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पीएम मोदी के इजरायल दौरे के दौरान इस खतरनाक ड्रोन डील पर मुहर तय! ऑपरेशन सिंदूर में की थी पाकिस्तान की जासूसी

ये ड्रोन 35000 फीट से अधिक की ऊंचाई से सीमा पर निगरानी कर सकते हैं. ये दुश्मन के रडार और विमान-रोधी मिसाइलों की नजर में नहीं आते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ये ड्रोन मिसाइलों से भी लैस होते हैं और लक्ष्य की खुद ही पहचान करने में सक्षम हैं.

पीएम मोदी के इजरायल दौरे के दौरान इस खतरनाक ड्रोन डील पर मुहर तय! ऑपरेशन सिंदूर में की थी पाकिस्तान की जासूसी
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल दौरे पर भारत-इजरायल के बीच एक बड़े डिफेंस डील पर मुहर लगने की संभावना है.
  • इसमें हेरॉन Mk II ड्रोन की और अधिक खरीद की संभावना भी जताई जा रही है.
  • ये वो ही ड्रोन हैं जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की जासूसी की थी.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐतिहासिक इजरायल दौरा रक्षा क्षेत्र में भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है. फरवरी 2026 में हो रही इस यात्रा का एक अहम एजेंडा सीमा पार सुरक्षा को अभेद्य बनाना है, जिसके लिए भारत और इजरायल के बीच एक मेगा डिफेंस डील पर मुहर लगने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक, इस डील में सबसे बड़ा आकर्षण मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही निर्मित होने वाले उन्नत ड्रोन और लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम हैं. 

चीन-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगी भारत की ताकत

इस दौरे के दौरान, भारतीय सशस्त्र बल, विशेष रूप से थल सेना और वायु सेना, इजरायल से अत्याधुनिक हेरॉन (Heron) सिरीज के ड्रोन के उन्नत वेरिएंट्स का सौदा तय हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में पहले से मौजूद हेरॉन-1 के बाद अब हेरॉन मार्क-2 (Heron Mk2) के सशस्त्र संस्करण की और अधिक खरीद पर चर्चा चल रही है, जो दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में सक्षम होंगे. 

आर्मी और एयर फोर्स पहले से ही हेरॉन Mk II ड्रोन चला रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर में इसके इस्तेमाल की बात सामने आई थी. तब इसे पाकिस्तान की जासूसी की लिए इस्तेमाल किया गया था. बीते दिनों मीडिया में सूत्रों के मुताबिक छपी खबरों के अनुसार अपनी ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सेना सैटेलाइट से जुड़े हेरॉन Mk II UAV की और अधिक खरीद चाहती है. लिहाजा इसके और ऑर्डर दिए गए हैं जबकि इंडियन नेवी पहली बार इन्हें ले रही है. नेवी लंबे समय से सर्विलांस के लिए इजरायल में ही बने सर्चर UAVs पर निर्भर रही है.

हेरॉन ड्रोन की खासियत

आखिर ऐसा क्या है हेरॉन Mk II UAV में कि इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के बनाए गए ये ड्रोन आधुनिक तकनीक का अजूबा माने जाते हैं. चलिए एक एक कर जानते हैं.

उड़ान क्षमता: ये ड्रोन लगातार 45 से 52 घंटे तक हवा में रह सकते हैं, जो लगातार निगरानी के लिए बेमिसाल है.

ऊंचाई: ये 35,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई से निगरानी कर सकते हैं, जिससे ये दुश्मन के रडार और विमान-रोधी मिसाइलों की सीमा से बाहर रहते हैं.

पेलोड क्षमता: ड्रोन अपने साथ जो कैमरे, रडार या जासूसी उपकरण लेकर उड़ते हैं, उन्हें पेलोड कहते हैं. Heron Mk2 लगभग 490 किलोग्राम से अधिक की पेलोड ले जा सकता है.

अत्याधुनिक सेंसरः इस ड्रोन में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रा-रेड सेंसर मौजूद हैं. ये सेंसर एक साथ मिलकर ड्रोन को दिन-रात देखने की क्षमता देते हैं. इसमें लेजर डेसिग्नेटर भी है. इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रा-रेड सेंसर के साथ मिलकर लेजर डेसिग्नेटर ड्रोन को एक शक्तिशाली निगरानी और सटीक हमला करने वाला प्लेटफॉर्म बनाता है. इसमें लगे सेंसर किसी वस्तु से निकलने वाली गर्मी से उसकी मौजूदगी का पता लगाने में सक्षम है. रात का अंधेरा हो या घना कोहरा, ये छिपे इंसानों या वाहनों का पता लगाने में सक्षम हैं.

स्टैंडऑफ क्षमताः हेरॉन MK II की एक खास बात इसकी स्टैंडऑफ कैपेबिलिटी है. यह कई किलोमीटर दूर से भी इंटेलिजेंस इकट्ठा करने की सुविधा देता है. इसके लिए इसे बॉर्डर पार करने की जरूरत भी नहीं होती. बता दें कि स्टैंडऑफ क्षमता दुश्मन के एयर डिफेंस या जवाबी फायरिंग की रेंज से बाहर रहते हुए दूर से टारगेट पर हमला करने की क्षमता. जितनी स्टैंडऑफ क्षमता होगी, किसी हमले से बचने की क्षमता उतनी ही अधिक होगी. 

ऑब्जर्वेशन सेंसरः हेरॉन MK II में बड़ा और बेहतर सेंसर लगा है. इससे ड्रोन को अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से सेट किया जा सकता है. ये सेंसर बहुत दूर से ही दुश्मन के इलाके में काफी नीचे तक साफ-साफ देख सकते हैं. यह सिर्फ फोटो ही नहीं खींचता, बल्कि दुश्मन के रेडियो सिग्नल पकड़ने और संचार में मदद करने जैसे खास कामों के लिए भी इस्तेमाल हो सकता है.

सटीक हमला: ये ड्रोन हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस हो सकते हैं, जिससे यह किलर ड्रोन की भूमिका निभाते हैं. यह ड्रोन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हैं, जो खुद ही लक्ष्य की पहचान कर सकते हैं. 

अन्य रक्षा प्रणालियां

ड्रोन के अलावा, इस यात्रा में आयरन बीम (Iron Beam) पर भी चर्चा हो सकती है जो लेजर पर आधारित मिसाइल रक्षा प्रणाली (मिसाइल डिफेंस सिस्टम) है, यह ड्रोन और रॉकेट हमलों को बहुत कम लागत के साथ नष्ट कर सकती है. यह दौरा न केवल भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि दक्षिण एशिया में एक मजबूत 'डिटेरेंस' (प्रतिरोध) पैदा करेगा.

बता दें कि भारत ने बीते कुछ वर्षों के दौरान इजराइल से जो प्रमुख सौदे किए हैं उनमें 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर में फाल्कन AWACS (2004), 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर में हेरॉन-टीपी सशस्त्र ड्रोन (2015), हेरॉन यूएवी (2009), 2016 में एक बिलियिन डॉलर में दो अतिरिक्त AWACS के लिए की गई डील, 2017 में सेना के लिए 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर में बराक -8 मिसाइल की खरीद और 2019-2020 में स्पाइस बम की खरीद शामिल है.

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