- बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को 13वें आम चुनाव में प्रचंड बहुमत मिला है और तारिक रहमान अगला प्रधानमंत्री बनेंगे
- बांग्लादेश की एकसदनीय जातीय संसद में 300 निर्वाचित सीटों में से कम से कम 151 सीटों पर बहुमत जरूरी होता है
- सरकार गठन के बाद स्पष्ट बहुमत हो तो तत्काल विश्वास मत की आवश्यकता नहीं होती. शपथ लेते सरकार काम शुरू करती है
Bangladesh Election Result 2026: बांग्लादेश चुनाव के नतीजे साफ हो गए हैं. तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को 13वें आम चुनाव में निर्णायक जीत मिली है. अबतक के नतीजों और ट्रेंड के अनुसार पार्टी को प्रचंड बहुमत मिल रहा है और इससे 60 वर्षीय तारिक रहमान के लिए बांग्लादेश का अगला प्रधान मंत्री बनने का मंच तैयार हो गया है. ब्रिटेन में 17 साल के निर्वासन के बाद देश लौटे तारिक को अपनी दोनों सीट, ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों से जीत हासिल हुई है. सवाल है बांग्लादेश में अब आगे किन नियमों से तारिक रहमान की सरकार बनेगी. वहां का संविधान नई सरकार के गठन को लेकर क्या कहता है और यह भारत से कितना अलग है. चलिए समझते हैं.
बांग्लादेश में कैसे बनती है सरकार?
बांग्लादेश में, सरकार का गठन संसदीय प्रणाली का पालन करता है जहां वास्तविक शक्ति प्रधान मंत्री के पास होती है. जहां भारत के संसद में दो सदन हैं (लोकसभा और राज्यसभा), वहीं बांग्लादेश में एकसदनीय संसद है. इसे जातीय संसद कहा जाता है. आम चुनावों के बाद किसी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जातीय संसद की 300 निर्वाचित सीटों में से कम से कम 151 का साधारण बहुमत हासिल करना होता है. इन 300 निर्वाचित सीटों के अलावा महिलाओं के लिए आरक्षित 50 सीटें बाद में आनुपातिक आधार पर आवंटित की जाती हैं. बहुमत केवल चुनी गईं 300 सीटों के आधार पर ही तय किया जाता है.
प्रधान मंत्री और मंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक कि वे अविश्वास प्रस्ताव नहीं हार जाते, इस्तीफा नहीं दे देते, या संसद भंग नहीं हो जाती. त्रिशंकु संसद की स्थिति में, राष्ट्रपति पार्टियों से परामर्श कर सकते हैं और सबसे बड़े समूह को सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं.
भारत से कैसे अलग है बांग्लादेश का सिस्टम?
दोनों देश संसदीय प्रणाली का पालन करते हैं जहां प्रधान मंत्री को निचले सदन में बहुमत से चुना जाता है, लेकिन बांग्लादेश में एक सदनीय संसद है और संवैधानिक रूप से किसी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत होने पर तत्काल शक्ति परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है, जबकि भारत में अक्सर विश्वास मत की मांग की जाती है, खासकर करीबी या विवादित जनादेश में. बांग्लादेश में, राष्ट्रपति की भूमिका काफी हद तक औपचारिक और परंपरा से बंधी होती है, जिससे किसी नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने में बहुत सीमित विवेक मिलता है, जबकि भारत में राष्ट्रपति के पास त्रिशंकु संसद में, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों द्वारा निर्देशित, गठबंधनों को बुलाने और फ्लोर टेस्ट का आदेश देने का व्यापक विवेक होता है.
बांग्लादेश ने 2011 में अपनी कार्यवाहक सरकार प्रणाली को समाप्त कर दिया था, इसलिए चुनाव और सरकार का गठन मौजूदा प्रशासन के तहत होता था. इससे अक्सर राजनीतिक विवाद होते रहें. जब 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरी तो इसे फिर से प्रभावी ढंग से पुनर्जीवित किया गया. इस बार की चुनावी प्रक्रिया को मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अपनी देखरेख में पूरा करया है. जबकि दूसरी तरफ भारत ने हमेशा केयर टेकर सरकार के बिना तटस्थ संवैधानिक ढांचे के तहत चुनाव आयोजित किए हैं. इससे भारत में एक प्रक्रियात्मक स्थिरता बनी रहती है.
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