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चीन को आखिर किस बात का है डर? बीजिंग में ड्रोन पर बैन; 1 मई से बेचने-खरीदने पर रोक

दुनिया के सबसे बड़े ड्रोन बाजार और डीजेआई (DJI) जैसी दिग्गज कंपनियों के घर चीन में ही अब ड्रोन उड़ाना सबसे मुश्किल काम होने वाला है. अधिकारियों का मानना है कि 'लो-एल्टीट्यूड' (कम ऊंचाई वाले) हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए इन चुनौतियों से निपटना जरूरी हो गया है.

चीन को आखिर किस बात का है डर? बीजिंग में ड्रोन पर बैन; 1 मई से बेचने-खरीदने पर रोक

China Drone Ban: चीन अपनी राजधानी बीजिंग को 'नो-ड्रोन ज़ोन' में तब्दील करने जा रहा है. सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए चीनी अधिकारियों ने बीजिंग में ड्रोन्स की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है. शुक्रवार यानी 1 मई 2026 से लागू होने वाले इन नए और कड़े नियमों के तहत अब बीजिंग में न तो ड्रोन खरीदे जा सकेंगे और न ही किराए पर लिए जा सकेंगे. इतना ही नहीं, जो लोग पहले से ड्रोन के मालिक हैं, उनके लिए भी अब पुलिस के पास रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है.

हैरानी की बात यह है कि दुनिया के सबसे बड़े ड्रोन बाजार और डीजेआई (DJI) जैसी दिग्गज कंपनियों के घर चीन में ही अब ड्रोन उड़ाना सबसे मुश्किल काम होने वाला है. अधिकारियों का मानना है कि 'लो-एल्टीट्यूड' (कम ऊंचाई वाले) हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए इन चुनौतियों से निपटना जरूरी हो गया है.

बाजार से गायब होंगे ड्रोन, मरम्मत के लिए भी कड़े नियम

नए नियमों का असर इतना व्यापक है कि बीजिंग में मौजूद ड्रोन्स के शोरूम्स ने अपनी शेल्फ से प्रोडक्ट हटाने शुरू कर दिए हैं. अब कोई भी व्यक्ति राजधानी के भीतर ड्रोन या उसके मुख्य पुर्जे नहीं ला सकेगा. यदि किसी का ड्रोन खराब होता है और उसे मरम्मत के लिए शहर से बाहर भेजा जाता है, तो उसे वापस मंगवाने के लिए कूरियर का सहारा नहीं लिया जा सकेगा; मालिक को खुद जाकर अपना ड्रोन लाना होगा.
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सुरक्षा के इस घेरे को इतना सख्त बनाया गया है कि बीजिंग में किसी भी तरह की आउटडोर उड़ान के लिए अब पहले से सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही, ड्रोन चलाने वालों को एक ऑनलाइन ट्रेनिंग सेशन पूरा करना होगा और नियमों से जुड़े टेस्ट को पास करना होगा. हालांकि, आतंकवाद विरोधी अभियानों और आपदा राहत जैसे कार्यों के लिए विशेष मंजूरी के साथ छूट दी जा सकती है.

सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन की चुनौती

चीन के लिए यह फैसला थोड़ा पेचीदा भी है, क्योंकि वह अपनी 'लो-एल्टीट्यूड इकोनॉमी' को एक रणनीतिक प्राथमिकता मानता है. अनुमान है कि साल 2035 तक यह सेक्टर चीन की अर्थव्यवस्था में 2 लाख करोड़ युआन (करीब 290 अरब डॉलर) का योगदान देगा.

चीन के कई शहरों में ड्रोन से फूड डिलीवरी, खेती और इमारतों की सफाई आम बात है, लेकिन बीजिंग की सुरक्षा के आगे सरकार ने आर्थिक हितों को पीछे रख दिया है.
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बीजिंग म्युनिसिपल पीपुल्स कांग्रेस के वरिष्ठ अधिकारी श्योंग जिंगहुआ के अनुसार, इन नियमों का उद्देश्य सुरक्षा और तकनीक के बीच एक 'बेहतरीन संतुलन' बनाना है. बता दें कि पिछले साल ही बीजिंग के पूरे हवाई क्षेत्र को नो-ड्रोन जोन घोषित कर दिया गया था, जहां बिना हवाई यातायात अधिकारियों की मंजूरी के कुछ भी उड़ाना प्रतिबंधित है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीन में इस समय 30 लाख (3 मिलियन) से ज्यादा रजिस्टर्ड ड्रोन हैं. दुनिया की सबसे बड़ी ड्रोन निर्माता कंपनी DJI का मुख्यालय भी चीन में ही है.

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