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This Article is From Feb 14, 2026

रूस क्या ब्रिक्स को सैन्य गठबंधन में बदलना चाहता है? ईरान पर रूसी उप विदेश मंत्री का बड़ा संकेत

ब्रिक्स को 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने बनाया था, जिसमें दक्षिण अफ्रीका 2010 में शामिल हुआ था. बाद में मिस्र, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान भी इसमें शामिल हुए.

रूस क्या ब्रिक्स को सैन्य गठबंधन में बदलना चाहता है? ईरान पर रूसी उप विदेश मंत्री का बड़ा संकेत
2025 में ब्रिक्स का शिखर सम्मेलन ब्राजील में हुआ था.
  • रूस के उप विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स कोई सैन्य गठबंधन नहीं है और न मिलिट्री सहायता प्रदान करता है
  • रयाबकोव ने दक्षिण अफ्रीका में हाल ही में हुए नौसेना अभ्यास को ब्रिक्स इवेंट मानने से साफ इंकार किया है
  • रूस के उप विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स ईरान के साथ एकजुटता दिखा सकता है और मध्यस्थता को बढ़ावा देता है

रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने शनिवार को इस बात से इनकार किया कि ब्रिक्स आर्थिक ब्लॉक को सैन्य गठबंधन में बदलना चाहता है. रूस के सरकारी न्यूज एजेंसी तास को दिए एक इंटरव्यू में उपविदेश मंत्री रयाबकोव ने कहा कि ब्रिक्स न तो कोई सैन्य गठबंधन है और न ही आपसी मिलिट्री मदद की जिम्मेदारियों वाला कोई कलेक्टिव सुरक्षा संगठन.

तो नौसेना अभ्यास क्यों किया

रयाबकोव ने कहा, "इसे कभी उस भावना से नहीं सोचा गया था और ब्रिक्स को उस दिशा में बदलने की कोई योजना नहीं है." उन्होंने तर्क दिया कि 10 सदस्यों वाले ब्लॉक के पोर्टफोलियो में मिलिट्री एक्सरसाइज या हथियार कंट्रोल शामिल नहीं हैं. इतना ही नहीं, रयाबकोव ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में हुई नौसेना के अभ्यास को ब्रिक्स इवेंट मानने से इनकार किया. उन्होंने 9-16 जनवरी को हुई "विल फॉर पीस 2026" ड्रिल्स का जिक्र किया, जिसमें चीन, ईरान और रूस शामिल थे और कहा कि इसमें हिस्सा लेने वाले सदस्यों ने अपनी राष्ट्रीय हैसियत से ऐसा किया.

क्या टैंकरों को बचाएंगे

यह पूछे जाने पर कि क्या ब्रिक्स सदस्यों के टैंकरों को हमलों से बचा सकता है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, इसपर रयाबकोव ने कहा कि ब्लॉक में लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने और प्रतिबंधों से ज्यादा सुरक्षा सुनिश्चित करने के अलावा कोई क्षमता नहीं है और सुरक्षा दूसरे तरीकों से सुनिश्चित की जानी चाहिए.

बता दें, ब्रिक्स को 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने बनाया था, जिसमें दक्षिण अफ्रीका 2010 में शामिल हुआ था. बाद में मिस्र, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान भी इसमें शामिल हुए, जिससे समूह में 11 सदस्य हो गए. इसके साथ ही 10 साझेदार देश भी हो गए.

ईरान पर बड़ा संकेत

रूस के उप विदेश मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार की बढ़ोतरी वैश्विक एवरेज से काफी ज्यादा है. यह इस बात का संकेत है कि ब्रिक्स, बिना किसी जादू की छड़ी के, असल में समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है.”

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रयाबकोव ने कहा कि ब्रिक्स ईरान के साथ एकजुटता दिखा सकता है और उसे ऐसा करना चाहिए. रूस और चीन ईरान के संपर्क में हैं और तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बातचीत के लिए सही राजनीतिक माहौल पक्का करने पर काम कर रहे हैं. उपविदेश मंत्री के अनुसार, अब ब्रिक्स का फोकस अपने साझेदारों के साथ ईरान पर है. ईरान अमेरिकियों के साथ अप्रत्यक्ष रूप से, खासकर अरब की मध्यस्थता के जरिए, जो काम कर रहा है, वह जारी रहेगा.

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