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3000 KM दूर से ही अमेरिका का जंगी जहाज मार गिराएगा ड्रैगन, चीन वैज्ञानिकों ने खोज लिया तरीका

चीन की समंदर में ताकत बढ़ रही है और इस बात से अमेरिकी सेना भी वाकिफ है. ऐसे में चीनी वैज्ञानिकों ने जो रिसर्च पेपर जारी किया है, अगर वह सही साबित हुआ तो अमेरिका घर के पास भी सुरक्षित नहीं रहेगा.

3000 KM दूर से ही अमेरिका का जंगी जहाज मार गिराएगा ड्रैगन, चीन वैज्ञानिकों ने खोज लिया तरीका
अमेरिका के जंगी जहाज USS Abraham Lincoln की फाइल फोटो (एएफपी)

क्या चीन ने हजारों किलोमीटर दूर गश्ती मार रहे अमेरिका के ताकतवर जंगी जहाजों की कमजोरी खोज ली है? चीन के रक्षा वैज्ञानिकों का एक नया दावा दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है. चीन के एक रिसर्च पेपर में दावा किया गया है कि अमेरिका के फाइटर जेट से लैस जंगी जहाजों के समूह (कैरियर ग्रुप) को 3,000 किलोमीटर दूर से भी निशाना बनाया जा सकता है. यानी शंघाई में बैठे-बैठे अमेरिकी द्वीप गुआम में मौजूद जंगी जहाज को तबाह किया जा सकेगा. खास बात यह है कि यह रिसर्च पेपर ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका अपने इन सबसे ताकतवर नौसैनिक हथियारों को एशिया के तटों से दूर और ज्यादा सुरक्षित इलाकों में तैनात कर रहा है.

रिसर्च में क्या दावा किया गया है?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार यह रिसर्च चीन के नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने किया है. इस रिसर्च टीम को एसोसिएट प्रोफेसर गाओ तियानयुन ने लीड किया है. उनकी स्टडी चीन की प्रमुख रक्षा पत्रिका "टैक्टिकल मिसाइल टेक्नोलॉजी" में छपी है.

रिपोर्ट के अनुसार, पहले अमेरिकी नौसेना के बड़े जहाज जापान, साउथ कोरिया, फिलीपींस और साउथ चाइना सी के आसपास अपेक्षाकृत चीन के करीब तैनात रहते थे. लेकिन चीन की बढ़ती मिसाइल क्षमता को देखते हुए अमेरिका ने अपनी रणनीति बदल दी. अब वह अपने जहाजों को एक जगह रखने के बजाय सैकड़ों किलोमीटर में फैला देता है. सबसे ताकतवर और महंगे विमानवाहक पोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) पीछे रहते हैं, जबकि छोटे जहाज आगे बढ़कर सुरक्षा कवच और रडार की भूमिका निभाते हैं.

चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि अमेरिका के इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए सबसे पहले बाहरी सुरक्षा परत को कमजोर करना होगा. रिसर्च में दावा किया गया है कि पनडुब्बी से छोड़े गए बेहद तेज गति वाले हाइपरसोनिक मिसाइलों के जरिए आगे तैनात सुरक्षा जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है. उनका मानना है कि यदि बाहरी रक्षा परत में सेंध लग जाए तो मेन एयरक्राफ्ट कैरियर हमले के लिए ज्यादा खुला और असुरक्षित हो जाएगा.

इसके बाद रिसर्च में एक संयुक्त हमले की बात कही गई है. इसमें अलग-अलग प्रकार के हथियारों और ड्रोन का इस्तेमाल कर दुश्मन की रक्षा प्रणाली पर दबाव बनाने की बात कही गई है. उद्देश्य यह है कि दुश्मन का डिफेंस सिस्टम एक साथ कई दिशाओं से आने वाले खतरों में उलझ जाए.

रिपोर्ट में 'लीडर-फॉलोअर' नाम की एक रणनीति का भी जिक्र है. इसके तहत ग्रुप में मौजूद एक मिसाइल ऊपर रहकर जानकारी जुटाती है और बाकी मिसाइलों को टागरेट की सूचना देती है. यदि उस मिसाइल को दुश्मन देश नष्ट कर दे तो दूसरी मिसाइल उसकी जगह संभाल लेती है. यह ख्याल रहे कि यह केवल एक रिसर्च पेपर है और इसमें सैन्य मिशन की हाइपोथेटिकल थ्योरी पर बात की गई है. इसके बावजूद इससे यह जरूर पता चलता है कि चीन और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी और सैन्य ताकत का कंपटीशन समंदर के अंदर भी नए स्तर पर पहुंच चुका है.

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