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जिस बांग्लादेश में लगातार 35 साल हसीना-खालिदा ने किया राज, वहां केवल इन 7 महिलाओं को मिली जीत

Bangladesh Election Result 2026: 12 फरवरी को हुए चुनाव के लिए कुल 2,568 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से सिर्फ 109 महिलाएं थीं, यानी करीब 4.24 प्रतिशत.

जिस बांग्लादेश में लगातार 35 साल हसीना-खालिदा ने किया राज, वहां केवल इन 7 महिलाओं को मिली जीत
Bangladesh Election Result 2026: बांग्लादेश चुनाव में केवल 7 महिलाओं को मिली जीत
  • बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में केवल सात महिला उम्मीदवार जीतकर संसद पहुंची हैं
  • बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की छह महिला उम्मीदवार जीत हासिल कर संसद में पहुंचीं
  • निर्दलीय उम्मीदवार रूमिन फरहाना ने ब्राह्मणबरिया-2 सीट से जीत हासिल की, जो पहले BNP में ही थीं
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Bangladesh Election Result 2026: बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में महिलाओं की भागीदारी अब तक के सबसे निचले स्तर पर रही. स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अब तक सामने आए अनौपचारिक नतीजों में सिर्फ सात महिला उम्मीदवार जीतकर संसद पहुंची हैं. दो-तिहाई से अधिक का बहुमत पाने वाली तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की छह महिला उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों से जीत गईं. इन सभी ने धान की बाली चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था. BNP की जिन महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, उनमें माणिकगंज-3 से अफरोजा खान रीता, झालोकाठी-2 से इसरत सुल्ताना एलन भुट्टो, सिलहट-2 से तहसीना रुशदिर लूना, फरीदपुर-2 से शामा ओबैद, फरीदपुर-3 से नायब यूसुफ कमाल और नाटोर-1 से फरजाना शर्मिन पुतुल शामिल हैं.

इसके अलावा ब्राह्मणबरिया-2 सीट से रूमिन फरहाना एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतीं. इससे पहले उन्हें बीएनपी से निष्कासित कर दिया गया था. यह जानकारी बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून ने दी है.

बांग्लादेश में निशाने पर थीं महिला उम्मीदवार और वोटर

जब बांग्लादेश में मतदान हुआ, तब संयुक्त राष्ट्र ने महिला उम्मीदवारों और महिला मतदाताओं के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की खबरों पर चिंता जताई थी. खास तौर पर सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से हो रहे उत्पीड़न को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने सख्त रुख अपनाने की मांग की. ढाका स्थित संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय ने बयान में कहा कि सार्वजनिक जीवन में सुरक्षित, समावेशी और सार्थक भागीदारी हर व्यक्ति का मूल अधिकार है.

संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि राजनीति, सामाजिक कार्य, पत्रकारिता और मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं साइबर बुलिंग, फर्जी वीडियो, संगठित ऑनलाइन हमले और तस्वीरों के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं की शिकायत कर रही हैं. इसमें AI से बदली गई और यौन प्रकृति के कंटेंट भी शामिल हैं. पिछले महीने बांग्लादेश चुनाव आयोग ने आंकड़े जारी कर बताया कि महिलाओं और पुरुषों के बीच भारी असमानता है. देश की आबादी में महिलाएं लगभग आधी हैं, लेकिन चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों में उनकी संख्या बहुत कम है.

कुल उम्मीदवारों में 5% भी महिलाएं नहीं

12 फरवरी को हुए चुनाव के लिए कुल 2,568 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से सिर्फ 109 महिलाएं थीं, यानी करीब 4.24 प्रतिशत. इनमें 72 महिलाओं को राजनीतिक दलों ने टिकट दिया, जबकि बाकी निर्दलीय थीं. यह जानकारी बांग्लादेश के प्रमुख अख़बार द डेली स्टार ने दी. कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने 276 उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी महिला को टिकट नहीं दिया. इसी तरह इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश ने 268 उम्मीदवारों में एक भी महिला को मौका नहीं दिया.

बीएनपी, जिसकी अगुवाई चार दशक से अधिक समय तक एक महिला ने की, उसने भी 300 सीटों के लिए सिर्फ 10 महिलाओं को टिकट दिया. कई अन्य दलों ने भी महिलाओं को पूरी तरह बाहर रखा. इनमें बांग्लादेश खिलाफत मजलिस, खिलाफत मजलिस और बांग्लादेश इस्लामी फ्रंट शामिल हैं, जिन्होंने केवल पुरुष उम्मीदवार ही उतारे.

मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के करीब 18 महीने के कार्यकाल के दौरान महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई. वहीं, कई आलोचकों ने निर्णय लेने की प्रक्रिया से महिलाओं को बाहर रखने पर भी चिंता जताई.

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