- बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP दो-तिहाई बहुमत के साथ चुनाव जीतकर सरकार बनाती दिख रही है
- पाकिस्तान को जमात-ए-इस्लामी की हार से निराशा होगी क्योंकि वह कट्टरपंथी सरकार चाहता था जो भारत को घेर सके
- पाकिस्तान ने BNP को जीत की बधाई दी लेकिन चाहेगा कि BNP भारत के साथ संबंध सुधारने से बचे
Bangladesh Election Result 2026: बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व में BNP ने प्रचंड जीत हासिल कर ली है. पार्टी दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बना रही है. 2024 के जुलाई विद्रोह में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद का यह पहला चुनाव था और इसके नतीजे का असर पूरे दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरण पर होना है. इस नतीजे पर भारत की भी नजर है और नापाक मंसूबे रखने वाले पाकिस्तान की भी. बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की करारी हार आज पाकिस्तान को खुद की हार की तरह लग रही होगी क्योंकि वह जमात के कट्टरपंथी नीतियों के भरोसे भारत को घेरने की फिराक में था. चलिए समझते हैं कि बांग्लादेश चुनाव में BNP की जीत और जमात की हार को पाकिस्तान किस नजर से देख रहा होगा.
बांग्लादेश के नतीजे पाकिस्तान के लिए झटके क्यों?
पहले तो जान लीजिए की पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और वहां के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने BNP और तारिक रहमान को इस शानदार जीत की बधाई दी है. लेकिन यह तो दिखाने वाला चेहरा हो गया. परदे के पीछे की सच्चाई यही है कि पाकिस्तान को इस नतीजे से टीस लगी है. दक्षिण एशिया मामलों के जानकार माइकल कुगेलमैन के अनुसार पाकिस्तान तो यही चाहता था कि बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की सरकार बने. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर बीएनपी की सरकार बनती है, तो पाकिस्तान उसे भी स्वीकार करेगा. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इस्लामाबाद चाहेगा कि बीएनपी भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश न करे, क्योंकि इससे पाकिस्तान की हाल की कोशिशों को झटका लगेगा.
पाकिस्तान कुल मिलाकर रक्षा और सांस्कृतिक कूटनीति के जरिए बांग्लादेश से नजदीकी बढ़ाना चाहता है. पाकिस्तान के लिए परेशानी है कि वो खुद कंगाल है और इसलिए वो अपनी आर्थिक दिक्कतों के कारण बांग्लादेश को व्यापार और निवेश में ज्यादा कुछ नहीं दे सकता. इसलिए वो चाहता था कि बांग्लादेश में जमात की सरकार बने जो सिर्फ कट्टरपंथी नीति अपनाए, आर्थिक और सामरिक सुरक्षा के बारे में न सोचे. पाकिस्तान जमात की सरकार बनने का सपना देखता रहा और उसके जरिए वह भारत की पूर्वी सीमा को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ाना चाहता था. हालांकि उसके इस सपने को झटका लगा.
बांग्लादेश की जनता पाकिस्तान के कुकर्मों को भूली नहीं है
थोड़ा आपको अतीत में ले चलते हैं. 1947 में ब्रिटेन से आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान बने. पाकिस्तान दो हिस्सों में था, जो एक-दूसरे से दूर थे. आज का बांग्लादेश तब पूर्वी पाकिस्तान कहलाता था. 1971 में भारत ने बांग्लादेश की मुक्ति लड़ाई का समर्थन किया. इस दौरान पाकिस्तानी सेना पर भारी अत्याचार के आरोप लगे- सैकड़ों हजार लोगों की मौत हुई और करीब 2 लाख महिलाओं के साथ बलात्कार के आरोप लगे. बांग्लादेश आज भी पाकिस्तान से माफी की मांग करता है लेकिन उसने कभी अपने गुनाहों की माफी नहीं मांगी. खास बात है कि जमात-ए-इस्लामी ने आजादी की लड़ाई के वक्त पाकिस्तान का साथ दिया था और बांग्लादेश की जनता यह बात आजतक नहीं भूली है.
बांग्लादेशी स्वतंत्रता सेनानी टी एम रेजाउल करिन ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, "सभी लोग मतदान कर रहे थे, उन्होंने अपने मतदान अधिकार का प्रयोग किया है, और हिंदू या मुस्लिम या बौद्ध या ईसाई का कोई सवाल नहीं है. 1971 में सभी बांग्लादेशियों को पाकिस्तान से बांग्लादेश में आजाद कर दिया गया था. हर कोई, सभी समुदाय खूनी पाकिस्तानी सेनाओं के खिलाफ लड़े थे."
यूनुस सरकार में करीब आए पाकिस्तान बांग्लादेश
हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद, पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते कुछ गर्म हुए हैं. खासकर अंतरिम सरकार के मुखिया यूनुस ने बांहें खोलकर पाकिस्तान का स्वागत किया. जिस साल हसीना को जुलाई में हटाया गया, उसी साल यानी 2024 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने यूनुस से दो बार मुलाकात की. पाकिस्तान का मकसद साथ था- वो बांग्लादेश से अपने सैन्य और कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत करना चाहता था. इतना ही नहीं पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार खुद ढाका गए. उन्होंने उस रिश्ते को फिर से सक्रिय करने की बात कही, जो 1971 में बांग्लादेश की आजादी की जंग के बाद टूट गया था.
पिछले साल फरवरी में, 1971 के बाद पहली बार दोनों देशों ने सीधे व्यापार को फिर से शुरू किया. यह समझौता यूनुस की पहल पर हुआ. जनवरी 2026 में 14 साल बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी शुरू हुईं.
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