाओं को लेकर व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं और दिल्ली मेट्रो को भी को-पार्टनर बनाया गया.

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