कायदे से कोई महिला या पुरुष कुछ भी पहने, दूसरों को उससे कोई मतलब नहीं होना चाहिए. लेकिन अमेरिका के एक बड़े इवेंट में पहनी गई एक ड्रेस ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. वजह यह थी कि इसे पहनने वाली कोई और नहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की पत्नी जेनिफर राउचेट थीं. यह मामला अब सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीति, सोच और नैतिकता तक पहुंच गया है. सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए- क्या सस्ते कपड़े पहनना गलत है? या फिर यह आम लोगों से जुड़ने का तरीका है? चलिए आपको बताते हैं कि बवाल क्यों मचा है.
दरअसल राउचेट अपने पति पीट हेगसेथ के साथ व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर में शामिल हुई थीं. इसी इवेंट में गोली चली थी और आरोपी पर राष्ट्रपति ट्रंप पर जानलेवा हमले की कोशिश का आरोप लगा है. इवेंट के बाद राउचेट की ड्रेस की तस्वीरें भी तेजी से वायरल हो गईं. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि उनकी ड्रेस काफी हद तक सस्ती ड्रेस जैसी दिखती है, जो चीन की फास्ट फैशन वेबसाइट्स जैसे शीन और टेमू पर मिलती है. द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी मिलती-जुलती ड्रेस ऑनलाइन 40 से 60 डॉलर के बीच बिक रही थीं.
So folks are melting down over Pete Hegseth's wife's dress she wore to the WHCD event.
— Jay Bee (@TheRealJBx) April 27, 2026
Apparently it's from Temu. If it were expensive, you'd call her privileged or something. But because it's supposedly from Temu you call her poor and cheap.
Never happy.
Who cares. She… pic.twitter.com/XqkjsWJ97u
'अमेरिका फर्स्ट' का नारा लगाने वाले की पत्नी 'मेड इन चाइना' पहन रही?
इस विवाद का मुख्य मुद्दा राजनीति से जुड़ा रहा. आलोचकों ने कहा कि सस्ती और दूसरे देश से आई (इम्पोर्टेड) ड्रेस पहनना “अमेरिका फर्स्ट” सोच के खिलाफ है. जिस ट्रंप सरकार में हेगसेथ मंत्री हैं, उसने तो 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा लगाकर टैरिफ वसूला है. खुद अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर तनाव चल रहा है.
इस पूरे मामले ने फास्ट फैशन पर भी बड़ी चर्चा शुरू कर दी। एक्सपर्ट्स ने बताया कि शीन और टेमू जैसी कंपनियों पर पहले भी मजदूरों की खराब हालत और पर्यावरण पर असर को लेकर सवाल उठते रहे हैं. इससे यह सवाल खड़ा होता है कि सस्ता सामान लेना सही है या जिम्मेदारी निभाना ज्यादा जरूरी है. यह घटना दिखाती है कि एक साधारण फैशन का फैसला भी राजनीतिक विवाद बन सकता है, जो लोगों की खरीदारी की आदतों और वैश्विक व्यापार को लेकर गहरे मतभेद को सामने लाता है.
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